हाल ही में केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने केरल के पोथुकल पंचायत में चालियार नदी के पार वाणियामपुझा में तिरपाल से बने अस्थायी आश्रयों में रह रहे पणिया जनजाति के परिवारों के तत्काल पुनर्वास का निर्देश अधिकारियों को दिया है।
पणिया (Paniyan) जनजाति के बारे में
पणिया (Paniyan) जनजाति केरल की प्रमुख अनुसूचित जनजातियों में से एक है।
भौगोलिक अवस्थिति:
यह समुदाय मुख्य रूप से वायनाड में पाया जाता है। इसके अलावा केरल के कन्नूर, कोझिकोड और मलप्पुरम जिलों में भी पणिया जनजाति के लोग रहते हैं।
तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के गुडालूर और पंडालूर क्षेत्रों तथा कर्नाटक के कोडागु जिले के दक्षिणी हिस्से में भी पणिया समुदाय के कुछ लोग पाए जाते हैं।
मुख्य कार्य:
पणिया समुदाय केरल की सबसे बड़ी एकल अनुसूचित जनजाति आबादी है।“पणियन” शब्द मलयालम के “पणि” शब्द से निकला है, जिसका अर्थ “काम” होता है।
इस समुदाय के लोग मुख्य रूप से मजदूर रहे हैं और इनके अतीत के इतिहास से भी यही संकेत मिलता है।
वास्तव में, पणिया उन आदिवासी समुदायों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने प्राचीन काल में बंधुआ मजदूर के रूप में काम किया था।
वर्तमान समय में पणिया जनजाति के लोगों के पास अपनी व्यक्तिगत भूमि है और वे चावल तथा रागी जैसी फसलें भी उगाते हैं।
भाषा:
पणिया लोग पणियन भाषा बोलते हैं। यह भाषा द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है और मलयालम से इसका निकट संबंध है।
शारीरिक विशेषताएं:
पणिया लोगों की सामान्य शारीरिक विशेषताओं में मोटे होंठ, गहरी त्वचा और घुंघराले बाल शामिल बताए जाते हैं।
कुछ विद्वानों ने पणिया लोगों की शारीरिक बनावट में अफ्रीकी लोगों से समानता का उल्लेख किया है और उनके अफ्रीकी मूल का होने की संभावना व्यक्त की है।
कुछ विद्वानों के अनुसार, कपिरी (अफ्रीका या केप) पणिया जनजाति की मूल भूमि रही हो सकती है।
निवास स्थल:
पणिया समुदाय ने अपने घर बनाने की एक विशिष्ट शैली विकसित की है।
पणिया गांवों में आम तौर पर बांस से बनी और छप्पर की छत वाली झोपड़ियां कतारों में बनी होती हैं।
पणिया समुदाय के ये घर एक या दो मंजिल के हो सकते हैं।
धार्मिक विश्वास:
पणिया लोग काली नामक देवी और बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं। वे बरगद के पेड़ को काटने से बचते हैं और उनका विश्वास है कि यदि कोई व्यक्ति इस पेड़ को काटने का प्रयास करता है, तो वह बीमार पड़ जाएगा।