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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 15 जनवरी, 2022


हरित ऊर्जा गलियारा चरण-II

प्राथमिक डीलर विंडो

स्मार्ट सिटी एंड एकेडेमिया टुवार्ड्स एक्शन एंड रिसर्च कार्यक्रम

भारतीयों नागरिकों के लिये ई-पासपोर्ट

उजाला कार्यक्रम

भारतीय मानक ब्यूरो के 75 वर्ष

दृष्टिबाधित छात्रों के लिये वरदान बनता ब्रेल मानचित्र


हरित ऊर्जा गलियारा चरण-II

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (Inter-State Transmission System) के लिये हरित ऊर्जा गलियारा (ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर) चरण-II को मंजूरी दी है।

प्रमुख बिंदु

  • योजना के तहत लगभग 10,750 सर्किट किमी पारेषण लाइन व 27,500 मेगा वोल्ट-एम्पियर (mVA) ट्रांसफार्मर क्षमता के अतिरिक्त सब-स्टेशन जोड़े जाएंगे।
  • इस योजना से सात राज्यों- गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में ग्रिड एकीकरण किया जाएगा।
  • योजना द्वारा वर्ष 2030 तक 450 गीगवाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • योजना से देश में दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान व कार्बन उत्सर्जन को कम करके पारिस्थितिक रूप से सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। 
  • इससे ऊर्जा और अन्य संबंधित क्षेत्रों में कुशल और अकुशल कामगारों के लिये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होंगे।

हरित ऊर्जा गलियारा चरण-I

चरण-I के तहत ग्रिड एकीकरण तथा लगभग 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु में ग्रिड एकीकरण किया जाएगा। 


प्राथमिक डीलर विंडो

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने बॅाण्ड हाउस के लिये ‘प्राथमिक डीलर’ नामक एक समर्पित विंडो की शुरुआत की है। विदित है कि बॅाण्ड हाउस एक प्रतिभूति फर्म होती है, जो बॅाण्ड बनाने, वितरण एवं व्यापार का कार्य करती है।

प्रमुख बिंदु 

  • इस विंडो के माध्यम से बॅाण्ड हाउस, खुदरा प्रत्यक्ष प्लेटफ़ॉर्म से प्राप्त गैर- तरल प्रतिभूतियों (सरकारी प्रतिभूति) को तरल प्रतिभूतियों (नकदी) से बदल सकते हैं।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म उन खुदरा निवेशकों के लिये उपयोगी है, जो म्यूचुअल फंड में निवेश किये बिना सीधे संप्रभु बॅाण्ड में निवेश करने के इच्छुक होते हैं।
  • इसके माध्यम से पूंजी बाज़ार को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि प्राथमिक डीलरों की खुदरा निवेश में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्राथमिक डीलर– यह कोई फर्म या व्यक्ति हो सकते हैं, जो दूसरों को पुनर्विक्रय करने के इरादे से सरकारी प्रतिभूतियों को सीधे सरकार से खरीदते हैं। इस प्रकार, ये सरकारी प्रतिभूतियों के बाज़ार-निर्माता के रूप में कार्य करते हैं। सरकार प्राथमिक डीलरों के व्यवहार एवं संख्या को विनियमित करने के लिये प्रवेश संबंधी शर्तें लगा सकती है।


स्मार्ट सिटी एंड एकेडेमिया टुवार्ड्स एक्शन एंड रिसर्च कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत “स्मार्ट सिटी एंड एकेडेमिया टुवार्ड्स एक्शन एंड रिसर्च (Smart cities and Academia Towards Action & Research- SAAR)” कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और देश के अग्रणी भारतीय शैक्षणिक संस्थानों की एक संयुक्त पहल है।

प्रमुख बिंदु

  • इस कार्यक्रम को देश भर में ‘आजादी के अमृत महोत्सव' के अंतर्गत शुरू किया गया है।
  • इस कार्यक्रम में शामिल 75 परियोजनाओं को 47 स्मार्ट शहरों में कार्यान्वित किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत  देश के 15 प्रमुख वास्तुकला और योजना संस्थान स्मार्ट सिटी मिशन द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं का दस्तावेज़ीकरण करेंगे।
  • इन दस्तावेजों में सर्वोत्तम परंपराओं से सीखने, छात्रों को शहरी विकास परियोजनाओं से जुड़ाव के अवसर प्रदान करने और शहरी व्यावसायियों तथा शिक्षाविदों के बीच वास्तविक समय में सूचना के प्रसार के उपायों का उल्लेख किया जाएगा।
  • परियोजनाओं का दस्तावेज़ीकरण करने वाले भागीदार संस्थानों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की; पर्यावरण योजना एवं प्रौद्योगिकी केंद्र, अहमदाबाद; जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली; स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल आदि शामिल हैं।


भारतीयों नागरिकों के लिये ई-पासपोर्ट

चर्चा में क्यों?

हाल ही, में केंद्र सरकार ने ई-पासपोर्ट जारी करने की व्यवस्था लागू की है। 

ई-पासपोर्ट 

  • यह पासपोर्ट बायोमेट्रिक डाटा पर आधारित होगा और यह विश्व स्तर पर आप्रवासन (Immigration) प्रक्रिया को सरल एवं सक्षम बनाएगा।
  • पासपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत एक माइक्रोचिप लगी होगी, जिसमें धारक के बायोमेट्रिक डाटा से संबंधित महत्त्वपूर्ण व सुरक्षा संबंधी जानकारियाँ संरक्षित होंगी।
  • ई-पासपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आई.सी.ए.ओ.) के मानकों पर आधारित होगा। इसका निर्माण भारत प्रतिभूति मुद्रणालय, नासिक द्वारा किया जाएगा। 

