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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 30 अक्तूबर, 2020


अदिति ऊर्जा सांच (ADITI Urja Sanch)

कृषक उपज, व्यापार एवं वाणिज्य अधिनियम, 2020 (Farmers’ Produce Trade and Commerce Act, 2020)

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट या असर (ग्रामीण) 2020

भारत में रामसर स्थल (Ramsar Sites in India)

सीमा शुल्क आँकड़ों का इलेक्ट्रॉनिक विनिमय


अदिति ऊर्जा सांच (ADITI Urja Sanch)

  • केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिक मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने ईको-फ्रेंडली, कुशल व डाइ-मिथाइल ईथर (DME) द्वारा संचालित ‘अदिति ऊर्जा सांच’ यूनिट का एन.सी.एल. (नेशनल केमिकल लेबोरेट्री) पुणे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये उद्घाटन किया गया है। साथ ही, घरेलू ईंधन के रूप में प्रयोग किये जाने वाले डी.एम.ई.- एल.पी.जी. मिश्रित विशेष बर्नर यूनिट को भी लॉन्च किया गया, जिसे सी.एस.आई.आर.- एन.सी.एल. परिसर को ट्रायल के लिये सौंपा गया है।
  • सी.एस.आई.आर.- एन.सी.एल. ने 20-24 किग्रा. प्रतिदिन की क्षमता वाले स्वच्छ और किफ़ायती ईंधन ‘डी.एम.ई.’ का पहला पायलट प्लांट विकसित किया है। इससे ‘मेक इन इंडिया' अभियान को बढ़ावा मिलेगा।
  • डी.एम.ई. का घनत्व एल.पी.जी. से अलग होता है इसलिये पारम्परिक एल.पी.जी. बर्नर डी.एम.ई. के लिये उपयुक्त नहीं होते हैं। एन.सी.एल. द्वारा बनाया गया नया बर्नर डी.एम.ई.- एल.पी.जी. मिश्रित और एल.पी.जी. दहन के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • नया डिज़ाइन वायु के आवागमन तथा दहन हेतु ऑक्सीजन लेने के लिये उपयुक्त है, जो एल.पी.जी. के साथ मिश्रित 30% या ईंधन के रूप में 100% डी.एम.ई. के साथ जल सकता है। इस पर रखे जाने वाले बर्तन पर लगने वाली लौ को (उच्च, निम्न और मध्यम) ऑक्सीजन के जरिये समायोजित करके इसके ताप को ट्रांसफर किया जा सकता है। यह पारम्परिक बर्नर की तुलना में 10-15% अधिक प्रभावी है।
  • ध्यातव्य है कि डी.एम.ई. एक अति स्वच्छ ईंधन है, जो राष्ट्र के लिये ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

कृषक उपज, व्यापार एवं वाणिज्य अधिनियम, 2020 (Farmers’ Produce Trade and Commerce Act, 2020)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, ‘कृषक उपज, व्यापार एवं वाणिज्य अधिनियम, 2020’ (FPTC Act, 2020) पर बहस के दौरान कुछ राज्यों के हितधारकों, विशेषकर किसानों ने विधेयक से सम्बंधित प्रावधानों का विरोध किया है।

कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम, 2020 : मुख्य प्रावधान

  • यह अधिनियम किसानों को प्रत्यक्ष विपणन में संलग्न करके, बिचौलियों के प्रभाव को समाप्त करने तथा किसानों को उनकी उपज को देश के किसी भी स्थान पर बेचने एवं खरीदने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। इस अधिनियम के तहत खरीदारों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे लाइसेंस के बिना या कोई शुल्क चुकाए बिना ए.पी.एम.सी. के बाहर किसानों से उपज खरीद सकतें हैं।
  • एफ.पी.टी.सी. अधिनियम के तहत केवल ए.पी.एम.सी. बाज़ारों पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिये दबाव डाला गया है तथा इन मंडियों को अपने परिसर के बाहर बिक्री हेतु प्रतिस्पर्धा को सक्षम बनाने के लिये बाज़ार शुल्क और कमीशन को 2% या उससे कम करने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त ए.पी.एम.सी. अधिनियम के तहत लगाए गए अनुचित शुल्क कम किये जाएंगे।

