New
Solved - UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Solved - UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

2,000 वर्ष पुरानी भूलभुलैया

महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले में पुरातत्वविदों ने लगभग 2,000 वर्ष पुरानी एक विशाल गोलाकार पत्थर की भूलभुलैया का अनावरण किया है। यह संरचना अब तक भारत में प्राप्त अपनी तरह की सबसे बड़ी वृत्ताकार भूलभुलैया मानी जा रही है। यह खोज न केवल सातवाहन काल की स्थापत्य परंपराओं पर प्रकाश डालती है बल्कि प्राचीन वैश्विक व्यापार नेटवर्क में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका भी उजागर करती है। 

प्रमुख विशेषताएँ एवं संरचना

  • कालखंड: यह संरचना सातवाहन राजवंश (पहली से तीसरी सस्दी ई.) के समय की है।
  • विशाल आकार: लगभग 50 फीट × 50 फीट के क्षेत्र में फैली यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी वृत्ताकार भूलभुलैया है।
  • जटिल डिजाइन: इसमें 15 संकेंद्रित (Concentric) पत्थर के घेरे हैं। भारतीय संदर्भ में किसी वृत्ताकार भूलभुलैया में दर्ज की गई यह घेरों की सर्वाधिक संख्या है।
  • विशिष्टता: प्राय: तमिलनाडु (जैसे- गेदिमेडु) में वर्गाकार भूलभुलैया पाई जाती हैं किंतु सोलापुर की यह खोज अपने पूर्ण गोलाकार लेआउट के कारण अद्वितीय है।

भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रीय नेटवर्क

  • यह भूलभुलैया किसी मंदिर, किले या बस्ती के भीतर न होकर खुले अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में स्थित है। इसी तरह की छोटी संरचनाएँ सांगली, सतारा व कोल्हापुर में भी मिली हैं।
  • व्यापारिक मार्ग: यह स्थान दक्कन के भीतरी उत्पादक केंद्रों और पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी था।
  • प्राकृतिक संरक्षण: बोरामानी के घास के मैदानों की विशिष्ट पारिस्थितिकी ने इस संरचना को सदियों तक मानवीय हस्तक्षेप से बचाए रखा, जिससे यह आज भी सुरक्षित है। 

वैश्विक संबंध एवं ऐतिहासिक महत्व

यह खोज प्राचीन काल में भारत और पश्चिमी जगत (विशेषकर रोम) के बीच गहरे व्यापारिक संबंधों की पुष्टि करती है।

  • रोम से संबंध: इस भूलभुलैया की गोलाकार आकृति क्रीट (Crete) के प्राचीन रोमन सिक्कों पर बने डिजाइनों से आश्चर्यजनक समानता रखती है। उल्लेखनीय है कि ऐसे कई रोमन सिक्के भारत के विभिन्न प्राचीन व्यापारिक केंद्रों में पहले भी मिल चुके हैं।
  • व्यापारिक पथ-प्रदर्शक: इतिहासकारों का मानना है कि ये भूलभुलैया मसाले, वस्त्र एवं कीमती रत्नों का व्यापार करने वाले समूह के लिए दिशासूचक (Waymarkers) या प्रतीकात्मक चिह्नों के रूप में उपयोग की जाती रही होंगी।
  • सांस्कृतिक प्रतीक: यह संभवतः किसी विशेष अनुष्ठान या सुरक्षा के प्रतीक के रूप में भी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण रही होगी। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR