हाल ही में, केंद्रीय खेल मंत्री ने घोषणा की है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का पहला संस्करण 25 मार्च से 6 अप्रैल के बीच आयोजित किया जाएगा। यह प्रतियोगिता देश के जनजातीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: एक नई पहल
- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) खेलो इंडिया स्कीम के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे हैं।
- इन खेलों का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को पहचान देना और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाना है।
- इन प्रतियोगिताओं में कुल सात पदक स्पर्धाएँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, तीरंदाजी, तैराकी और कुश्ती शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो पारंपरिक खेलों मल्लखम्ब (Mallakhamb) और कबड्डी (Kabaddi) को प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किया गया है।
मेजबान राज्य
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी छत्तीसगढ़ करेगा। छत्तीसगढ़ इस विशेष प्रतियोगिता की मेजबानी करने वाला पहला राज्य बनेगा, जो पूरी तरह जनजातीय खिलाड़ियों के लिए समर्पित है।
आयोजन एवं भागीदारी
इस प्रतियोगिता में देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ी भाग लेने वाले हैं। खेलों का संचालन कई संस्थाओं के सहयोग से किया जाएगा, जिनमें युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, भारतीय ओलंपिक संघ, विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघ तथा छत्तीसगढ़ राज्य की आयोजन समिति शामिल हैं।
शुभंकर ‘मोरवीर’
इन खेलों का आधिकारिक शुभंकर ‘मोरवीर’ (Morveer) रखा गया है। यह नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘मोर’ का छत्तीसगढ़ी भाषा में अर्थ ‘मेरा’ या ‘हमारा’ होता है और ‘वीर’ साहस तथा वीरता का प्रतीक है। यह शुभंकर जनजातीय युवाओं की ऊर्जा और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
खेलो इंडिया योजना के बारे में
- खेलो इंडिया योजना भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसका उद्देश्य देशभर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उत्कृष्टता के स्तर तक पहुँचाना है।
- वर्ष 2020 में खेलो इंडिया गेम्स को खेल प्रसारण सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत राष्ट्रीय महत्व की स्पर्धा घोषित किया गया था।
- समग्र रूप से देखा जाए तो खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत जनजातीय समुदायों के युवाओं को खेलों के माध्यम से आगे बढ़ाने और उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।