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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 19 अक्टूबर, 2022


कामिकेज़ ड्रोन

नीलकुरिंजी की नई किस्में

पी.एम. डिवाइन योजना

इब्सामर VII


कामिकेज़ ड्रोन

चर्चा में क्यों 

यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने उसके राजधानी क्षेत्र में ईरान द्वारा निर्मित शहीद-136 नामक कामिकेज़ ड्रोन (Kamikaze Drone) से हमला किया है। इससे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सुविधाओं को निशाना बनाया गया है। 

कामिकेज़ ड्रोन के बारे में 

  • ये छोटे मानवरहित विमान हैं जो विस्फोटकों से भरे होते हैं। इन्हें सीधे किसी टैंक या सैनिकों के समूह पर उड़या जा सकता है। लक्ष्य से टकराने पर इसमें विस्फोट हो जाता है। कामिकेज़ ड्रोन को आत्मघाती ड्रोन भी कहते हैं।
  • यह नाम द्वितीय विश्व युद्ध के समय के जापानी कामिकेज़ पायलटों से लिया गया है जिन्होंने जानबूझकर अपने विस्फोटक से भरे विमान को दुश्मन के ठिकानों पर गिराकर आत्मघाती हमले किये थे। 
  • आधुनिक ड्रोन अपने लक्ष्य पर हमला करने के लिये पारंपरिक सुरक्षा को भेदने में सक्षम होने के अतिरिक्त अन्य बड़े ड्रोन की तुलना में सस्ते भी होते हैं।
  • इन छोटे घातक ड्रोन को रडार के माध्यम से पता लगाना बहुत मुश्किल है। इन ड्रोन को फेसियल रिकग्निशन का उपयोग करके मानवीय हस्तक्षेप के बिना लक्ष्य को ध्वस्त करने के लिये प्रोग्राम किया जा सकता है।

समान ड्रोन वाले अन्य राष्ट्र

  • अमेरिकी सेना के अनुसार ईरान समर्थित आतंकियों ने इस वर्ष इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में छोटे ड्रोन का इस्तेमाल किया था।

kamikaze-drone

  • अज़रबैजान ने विगत कुछ वर्षों में अर्मेनियाई सेना के खिलाफ तुर्की द्वारा निर्मित छोटे ड्रोन का प्रयोग किया था।
  • ईरान समर्थित हौती विद्रोहियों ने भी वर्ष 2019 में सऊदी अरब की तेल सुविधा केंद्रों को ध्वस्त करने के लिये इन ड्रोन का उपयोग किया था।
  • अमेरिकी कामिकेज़ ड्रोन सबसे उन्नत है जबकि रूस, चीन, इज़राइल, ईरान और तुर्की के पास इसके अन्य संस्करण उपलब्ध हैं।

विशेषताएँ

  • लॉन्च होने पर इनके ब्लेड जैसे पंख बाहर की ओर निकले होते हैं अत: इसे स्विचब्लेड भी ड्रोन कहते हैं। इसे बैकपैक में ले जाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • लक्षित क्षेत्र के आसपास अपेक्षाकृत लंबे समय तक घूमने की क्षमता के कारण इसे ‘गश्ती मिसाइल’ (Loitering Missile) के रूप में जाना जाता है।
  • इसका वजन काफी हल्का होता है और इसमें विस्फोट रेडियस (Blast Radius) का समायोजन किया जा सकता है। विस्फोट रेडियस विस्फोट होने वाले स्थान से प्रभावित होने वाली दूरी है।
  • इसमें संचालन क्षेत्र के केंद्रीकृत दृश्य के लिये कैमरे होते हैं, जो प्रहार के कुछ सेकंड पहले तक लक्ष्य को दिखाते हैं। इनसे विस्फोट को दो सेकंड पहले तक टाला जा सकता है।

नीलकुरिंजी की नई किस्में

चर्चा में क्यों

हाल ही में, विशेषज्ञों के एक समूह ने पश्चिमी घाट के इडुक्की में संथानपारा में कल्लीप्पारा पहाड़ी क्षेत्र में नीलकुरिंजी पौधे की कुछ नई किस्मों की पहचान की है।

