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संयुक्त ज़िला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस रिपोर्ट

(प्रारंभिक परीक्षा- सामाजिक विकास)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारत में स्कूली शिक्षा के लिये ‘संयुक्त ज़िला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस’ (Unified District Information System for Education Plus: UDISE+) 2019-20 से जुड़ी रिपोर्ट जारी की।

यू.डी.आई.एस.ई.+ प्रणाली

  • स्कूलों में ऑनलाइन डाटा संग्रहण की यू.डी.आई.एस.ई.+ प्रणाली को वर्ष 2018-19 में विकसित किया गया था। इसका लक्ष्य पेपर प्रारूप में मैनुअल तरीके से डाटा भरने और ब्लॉक या ज़िला स्तर पर फीडिंग से संबंधित समस्याओं को दूर करना है।
  • वर्ष 2012-13 से यू.डी.आई.एस.ई. डाटा संग्रहण प्रणाली में मैनुअल तरीके का प्रयोग किया जा रहा था। मौजूदा रिपोर्ट संदर्भ वर्ष 2019-20 के लिये यू.डी.आई.एस.ई.+ डाटा से संबंधित है।

महत्त्वपूर्ण सुधार

  • यू.डी.आई.एस.ई.+ 2019-20 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 में स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio: GER) में वर्ष 2018-19 की तुलना में सुधार हुआ है। स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर ‘छात्र-शिक्षक अनुपात’ (Pupil Teacher Ratio: PTR) में भी सुधार हुआ है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक बालिकाओं का नामांकन 12.08 करोड़ से अधिक है। इसमें वर्ष 2018-19 की तुलना में 14.08 लाख की वृद्धि हुई है। वर्ष 2012-13 और 2019-20 के बीच, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक दोनों स्तरों पर लिंग समानता सूचकांक (Gender Parity Index: GPI) में सुधार हुआ है।
  • यू.डी.आई.एस.ई.+ रिपोर्ट से पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2019-20 में संचालनगत अवस्था में बिजली और कंप्यूटर तथा इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार का पता चलता है।
  • हाथ धोने की सुविधा वाले स्कूलों की संख्या में भी विशेष सुधार देखा गया है। वर्ष 2019-20 में, भारत में 90% से अधिक स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा थी, जबकि 2012-13 में यह आँकड़ा मात्र 36.3% था।

संयुक्त ज़िला सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+) 2019-20 रिपोर्ट के मुख्य बिंदु 

  • वर्ष 2019-20 में पूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक स्कूली शिक्षा में कुल छात्रों की संख्या 26.45 करोड़ के पार पहुँच गई। यह 2018-19 की तुलना में 42.3 लाख अधिक है।
  • वर्ष 2019-20 में (2018-19 से) उच्च प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात बढ़कर 89.7% (87.7% से), प्रारंभिक स्तर पर 97.8% (96.1% से), माध्यमिक स्तर पर 77.9% (76.9% से) और उच्च माध्यमिक स्तर पर 51.4% (50.1% से) हो गया है।
  • वर्ष 2012-13 और 2019-20 के बीच माध्यमिक स्तर में सकल नामांकन अनुपात में लगभग 10% का सुधार हुआ है। इसी अवधि के दौरान उच्च माध्यमिक स्तर में सकल नामांकन अनुपात में 11% से अधिक का सुधार हुआ है।
  • वर्ष 2019-20 में प्राथमिक स्तर के लिये पी.टी.आर. 26.5, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के लिये पी.टी.आर. 18.5 और उच्च माध्यमिक के लिये पी.टी.आर. 26.1 हो गया है।
  • शारीरिक रूप से अशक्त लोगों के लिये शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिये हर संभव प्रयास किये गए हैं। वर्ष 2018-19 की तुलना में दिव्यांग छात्रों के नामांकन में 6.52% की वृद्धि हुई है।
  • उच्चतर माध्यमिक स्तर पर जी.पी.आई. में सबसे अधिक सुधार हुआ, जो वर्ष 2012-13 में 0.97 से बढ़कर 2019-20 में 1.04 हो गया। वर्ष 2019-20 में 82% से अधिक स्कूलों ने छात्रों का मेडिकल चेकअप किया, जो पिछले वर्ष 2018-19 की तुलना में 4% से अधिक की वृद्धि है।
  • भारत में 84% से अधिक स्कूलों में वर्ष 2019-20 में एक पुस्तकालय/रीडिंग रूम/रीडिंग कॉर्नर था, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4% का सुधार हुआ है।
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