विभिन्न राज्यों में प्रावधान

  • ए.पी.एम.सी. अधिनियम के तहत अधिसूचित फसलों पर 25 राज्यों में से 12 राज्यों में कोई शुल्क नहीं लगाया जाता है तथा इन राज्यों में से नौ राज्यों में प्रमुख फसलों पर मंडी शुल्क जैसे सेवा शुल्क 0-1% तक, जबकि मध्य प्रदेश और त्रिपुरा में 2% प्रतिशत है। नये अधिनियम से इन राज्यों में ए.पी.एम.सी. मंडियों और उनके व्यवसाय के लिए कोई खतरा नहीं है क्योंकि निजी व्यापारियों और विक्रेताओं को मंडी शुल्क से होने वाली छूट से लाभ प्राप्त होगा। इन राज्यों को प्रथम श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है।
  • आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना दूसरी श्रेणी में आते हैं जहां मंडियों के लिए सेवा शुल्क उपज के मूल्य का 1% है और कमीशन 1-2% तक भिन्न हो सकता है। उत्तराखंड भी इसी श्रेणी में आता है। कर्नाटक जैसे राज्य जिसमें कुल शुल्क 3.5 % है मंडी शुल्क को आसानी से 2% या उससे कम किया जा सकता हैं।
  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश राज्य तीसरी श्रेणी में शामिल हैं, जहाँ कुल शुल्क 5-8.5% तक होते हैं। पंजाब इस श्रेणी में अग्रणी राज्य है जबकि दूसरा स्थान हरियाणा का है। जब तक सरकार द्वारा पंजाब व हरियाणा जैसे राज्यों की प्रमुख फसलों जैसे धान और गेहूं की खरीद की जाती है तब तक इन्हें मंडियों के बाहर बिक्री में किसी भी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा।

लाभ

  • इन राज्यों में ए.पी.एम.सी. मंडियों के परिसर के बाहर बिक्री के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए बाज़ार शुल्क और कमीशन को 2% या उससे कम पर लाना इन राज्यों के दीर्घकालिक हित में है। इस अधिनियम का ए.पी.एम.सी. मंडियों पर प्रभाव मंडियों को शुल्क और लगान के रूप में मिलने वाले लाभ पर निर्भर करेगा।
  • इस अधिनियम में इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर लेनदेन की अनुमति देने से कृषि व्यापार में ई-कॉमर्स को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, मंडियों के अतिरिक्त फॉर्मगेट, कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों को भी व्यापार की स्वतंत्रता प्राप्त होगी।
  • किसानों को प्रत्यक्ष विपणन में संलग्न करके, बिचौलियों को समाप्त करने तथा किसानों की उपज को देश के किसी भी हिस्से में बेचने एवं खरीदने की स्वतंत्रता से उचित और अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अधिनियम से जुड़ी चिंताएँ

  • कुछ राज्यों में ए.पी.एम.सी. मंडियों के लिए वास्तविक खतरा ए.पी.एम.सी. अधिनियम के तहत लगाए गए अत्यधिक और अनुचित प्रभार से है। एफ.पी.टी.सी. अधिनियम केवल ए.पी.एम.सी. बाज़ारों पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए दबाव डालेगा। यह ए.पी.एम.सी. बाज़ारों से व्यापारियों को दूर नहीं करेगा क्योंकि मंडियों का बुनियादी ढांचा एक ही स्थान पर थोक उपज और व्यक्तिगत लेन-देन के लिये उपलब्ध बाज़ार इसके बाहर आवश्यक अतिरिक्त लागत बचाने के लिए प्रेरित करेगा।
  • राज्यों को किसानों के कल्याण के लिये मंडी शुल्क 1.5% के उचित स्तर से कम रखना चाहिये जिससे नए अधिनियम के तहत ए.पी.एम.सी मंडियों और निजी चैनलों के सह-अस्तित्व को एक सही प्रतिस्पर्धी भावना के साथ बनाया रखा जा सकेगा।

