संदर्भ
- जो चीज कभी नारियल की सामान्य भूसी मानकर छोड़ दी जाती थी, वह आज भारत के तटीय और ग्रामीण अंचलों में उद्यम, नवाचार और आजीविका का एक मजबूत जरिया बन चुकी है। नारियल का रेशा (कॉयर) एक प्राकृतिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम पीढ़ियों से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार रहा है। आज देश के उद्यमी और कारीगर इसे पारंपरिक रस्सियों और चटाइयों से निकालकर हस्तशिल्प, जैव-उर्वरक, और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग समाधानों जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में बदल रहे हैं।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), कॉयर बोर्ड और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के सहयोग से यह पारंपरिक क्षेत्र अब महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आर्थिक समृद्धि का शक्तिशाली इंजन बन गया है।
वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा और महिला सशक्तिकरण
भारत में संगठित कॉयर उद्योग की शुरुआत वर्ष 1859 में केरल के अलाप्पुझा में पहली कॉयर फैक्ट्री की स्थापना के साथ हुई थी। तब से लेकर आज तक, यह उद्योग देश के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में तेजी से फैला है:
- वैश्विक नेतृत्व: आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा कॉयर उत्पादक देश है, जिसकी वैश्विक कॉयर रेशा उत्पादन में हिस्सेदारी 80% से अधिक है।
- नारी शक्ति की रीढ़: यह उद्योग ग्रामीण महिलाओं की आजीविका से गहराई से जुड़ा है। रेशा निकालने और कताई जैसे कार्यों में जुड़े कुल कामगारों में लगभग 80% महिलाएं शामिल हैं।
- विस्तृत इकोसिस्टम: यह क्षेत्र नारियल किसानों, कामगारों, महिला कारीगरों, सहकारी समितियों, निर्माताओं और निर्यातकों को एक सूत्र में पिरोता है।
कॉयर विकास योजना (CVY): सशक्तिकरण का मुख्य आधार
कॉयर उद्योग के विकास और आधुनिकीकरण में एमएसएमई मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाले कॉयर बोर्ड की 'कॉयर विकास योजना' (Coir Vikas Yojana) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस योजना के प्रमुख आयाम निम्नलिखित हैं:
- कौशल विकास और महिला प्रशिक्षण: ग्रामीण क्षेत्रों के कामगारों और विशेषकर महिलाओं को आधुनिक मशीनों के संचालन, उन्नत बुनाई और डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि उनकी कार्यक्षमता और आय में वृद्धि हो सके।
- प्रौद्योगिकी और अनुसंधान: केंद्रीय कॉयर अनुसंधान संस्थान (CCRI) और केंद्रीय कॉयर तकनीकी संस्थान (CSTI) जैसी संस्थाएं नए उपकरणों, पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं और नवीन उत्पादों के विकास पर निरंतर शोध करती हैं।
- बाजार संवर्धन एवं निर्यात प्रोत्साहन: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और क्रेता-विक्रेता बैठकों (Buyer-Seller Meets) के माध्यम से भारतीय कॉयर उत्पादों को वैश्विक खरीदारों तक पहुंचाया जाता है।
कॉयर निर्यात के आंकड़े और वैश्विक मांग
भारतीय कॉयर और कॉयर उत्पादों की मांग आज दुनिया भर के देशों में तेजी से बढ़ रही है।
- बढ़ता वैश्विक कारोबार: अमेरिका, यूरोपीय संघ, यूके, और खाड़ी देशों (Middle East) में पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) उत्पादों की बढ़ती प्राथमिकता के कारण भारतीय कॉयर उत्पादों के निर्यात में लगातार उछाल आ रहा है।
- प्रमुख निर्यातक वस्तुएं: कॉयर मैट (चटाइयां), कॉयर जियोटेक्सटाइल्स (मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए प्रयुक्त होने वाले उत्पाद), कॉयर पिथ (बागवानी के लिए कोकोपीट) और कॉयर रस्सियों का विदेशों में भारी निर्यात किया जाता है।
- आर्थिक योगदान: कॉयर बोर्ड की सक्रिय निर्यात संवर्धन नीतियों के परिणामस्वरूप, यह पारंपरिक क्षेत्र देश के विदेशी मुद्रा भंडार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों के लिए टिकाऊ रोजगार सुनिश्चित कर रहा है।
कच्चे रेशे से लेकर आधुनिक मूल्यवर्धित उत्पादों तक
प्रसंस्करण, आधुनिक डिजाइन और तकनीकी नवाचार ने कॉयर की संभावनाओं को पूरी तरह बदल दिया है। आज इसके दायरे में कई बेहतरीन उत्पाद शामिल हैं:
- घरेलू और सजावटी उत्पाद: टिकाऊ चटाइयां, दरवाजे के पायदान, रस्सियां, सूत और विभिन्न प्रकार के ब्रश।
- हस्तशिल्प व बागवानी: कलात्मक सजावटी वस्तुएं और उद्यान (हॉर्टिकल्चर) से जुड़े उत्पाद जैसे कॉयर पिट्स और ग्रो बैग्स।
- नवाचारी पैकेजिंग: केंद्रीय कॉयर अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित कॉयर रेल व्हील एक्सल पैकेजिंग कप, प्लास्टिक (HDPE) कपों का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बनकर उभरे हैं।
- श्री अल्लम गौथमी और श्री पी. सुरेंद्रन जैसे दूरदर्शी उद्यमियों की सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन मिलने पर पारंपरिक कौशल किस प्रकार आधुनिक और समृद्ध उद्यमों में बदला जा सकता है।
जब भारत आत्मनिर्भरता और सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, तब हमारा कॉयर उद्योग यह दिखा रहा है कि कैसे स्थानीय प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का समझदारी से उपयोग कर पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां दी जा सकती हैं।