प्रमुख बिंदु

  • विशेषज्ञों के अनुसार ये पौधे स्ट्रोबिलांथेस कुंथियाना (Strobilanthes kunthiana) किस्म से संबंधित हैं।
  • स्ट्रोबिलैन्थेस कुंथियाना के अतिरिक्त इस पहाड़ी श्रृंखला में पाए गए अन्य नीलकुरिंजी फूल इस प्रकार हैं- 
    • स्ट्रोबिलांथेस एनामलैइका (Strobilanthes anamallaica) 
    • स्ट्रोबिलांथेस हेयनियस (Strobilanthes heyneanus) 
    • स्ट्रोबिलांथेस पलनेनसिस (Strobilanthes pulnyensis)
    • स्ट्रोबिलांथेस नियोस्पर (Strobilanthes neoasper)
  • उल्लेखनीय है कि नीलकुरिंजी की ये सभी प्रजातियां पश्चिमी घाटों की स्थानिक हैं और लगभग 200 एकड़ के कल्लीप्पारा पहाड़ियों पर फैली हुई हैं।
  • नीलकुरिंजी के इन पौधों को मुन्नार के संरक्षित क्षेत्रों के बाद सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक माना जा सकता है।
  • मंगलादेवी पर्वतमाला से लेकर कर्नाटक में कूर्ग तक विशेषज्ञों ने स्ट्रोबिलांथेस कुंथियाना किस्म की लगभग 100 आबादी की पहचान की गयी है।

नीलकुरिंजी के बारे में

  • यह फूलों की एक दुर्लभ प्रजाति है जो 12 वर्ष में एक बार खिलते हैं। यह एक प्रकार की झाड़ियाँ है जो केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में पश्चिमी घाट के शोला वनों में पाई जाती हैं।
  • इसका वैज्ञानिक नाम स्ट्रोबिलांथेस कुंथियाना (Strobilanthes kunthiana) है। इन्हें स्थानीय रूप से कुरिंजी के नाम से जाना जाता है। ये 1,300 से 2,400 मीटर की ऊँचाई पर उगती हैं। भारत में इन फूलों की लगभग 45 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो लगभग 6, 9, 12 या 16 वर्षों के अंतराल पर खिलती हैं।
  • नीलगिरि हिल्स का नाम नीलकुरिंजी के बैंगनी-नीले फूलों के नाम पर ही रखा गया है। तमिलनाडु का पलियान आदिवासी समुदाय अपनी आयु की गणना के लिये इसे संदर्भ वर्ष के रूप में प्रयोग करता था। 
  • केरल में स्थित एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान नीलकुरिंजी फूलों का सबसे बड़ा अभयारण्य है।  

पी.एम. डिवाइन योजना

चर्चा में क्यों

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिये प्रधानमंत्री की विकास पहल’ (PM-DevINE) योजना को मंजूरी दी है।  

प्रमुख बिंदु

  • पी.एम. डिवाइन योजना की घोषणा पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के विकास के उद्देश्य से केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी। यह 100% केंद्रीय वित्त पोषण के साथ एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। 
  • इस योजना को पूर्वोत्तर परिषद् या केंद्रीय मंत्रालयों/एजेंसियों के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा। 
  • इस योजना के तहत 15वें वित्त आयोग के शेष चार वर्षों (2022-23 से 2025-26) की अवधि में 6,600 करोड़ रुपये का परिव्यय होगा। 

योजना के उद्देश्य एवं लक्ष्य 

  • प्रधानमंत्री गति शक्ति के अंतर्गत बुनियादी ढांचे का निर्माण।
  • सामाजिक विकास परियोजनाओं का समर्थन करना।
  • युवाओं और महिलाओं के लिये आजीविका गतिविधियों का निर्माण करना।
  • विभिन्न क्षेत्रों (जैसे-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी स्कूलों) में विकास अंतराल को दूर करना।

इब्सामर VII

चर्चा में क्यों

हाल ही में, भारत का ‘आईएनएस तरकश’ इब्सामर VII (IBSAMAR VII) में शामिल होने के लिये दक्षिण अफ्रीका के गकेबेरहा बंदरगाह (एलिजाबेथ बंदरगाह) पहुँचा।  

प्रमुख बिंदु

  • यह भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका की नौसेनाओं के मध्य आयोजित होने वाला एक संयुक्त बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है।
  • यह समुद्री अभ्यास समुद्री सुरक्षा, संयुक्त परिचालन प्रशिक्षण एवं सामान्य समुद्री खतरों को दूर करने के लिये अंतर-संचालन क्षमता को मजबूत करेगा।
  • विदित है कि इब्सा एक ऐसा मंच है जो तीन अलग-अलग महाद्वीपों की प्रमुख तीन अर्थव्यवस्थाओं को समान चुनौतियों का सामना करने के लिये एक साथ लाता है। इस समूह का गठन ब्रासीलिया घोषणापत्र के साथ वर्ष 2003 में किया गया था।

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