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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 06 मई, 2022


आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के उपदान संबंधी विवाद

चीन का वैश्विक सुरक्षा पहल प्रस्ताव


आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के उपदान संबंधी विवाद

चर्चा में क्यों

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएँ उपदान (Gratuity) की हकदार हैं, जो कि एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा उपाय है। 

प्रमुख बिंदु

  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ लगभग 158 मिलियन बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों की देखभाल करती हैं, जिन्हें ‘भविष्य का मानव संसाधन’ माना जाता है। 
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत सरकार और लाभार्थियों के बीच सेतु का कार्य करती हैं।
  • यह चिंताजनक है कि महत्वपूर्ण सेवाओं की मुख्य धारा में कार्य करने के बावजूद भी इन्हें उपदान संदाय अधिनियम, 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972) के तहत उनके उपदान भुगतान के अधिकार के लिये कोई प्रावधान नहीं है।

वैधानिक दायित्व

  • उपदान किसी प्रतिष्ठान को बेहतर बनाने, विकास एवं समृद्धि की दिशा में किसी व्यक्ति के प्रयासों की सराहना करने के लिये आवश्यक प्रेरणादायी तत्त्व है। यही कारण है कि उपदान को सामाजिक सुरक्षा माना जाता है। समय के साथ यह नियोक्ताओं की ओर से एक वैधानिक दायित्व भी बन गया है।
  • न्यायालय ने रेखांकित किया कि केंद्र तथा राज्यों दोनों को मिलकर इनकी सेवा शर्तों को बेहतर बनाने हेतु सामूहिक रूप से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि सामुदायिक भागीदारी के साथ सेवाओं के वितरण की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।  

एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना

  • भारत सरकार की यह योजना बचपन की देखभाल और विकास के लिये दुनिया के सबसे बड़े और अनूठे कार्यक्रमों में से एक है। यह बच्चों और महिला नर्सों के प्रति देश की प्रतिबद्धता का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रतीक है
  • यह स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा प्रदान करने और कुपोषण, रुग्णता, सीखने की क्षमता में कमी तथा मृत्यु-दर के दुष्चक्र को तोड़ने की चुनौती की प्रतिक्रिया के रूप में कार्यरत है। 

लाभार्थी

इस योजना के लाभार्थी 0-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ हैं।

शुरुआत : 2 अक्टूबर, 1975 


चीन का वैश्विक सुरक्षा पहल प्रस्ताव

चर्चा में क्यों

चीनी राष्ट्रपति ने विश्व के सभी देशों के लिये सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘वैश्विक सुरक्षा पहल’ (Global Security Initiative) का प्रस्ताव रखा है। 

प्रमुख बिंदु

  • इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रों के बीच समानता और न्याय को बढ़ावा देकर वैश्विक शांति और स्थिरता को स्थापित करना है। 
  • ‘बोआओ फोरम फॉर एशिया’ (BFA) के वार्षिक सम्मेलन 2022 के तहत चीन ने वैश्विक सुरक्षा के लिये छह-सूत्रीय प्रस्ताव की रूपरेखा तैयार की है, जो कि निम्नवत् हैं-
    • साझा, व्यापक, सहयोगात्मक एवं सतत सुरक्षा के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध रहना तथा वैश्विक शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिये मिलकर काम करना। 
    • सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिये प्रतिबद्ध रहना, आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप को बनाए रखना।
    • देशों को सभी देशों की वैध सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेने के लिये प्रतिबद्ध रहना, ‘अविभाज्य सुरक्षा’ के सिद्धांत को बनाए रखना, एक संतुलित, प्रभावी और टिकाऊ सुरक्षा संरचना का निर्माण करना तथा दूसरों की सुरक्षा की कीमत पर अपनी सुरक्षा की खोज का विरोध करना।
    • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन करने के लिये प्रतिबद्ध रहना, शीतयुद्ध की मानसिकता को ख़ारिज करना तथा एकपक्षवाद का विरोध करना। 
    • वार्ता और परामर्श के माध्यम से देशों के बीच मतभेदों और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के लिये प्रतिबद्ध होना, संकटों के शांतिपूर्ण समाधान के लिये अनुकूल सभी प्रयासों का समर्थन करना, दोहरे मानकों को अस्वीकार करना तथा एकतरफा प्रतिबंधों व लंबे समय तक अधिकार क्षेत्र के उपयोग का विरोध करना।
    • पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखने के लिये देशों का प्रतिबद्ध होना, क्षेत्रीय विवादों और आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा एवं जैव सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करना।

बोआओ फोरम

  • बोआओ फोरम फॉर एशिया, वर्ष 2001 में 25 एशियाई देशों और ऑस्ट्रेलिया द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया एक गैर-लाभकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। 
  • यह एशिया के साथ-साथ विश्व भर में राजनीतिक, व्यापारिक और अकादमिक नेताओं के लिये अपनी दृष्टि साझा करने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय मंचों की मेजबानी करता है।
  • यह क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने और एशियाई देशों को उनके विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता देने हेतु प्रतिबद्ध है।

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