पश्चिम एशिया में उभरता मिसाइल रक्षा परिदृश्य: तकनीक, रणनीति और चुनौतियाँ
संदर्भ
अमेरिका-नेतृत्व वाले गठबंधन — जिसमें इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं — तथा ईरान के बीच हालिया तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। इस बार सक्रिय हुआ एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा नेटवर्क पिछले वर्ष जून में हुए सीमित किंतु तीव्र संघर्ष से भिन्न और अधिक समन्वित दिखाई देता है।
2025 का तथाकथित ‘ट्वेल्व-डे वॉर’ एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों की अब तक की सबसे कठोर परीक्षा सिद्ध हुआ था। ईरान ने 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और बड़ी संख्या में आत्मघाती ड्रोन के माध्यम से जवाबी कार्रवाई की थी। वर्तमान परिदृश्य में संघर्ष का विस्तार फारस की खाड़ी तक हो गया है, जहाँ यूएई ने अपनी दक्षिण कोरियाई प्रणाली तैनात की है और अमेरिका ने उन प्रणालियों का उपयोग शुरू किया है जो पूर्व में केवल परीक्षण चरण में थीं।
यह स्थिति जहाँ तकनीकी प्रगति को दर्शाती है, वहीं यह भी स्पष्ट करती है कि अमेरिका और इज़राइल को अपने महंगे इंटरसेप्टरों का विवेकपूर्ण उपयोग करना पड़ रहा है ताकि लंबा संघर्ष होने की स्थिति में संसाधनों की कमी न हो।
मिसाइल रक्षा: अवधारणा और कार्यप्रणाली
मिसाइल रक्षा तंत्र का मूल उद्देश्य शत्रु द्वारा दागी गई मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले निष्क्रिय करना है।
इस प्रणाली में उपग्रहों और भूमि-आधारित रडारों जैसे सेंसरों के माध्यम से आकाश की निरंतर निगरानी की जाती है। जैसे ही किसी मिसाइल का पता चलता है, उसकी गति, दिशा और संभावित लक्ष्य का आकलन किया जाता है। इसके पश्चात कमांड एवं नियंत्रण केंद्र उपयुक्त प्रतिक्रिया तय करते हैं।
इस प्रतिक्रिया का मुख्य साधन ‘इंटरसेप्टर’ होता है जोकि एक प्रतिरोधी मिसाइल होती है और आने वाले खतरे को बीच रास्ते में नष्ट कर देती है।
मिसाइल रक्षा का महत्व केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है; यह प्रतिरोध (Deterrence) की रणनीति को भी सुदृढ़ करती है तथा निर्णयकर्ताओं को प्रतिक्रिया के लिए समय प्रदान करती है।
इंटरसेप्टर की कार्यविधि: एक तकनीकी अवलोकन
अमेरिकी पैट्रियट प्रणाली बहु-घटक संरचना पर आधारित है। इसका रडार स्थिर रहते हुए इलेक्ट्रॉनिक रूप से आकाश का स्कैन करता है। जब कोई वस्तु (जैसे- मिसाइल) रडार तरंगों से टकराती है तो लौटने वाले संकेतों के आधार पर कंप्यूटर उसकी स्थिति और गति का विश्लेषण करते हैं।
यदि लक्ष्य को खतरनाक माना जाता है तो रडार उस पर ‘लॉक’ स्थापित करता है और निरंतर निगरानी करता है। समानांतर रूप से एंगेजमेंट कंट्रोल स्टेशन (ECS) प्रक्षेपवक्र की गणना कर प्रक्षेपण का उपयुक्त समय निर्धारित करता है।
लॉन्च आदेश के बाद इंटरसेप्टर दागा जाता है और उड़ान के दौरान उसे भूमि-आधारित रडार से मार्गदर्शन मिलता है। अंतिम चरण में उसका ऑनबोर्ड सीकर सक्रिय होकर लक्ष्य की सटीक पहचान करता है।
इंटरसेप्शन दो प्रकार से संभव है-
प्रॉक्सिमिटी फ्यूज़ आधारित विस्फोट— लक्ष्य के निकट पहुँचकर विस्फोट के माध्यम से विनाश
हिट-टू-किल तकनीक— प्रत्यक्ष टक्कर द्वारा गतिज ऊर्जा से लक्ष्य का विनाश
प्रभावशीलता: दावों और वास्तविकता के बीच
इंटरसेप्टर की सफलता दर लक्ष्य के प्रकार और हमले की प्रकृति पर निर्भर करती है।
