• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़ : 03 नवंबर, 2022


लाडली लक्ष्मी योजना 2.0

प्रसाद पर्यंत का सिद्धांत


लाडली लक्ष्मी योजना 2.0

चर्चा में क्यों

हाल ही में, मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने ‘लाडली लक्ष्मी योजना 2.0’ का शुभारंभ किया। 

प्रमुख बिंदु  

  • लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 के तहत राज्य में लाडली लक्ष्मी बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिये 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में दी जाएगी। 
    • विदित है कि लाडली लक्ष्मी योजना की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी। 
  • इसके अतिरिक्त राज्य में ‘लाडली लक्ष्मी पथ’ की शुरुआत की गई जिसके तहत प्रत्येक जिले में एक सड़क का नाम ‘लाडली लक्ष्मी पथ’ के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही, 'लाडली लक्ष्मी वाटिका' का भी उद्घाटन किया गया। 

योजना के उद्देश्य 

  • राज्य में लिंगानुपात में सुधार लाना। 
  • लोगों में बालिकाओं के जन्म के प्रति सकारात्मक सोच पैदा करना।
  • बालिकाओं की शिक्षा एवं स्वास्थ्य स्थिति में सुधार लाना। 
  • जनसंख्या वृद्धि दर को कम करना तथा परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना।
    • विशेषकर दो बालिकाओं के जन्म के बाद बालक के जन्म को हतोत्साहित करना। 
  • कन्या भ्रूण हत्या/शिशु हत्या को रोकना।
  • बालिकाओं के विकास के लिये सकारात्मक एवं सक्षम वातावरण का निर्माण करना। 
  • बाल विवाह को हतोत्साहित करना। 

लाभ 

  • योजना के तहत बालिका के नाम से शासन की ओर से 1,18000 रुपए का आश्वासन प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है। 
  • पंजीकृत बालिका को कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2000 रुपए, कक्षा 9वीं में प्रवेश पर 4000 रुपए, कक्षा 11वीं में प्रवेश पर 6000 रुपए एवं कक्षा 12वीं में प्रवेश पर 6000 रुपए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। 
  • कक्षा 12वीं के पश्चात् स्नातक अथवा व्यावसायिक पाठ्यक्रम में (अवधि न्यूनतम दो वर्ष) प्रवेश लेने पर 25000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दो समान किश्तों में प्रथम एवं अंतिम वर्ष में दी जाएगी। 
  • बालिका की आयु 21 वर्ष पूर्ण होने पर कक्षा 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एवं बालिका का विवाह निर्धारित आयु पूर्ण करने के बाद होने पर 1 लाख रुपए का अंतिम भुगतान किये जाने का प्रावधान है।

प्रसाद पर्यंत का सिद्धांत

चर्चा में क्यों 

हाल ही में, केरल के राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल के एक सदस्य को गैर-जिम्मेदारीपूर्ण टिप्पणी के लिये बर्खास्त करने की माँग की है, जो कि राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करते हैं। 

क्या है प्रसाद पर्यंत का सिद्धांत 

  • यह ब्रिटिश कॉमन लॉ से ली गई एक अवधारणा है, जिसके तहत ताज (Crown) अपने अधीन नियोजित किसी भी व्यक्ति को किसी भी समय उसकी सेवाओं से विमुक्त कर सकता है। 
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 310 में प्रावधान है कि प्रत्येक व्यक्ति, जो रक्षा सेवा या संघ की सिविल सेवा या अखिल भारतीय सेवा का सदस्य है, राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत पद धारण करेंगे और प्रत्येक व्यक्ति, जो राज्य की सिविल सेवा का सदस्य है, राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करेंगे।  
    • हालाँकि, अनुच्छेद 311 संघ या राज्य के अधीन नियुक्त किसी सिविल सेवक को पदच्युत करने पर प्रतिबंध लगाता है। यह सिविल सेवकों को आरोपों पर सुनवाई के लिये युक्तियुक्त अवसर प्रदान करता है। 
    • यदि आरोपों की जाँच करना व्यावहारिक नहीं है, या राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में ऐसा करना उचित नहीं है, तो जाँच को समाप्त करने का भी प्रावधान है। 
  • अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की नियुक्ति की जाती है। इस अनुच्छेद के अनुसार अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है जो राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करते हैं। 
  • विदित है कि राज्य के मंत्रियों को केवल मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त किया जाता है, अतः संदर्भित 'प्रसाद पर्यंत' का अर्थ मुख्यमंत्री द्वारा किसी मंत्री को बर्खास्त करने के अधिकार से है, न कि राज्यपाल के अधिकार से। स्पष्ट है कि किसी राज्य का राज्यपाल बिना मुख्यमंत्री की सलाह के किसी मंत्री को नहीं हटा सकता है।

CONNECT WITH US!

X