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट या असर (ग्रामीण) 2020

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, प्रथम एन.जी.ओ. द्वारा ‘शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट’/ असर (ग्रामीण), 2020 खंड 1 जारी की गई है।

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट, 2020 के प्रमुख बिंदु

  • सर्वेक्षण में सरकारी स्कूलों में लड़के तथा लड़कियों के नामांकन (सभी ग्रेड्स में) में मामूली वृद्धि हुई है। जबकि निजी स्कूलों में सभी आयु समूहों में नामांकन अनुपात में गिरावट दर्ज की गई है।
  • सरकारी स्कूलों में नामांकित लड़कों का अनुपात वर्ष 2018 में 62.8% से बढ़कर वर्ष 2020 में 66.4% हो गया।
  • सर्वेक्षण से पता चलता है कि स्कूली वर्ष 2020-21 में बच्चों के दाखिला लेने का अनुपात महामारी के कारण कम हुआ है।

rural

  • नामांकित बच्चों में 60% से अधिक बच्चों के परिवार में कम से कम एक स्मार्टफ़ोन है। इस अनुपात में पिछले दो वर्षों में काफी वृद्धि हुई है।
  • ग्रामीण भारत में प्रौद्योगिकी, स्कूल और पारिवारिक संसाधनों के अभाव के चलते शिक्षा में व्यापक डिजिटल विभाजन बना हुआ है, लगभग 20% ग्रामीण बच्चों के पास पढ़ने के लिये किताबें नहीं हैं।
  • महामारी के दौरान व्हाट्सएप ने छात्रों को शिक्षा सम्बंधी सामग्री प्रसारित करने तथा छात्र-शिक्षक सम्पर्क बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (ASER)

  • शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (Annual Status of Education Report- ASER) एक राष्ट्रव्यापी वार्षिक सर्वेक्षण है जिसका उद्देश्य ग्रामीण शिक्षा और अंकगणितीय कौशल सीखने सम्बंधी विश्वसनीय परिणाम उपलब्ध करवाना है। इस सर्वेक्षण को गैर लाभकारी संगठन ( NGO) प्रथम द्वारा कार्यान्वित तथा प्रकाशित किया जाता है।
  • इस वर्ष यह सर्वेक्षण कोविड-19 महामारी के कारण फोनकॉल के माध्यम से आयोजित किया गया था। इसमें 30 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक परिवारों तथा स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था।
  • यह घर या परिवार आधारित सर्वेक्षण (स्कूल आधारित की बजाय) है।
  • सर्वेक्षण में 3 से 16 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन की स्थिति तथा 5 से 16 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों की पढ़ने और अंकगणितीय क्षमताओं का आकलन किया जाता है।


भारत में रामसर स्थल (Ramsar Sites in India)

  • हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय  ने उत्तर बिहार के मीठे पानी के दलदल कबरताल तथा उत्तराखंड दून घाटी में आसन बैराज को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि घोषित किया है। इसके साथ ही वर्तमान में भारत में रामसर स्थलों की संख्या 39 हो गई है, जो अब दक्षिण एशिया में रामसर स्थलों का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
  • आसन कंज़र्वेशन रिज़र्व उत्तराखंड के देहरादून ज़िले में यमुना नदी की सहायक आसन नदी के समीप 444 हेक्टेयर में फैला हुआ क्षेत्र है, जो जैव विविधता केंद्र के रूप में गम्भीर रूप से लुप्तप्राय रेडहेडेड वल्चर, व्हाइट रम्प्ड वल्चर तथा बीयर्स पोचर्ड (Baer’s pochard) सहित पक्षियों की 330 प्रजातियों को संरक्षण प्रदान करता है। यह प्रवासी पक्षियों जैसे कि रेड क्रेस्टेड पोचर्ड और रूडी शेल्डक के साथ-साथ 40 से अधिक मछली प्रजातियों का भी एक प्रसिद्ध प्रवास स्थल है। रामसर स्थल घोषित किये जाने के लिये इस रिज़र्व ने आवश्यक नौ मानदंडों में से पाँच मानदंडों को पूरा किया है, जिसके बाद यह उत्तराखंड का पहला रामसर स्थल बन गया है ।
  • कबरताल, जिसे कंवर झील के रूप में भी जाना जाता है, बिहार राज्य के बेगूसराय ज़िले में 2,620 हेक्टेयर भारत-गंगा के मैदानों में फैला हुआ है। यह स्थल स्थानीय समुदायों को आजीविका के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ इस क्षेत्र के लिये एक महत्त्वपूर्ण बाढ़ बफर का कार्य भी करता है। यह स्थल गम्भीर रूप से लुप्तप्राय गिद्ध, जैसे रेड हेडेड वल्चर और व्हाइट रम्प्ड वल्चर आदि का निवास स्थान है।
  • रामसर कन्वेंशन एक अंतर-सरकारी संधि है जिस पर 2 फरवरी, 1971 में ईरानी शहर रामसर में हस्ताक्षर किये गए थे। इस कन्वेंशन को ‘कन्वेंशन ऑन वेटलैंड्स’ (Convention on Wetlands) के नाम से जाता है। भारत 1 फरवरी, 1982 को इसमें शामिल हुआ था। इसके अंतर्गत वे आद्रभूमि जो अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की हैं, उन्हें रामसर स्थल घोषित किया जाता है।
  • वेटलैंड्स इंटरनेशनल पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ मिलकर भारत में रामसर स्थल के नामांकन तथा घोषणा प्रक्रिया का कार्य करता है।

सीमा शुल्क आँकड़ों का इलेक्ट्रॉनिक विनिमय

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत सरकार के डाक विभाग और अमेरिका के डाक सेवा  द्वारा दोनों देशों के मध्य डाक नौवहन से सम्बंधित सीमा शुल्क आँकड़ों के इलेक्ट्रॉनिक विनिमय हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गए हैं।

प्रमुख बिंदु

  • उद्देश्य: इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में डाक चैनलों के माध्यम से छोटे और बड़े निर्यातकों को ' सुगम निर्यात ' (ease of exports) की सुविधा प्रदान करना है।
  • विशेषताएँ: इस समझौते से अंतर्राष्ट्रीय डाक वस्तुओं के उनके गंतव्य पर भौतिक रूप में पहुँचने से पहले उनके इलेक्ट्रॉनिक डेटा को भेजना तथा प्राप्त करना सम्भव हो सकेगा और इससे नए वैश्विक डाक ढांचे के अनुरूप डाक वस्तुओं के सीमा शुल्क की अग्रिम निकासी भी सक्षम हो सकेगी।
  • इलेक्ट्रॉनिक एडवांस डेटा (Exchange of Electronic Advance Data - EAD) के आदान-प्रदान से निर्यात को बल मिलेगा, जो आपसी व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा ।
  • ध्यातव्य है कि भारत के लिये यू.एस.ए. शीर्ष निर्यात गंतव्य है (17%) जो डाक चैनलों के माध्यम से वस्तुओं के आदान-प्रदान में भी परिलक्षित होता है।
  • वर्ष 2019 में, अंतर्राष्ट्रीय एक्सप्रेस मेल सेवा (Express Mail Service- EMS) का लगभग 20% और भारतीय डाक द्वारा प्रेषित 30% पत्र एवं छोटे पैकेट यू.एस.ए. भेजे गए थे, जबकि भारतीय डाक को प्राप्त पार्सल का 60% हिस्सा यू.एस.ए. से आया था।
  • लाभ: इससे निर्यातित वस्तुओं हेतु सीमा शुल्क सम्बंधी मंज़ूरी की प्रक्रिया में तेज़ी लाने सम्बंधी निर्यात उद्योग की प्रमुख माँग पूरी होगी और भारत, भविष्य में विश्व का निर्यात केंद्र बनने की ओर अग्रसर होगा।
  • यह समझौता डाक सेवाओं के प्रदर्शन में विश्वसनीयता लाने और सुरक्षा बढ़ाने में सहयोग प्रदान करेगा।

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