इज़राइल की आयरन डोम प्रणाली साधारण और धीमी रॉकेटों के विरुद्ध 80–97% सफलता दर का दावा करती है। इसके विपरीत, तेज़ गति वाली बैलिस्टिक या हाइपरसोनिक मिसाइलों के विरुद्ध सफलता दर अपेक्षाकृत कम रहती है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष में पैट्रियट ने प्रारंभिक चरण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, किंतु बाद में डिकॉय, तीव्र मोड़ और सामूहिक प्रक्षेपण जैसी रणनीतियों के कारण इसकी प्रभावशीलता घटी।
यह अनुभव बताता है कि तकनीकी श्रेष्ठता के बावजूद मिसाइल रक्षा प्रणाली सर्वशक्तिमान नहीं होती है, विशेषकर जब विरोधी ‘सैचुरेशन अटैक’ की रणनीति अपनाता है।
फारस की खाड़ी: नई सामरिक परत
वर्तमान संघर्ष में यूएई ने दक्षिण कोरिया की चियोंगुंग-II प्रणाली को सक्रिय किया है। इसकी 360° रडार कवरेज और वर्टिकल लॉन्च प्रणाली इसे बहुदिशात्मक खतरों से निपटने में सक्षम बनाती है।
खाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए समुद्र-स्तर के निकट उड़ने वाली ‘स्किमर’ मिसाइलें विशेष चुनौती प्रस्तुत करती हैं। ऐसी स्थिति में मिसाइल के अग्रभाग में लगा रडार अंतिम क्षणों में सक्रिय होकर लक्ष्य साधता है।
साथ ही, अमेरिकी THAAD और पैट्रियट बैटरियाँ उच्च-ऊँचाई और मध्यम दूरी के खतरों को रोकने में प्रयुक्त हो रही हैं।
लागत और ‘सैचुरेशन अटैक’ की दुविधा
मिसाइल रक्षा की एक बड़ी चुनौती इसकी अत्यधिक लागत है। उदाहरणस्वरूप, पैट्रियट के PAC-3 MSE इंटरसेप्टर की कीमत लाखों डॉलर प्रति प्रक्षेपण बताई जाती है।
इसके विपरीत, विरोधी अपेक्षाकृत सस्ती मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर महंगे इंटरसेप्टरों को समाप्त करने की रणनीति अपनाता है।
इसी संदर्भ में अमेरिका ने इंडायरेक्ट फायर प्रोटेक्शन कैपेबिलिटी तथा इज़राइल ने आयरन बीम जैसी लेजर-आधारित प्रणालियों का उपयोग शुरू किया है, ताकि महंगे इंटरसेप्टरों पर निर्भरता कम हो।
उत्पादन क्षमता और भविष्य की चुनौतियाँ
वर्ष 2025 के संघर्ष के बाद अमेरिका ने THAAD और PAC-3 MSE के उत्पादन में वृद्धि की है। तथापि विशेषज्ञों का मत है कि वर्तमान उत्पादन क्षमता उच्च-तीव्रता वाले दीर्घकालिक युद्ध की आवश्यकताओं से मेल नहीं खाती है।
यह प्रश्न उठता है कि क्या आधुनिक सैन्य-औद्योगिक ढांचा निरंतर और व्यापक मिसाइल हमलों की स्थिति में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।
ईरान की रक्षा संरचना
ईरान ने बाबर-373 और अरमान जैसी प्रणालियाँ विकसित की हैं जो लंबी दूरी तक लक्ष्य भेदन का दावा करती हैं।
क्रूज़ मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के विरुद्ध सेवोम-ए-खोरदाद प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
फिर भी, हालिया हमलों से संकेत मिलता है कि यदि विरोधी पर्याप्त संख्या में मिसाइलें दागे, तो किसी भी रक्षा प्रणाली को पुनः लोडिंग के दौरान अस्थायी कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया का वर्तमान परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि मिसाइल रक्षा केवल तकनीकी श्रेष्ठता का प्रश्न नहीं है, बल्कि आर्थिक सामर्थ्य, उत्पादन क्षमता और सामरिक अनुकूलन का भी विषय है।
यद्यपि एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ हमलों की तीव्रता को कम कर सकती हैं, वे पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देती हैं।