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एशियाई उत्पादकता संगठन

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार, भारत के हितों पर विकसित व विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय, महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश)
  • भारत ने वर्ष 2025–26 कार्यकाल के लिए एशियाई उत्पादकता संगठन (Asian Productivity Organization: APO) की औपचारिक अध्यक्षता ग्रहण कर ली है। यह अध्यक्षता इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में इस संगठन की 67वीं शासी निकाय की बैठक के दौरान प्रदान की गई। 
  • यह न केवल भारत की वैश्विक मंचों पर बढ़ती भूमिका को दर्शाता है बल्कि क्षेत्रीय सहयोग, नवाचार एवं उत्पादकता के क्षेत्र में भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) के बारे में  

  • परिचय : एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी। 
  • स्थापना की पृष्ठभूमि :
    • वर्ष 1959 में प्रथम एशियाई गोलमेज उत्पादकता सम्मेलन टोक्यो में आयोजित किया गया। इसी सम्मेलन में एक अंतरिम समिति को निकाय के गठन के लिए एक समझौते का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया है।
    • वर्ष 1960 में दूसरा एशियाई गोलमेज उत्पादकता सम्मेलन फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित किया गया जिसमें ड्राफ्ट अभिसमय को संगठन के चार्टर के रूप में अपनाया गया। 
    • इस अभिसमय पर 14 अप्रैल, 1961 को मनीला में ए.पी.ओ. के संस्थापक सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।
  • मुख्यालय : टोक्यो (जापान) 
  • उद्देश्य : इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उत्पादकता में सुधार के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है।
  • लक्ष्य : सतत उत्पादकता वृद्धि ,मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र एवं समावेशी जुड़ाव व साझा समृद्धि
  • संस्थापक सदस्य : चीन गणराज्य, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस एवं थाईलैंड
  • वर्तमान में कुल सदस्य देश (कुल 21) : भारत, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन गणराज्य, फिजी, हांगकांग, इंडोनेशिया, ईरान, जापान, दक्षिण कोरिया, लाओस, मलेशिया, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, तुर्किये  (2020 में) एवं वियतनाम शामिल हैं।
  • प्रशासनिक संरचना : ए.पी.ओ. में शासी निकाय (Governing Body), राष्ट्रीय उत्पादकता संगठन (NPOs) एवं सचिवालय शामिल हैं जिसका नेतृत्व महासचिव करता है।
    • शासी निकाय संगठन का सर्वोच्च अंग है। इसमें प्रत्येक सदस्य अर्थव्यवस्था से सरकार द्वारा नियुक्त एक निदेशक होता है। महासचिव की नियुक्ति भी शासी निकाय जी.बी. द्वारा की जाती है 
  • भारत की भूमिका : भारत APO का एक संस्थापक सदस्य है और इसके मिशन के निर्माण व कार्यान्वयन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

भारत की अध्यक्षता में प्रमुख प्राथमिकताएँ 

  • रणनीतिक प्राथमिकताएँ
    • एशियाई उत्पादकता संगठन विज़न-2030 के विकास एवं कार्यान्वयन को बढ़ावा देना
    • हरित उत्पादकता (Green Productivity 2.0) ढांचे का विस्तार
    • डिजिटलीकरण, नवाचार, संधारणीयता (Sustainability) एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करना
  • राष्ट्रीय पहलों का साझाकरण : भारत ने क्षेत्रीय भागीदारों के साथ अपने डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल को साझा करने का संकल्प लिया है जिससे अन्य देशों को सीखने व अपनाने का अवसर मिलेगा।

भारत के लिए संभावित लाभ

  • क्षेत्रीय प्रभाव का विस्तार: भारत की अध्यक्षता क्षेत्रीय नीति निर्माण में इसके प्रभाव को बढ़ाएगी।
  • आर्थिक सहयोग का सुदृढ़ीकरण: MSME क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और व्यापार सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
  • वैश्विक नेतृत्व की छवि: यह भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘साझा समृद्धि’ की भावना को वैश्विक मंचों पर पुष्ट करता है।
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