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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 16 अगस्त, 2022


ओडिशा के लक्षित क्षेत्रों में वृक्षारोपण में कमी 

वित्तीय समावेशन सूचकांक

जिराफ़ की आबादी 


ओडिशा के लक्षित क्षेत्रों में वृक्षारोपण में कमी 

चर्चा में क्यों

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अनुसार ओडिशा के लक्षित क्षेत्रों में वृक्षारोपण में लगभग 50% की कमी आई है।

कैग की हालिया रिपोर्ट

  • कैग के अनुसार ओडिशा में सुलभ क्षेत्रों, जैसे कि मार्गों से सटी हुई भूमि में वृक्षारोपण गतिविधियों की सघनता, अनियोजित घने जंगल के बीच में अवक्रमित स्थानों को छोड़ना आदि वृक्षारोपण में गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। 
  • राज्य में किये गए वृक्षारोपण से वन क्षेत्र में सुधार नहीं हुआ है। साथ ही, राज्य में निम्नीकृत भूमि पर कोई डाटा बेस भी उपलब्ध नहीं है।

कारण

  • वृक्षारोपण लक्ष्यों की प्राप्ति में तीव्र कमी। 
  • बंज़र वन भूमि और रिक्त राजस्व भूमि के संबंध में डाटा अनुपलब्धता के कारण वृक्षारोपण की योजना प्रक्रिया का सीमित होना।
  • अवक्रमित वन और गैर-वन भूमि का डाटाबेस उपलब्ध न होने के कारण ‘प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण’ (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority : CAMPA) के तहत प्रतिपूरक वनरोपण कार्यक्रमों का लक्ष्य तीन वर्षों की निर्धारित अवधि के भीतर प्राप्त नहीं किया जाना।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण ऊर्जा गारंटी योजना के तहत किये गए वृक्षारोपण कार्यक्रमों का घने जंगल में वृक्षारोपण स्थलों के अनुचित चयन के कारण विफल रहना। 

वित्तीय समावेशन सूचकांक

चर्चा में क्यों  

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा वित्तीय समावेशन सूचकांक जारी किया गया। 

प्रमुख बिंदु 

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार सहित संबंधित हितधारकों से परामर्श कर वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI Index) तैयार किया है। 
  • मार्च 2022 में इस सूचकांक का मूल्य 56.4 है, जो मार्च 2021 के मुकाबले 2.5 की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, इसके सभी उप-सूचकांकों में भी वृद्धि देखी गई है। 
  • यह सूचकांक वित्तीय समावेशन के विभिन्न पहलुओं पर 0 से 100 के बीच एक मूल्य प्रदर्शित करता है, जहाँ 0 पूर्ण वित्तीय बहिष्करण की स्थिति को जबकि 100 पूर्ण वित्तीय समावेशन को दर्शाता है। 
  • यह सूचकांक बिना किसी 'आधार वर्ष' के तैयार किया जाता है तथा प्रतिवर्ष जुलाई में प्रकाशित होता है।
  • इस सूचकांक में तीन व्यापक मानदंड शामिल हैं : 
  1. पहुँच (भारांश- 35%) 
  2. उपयोग (भारांश- 45%) 
  3. गुणवत्ता (भारांश- 20%) 

जिराफ़ की आबादी 

चर्चा में क्यों 

जिराफ़ संरक्षण फ़ाउंडेशन (GCF) के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार अफ्रीका में जिराफ़ की संख्या में अत्यधिक कमी देखी गई है। 

प्रमुख बिंदु 

  • 1980 के दशक में अफ्रीका में 1.55 लाख से अधिक जिराफ़ थे, जिनकी संख्या कम होकर केवल 1.17 लाख रहन गई है। यह लगभग 30% की गिरावट को प्रदर्शित करता है। 
  • जिराफ़ एक शाकाहारी जानवर है, जो दुनिया का सबसे लंबा (लगभग 14-17 फीट) स्तनधारी हैं। 
  • जिराफ़ ने स्वयं को विभिन्न आवासों के लिये अनुकूलित कर लिया है जो अब रेगिस्तान के साथ-साथ जंगल में भी जीवित रह सकते हैं। 
  • इनकी चार प्रजातियाँ पाई जाती हैं- उत्तरी जिराफ़, दक्षिणी जिराफ़, मसाई जिराफ़ और जालीदार जिराफ़। इनमें से तीन विलुप्त होने के कगार पर हैं तथा उत्तरी जिराफ़ इन चारों में सबसे दुर्लभ है। 
  • वर्ष 2016 में आई.यू.सी.एन. (IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में जिराफ़ को ‘संवेदनशील’ (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। 

कमी के कारण

  • आवास क्षति, नागरिक अशांति व हस्तक्षेप, अवैध शिकार का खतरा। 
  • कृषि और अन्य निर्माण गतिविधियों के लिये बबूल के पेड़ों की कटाई।  
  • बबूल इनके मुख्य खाद्य स्रोत होते हैं।
  • चमड़े, माँस और शरीर के अंगों के लिये शिकार करना। 

जिराफ़ कंज़र्वेशन फ़ाउंडेशन (GCF) : यह 17 अफ्रीकी देशों में जिराफ़ संरक्षण को समर्पित एक संगठन है, जिसका उद्देश्य जिराफ़ के भविष्य को सुरक्षित करने और अफ्रीका में उनके आवास के संरक्षण के लिये जागरूकता व समर्थन बढ़ाना है।


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