ई-पासपोर्ट के लाभ 

  • इसमें रेडियो-फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन के माध्यम से अनधिकृत डाटा स्थानांतरण को रोकना संभव होगा।
  • उन्नत दस्तावेज़ के प्रयोग से पहचान के दुरूपयोग एवं जालसाजी को रोकने और एक सुव्यवस्थित आप्रवासन प्रक्रिया के माध्यम से संपर्क बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO)

  • यह संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है। इसका मुख्यालय मॉन्ट्रियल (कनाडा) में स्थित है। 
  • इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय हवाई नेविगेशन की तकनीकों और सिद्धांतों में बदलाव तथा सुरक्षित एवं व्यवस्थित विकास की योजनाओं को बढ़ावा देना है।

उजाला कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, विद्युत मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015 से संचालित ‘सबके लिये सस्ते एल.ई.डी. द्वारा उन्नत ज्योति’ अर्थात् उजाला योजना (Unnat Jyoti by Affordable LEDs for All - UJALA) ने एलईडी लाइटों के वितरण और बिक्री के सात वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिये हैं।

प्रमुख बिंदु

  • यह विश्व का सबसे बड़ा गैर-सब्सिडी प्राप्त स्वदेशी प्रकाश कार्यक्रम बन गया है, जो महंगी बिजली और अदक्ष प्रकाश व्यवस्था के कारण उच्च उत्सर्जन की समस्याओं का समाधान करता है।
  • इस कार्यक्रम के तहत अब तक देशभर में 36.78 करोड़ से अधिक एल.ई.डी. लाइटों का वितरण किया गया है।
  • इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप एल.ई.डी. बल्बों की कीमत 310 रुपए प्रति बल्ब से कम होकर 38 रुपए प्रति बल्ब तक पहुँच गई है। 
  • स योजना के माध्यम से वर्तमान समय तक 47,778 मिलियन किलोवाट प्रति घंटा की वार्षिक ऊर्जा की बचत हुई है। 
  • इसके अलावा, 9,565 मेगावाट विद्युत की मांग में कमी आई है तथा 3.86 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड की कटौती भी हुई है।

भारतीय मानक ब्यूरो के 75 वर्ष

चर्चा में क्यों?

6 जनवरी, 2022 को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 75 वर्ष पूरे हुए।

भारतीय मानक ब्यूरो (बी.आई.एस.)

बी.आई.एस. को वर्ष 1947 में भारतीय मानक संस्था के रूप में स्थापित किया गया था। मानकीकरण और प्रमाणन की अपनी मुख्य गतिविधियों के माध्यम से बी.आई.एस. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है।

कार्य

मानकों की पहचान करना तथा तैयार करना और उनको बढ़ावा देना। यह भारतीय निर्माताओं, विदेशी निर्माताओं, भारतीय आयातकों के लिये उत्पाद प्रमाणन प्रदान करता है। वर्ष 2019 तक बी.आई.एस.ने 20,000 मानक तैयार किये है। वर्तमान समय स्पीड, स्किल, स्केल और स्टैंडर्ड को प्राथमिकता देने का है।

विकास के पाँच मंत्र

  • इसे वैश्विक संगठन के रूप में विकसित करना।
  • वैश्विक मानकों और अनुभवों से सीखकर उन्हें एकीकृत करके मानक विकसित करना।
  • प्रयोगशाला सत्यापन की आवश्यकताओं का आकलन करना।
  • उच्च गुणवत्ता वाली आधुनिक प्रयोगशालायें स्थापित करना और प्रभावी कीमत पर उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना।
  • ‘एक राष्ट्र-एक मानक’ की दिशा में कार्य करना और ‘मानक क्रांति’ स्थापित करना।

दृष्टिबाधित छात्रों के लिये वरदान बनता ब्रेल मानचित्र

चर्चा में क्यों?

देश भर में दृष्टिबाधित छात्र ‘डिजिटल एम्बॉसिंग’ (उभरे अक्षर) तकनीक का उपयोग करके बनाए गए ब्रेल मानचित्रों का उपयोग कर सकेंगें। 

डिजिटल एम्बॉसिंग तकनीक

  • डिजिटल एम्बॉसिंग तकनीक में प्रिंटिंग प्लेट, मोल्ड, रसायन और सॉल्वेंट्स की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें कोई प्रदूषक या अपशिष्ट उत्सर्जित नहीं होता है और कुल ऊर्जा उपयोग में कमी आती है।
  • विषयगत मानचित्र भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का उपयोग करके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तैयार किये जाते हैं। अंतिम रूप से ब्रेल मानचित्र प्राप्त करने के लिये 3-D एम्बॉसिंग के लिये ए.आई. तकनीक का प्रयोग करते हैं।
  • इस प्रौद्योगिकी का डिजाइन और कार्यान्वयन राष्ट्रीय एटलस एवं थीमैटिक मानचित्रण संगठन ने किया है।

राष्ट्रीय एटलस एवं थीमैटिक मानचित्रण संगठन (NATMO)

natmo

  • इसकी स्थापना वर्ष 1956 में हुई। इसका मुख्यालय कोलकाता में स्थित है। 
  • यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है। यह भारत की एकमात्र एजेंसी है जो विभिन्न भारतीय भाषाओं में राष्ट्रीय एटलस का संकलन करती है। 

संगठन के अन्य प्रमुख कार्य

  • विभिन्न आँकड़ों के आधार पर विषयगत मानचित्रों को तैयार करके प्रकाशन करना।
  • नवीनतम तकनीक का उपयोग करके डिजिटल मैपिंग करना।
  • नेत्रहीनों के लिये विभिन्न प्रकार के मानचित्र विकसित करना।
  • आधुनिक कार्टोग्राफिक सेवाओं में अनुसंधान एवं विकास करना। 

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