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बी. बी. लाल 

चर्चा में क्यों 

हाल ही में, भारत के प्रख्यात पुरातत्विद तथा पद्म विभूषण से सम्मानित श्री ब्रज बासी लाल (बी.बी. लाल) का निधन हो गया है।

परिचय

  • इनका जन्म वर्ष 1921 में उत्तर प्रदेश के झाँसी में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी करने के बाद इनकी रूचि पुरातत्व के क्षेत्र में विकसित हुई।  
  • इन्होंने अपने 50 वर्ष के कार्यकाल में 50 से अधिक पुस्तकों तथा 150 से अधिक शोध अध्ययन का प्रकाशन किया।

उपलब्धियां 

  • इनकी रचनाओं में वर्ष 2002 में प्रकाशित ‘द सरस्वती फ्लो ऑन : द कंटिन्युटी ऑफ इंडियन कल्चर’ और वर्ष 2008 में प्रकाशित ‘राम, हिज हिस्टोरिसिटी, मंदिर एंड सेतु : एविडेंस ऑफ लिटरेचर, आर्कियोलॉजी एंड अदर साइंसेज’ प्रमुख हैं।
  • उन्होंने वर्ष 1950-52 तक महाभारत से संबंधित कुछ क्षेत्रों की खुदाई की और अपने विश्लेषण को ‘भारत के पारंपरिक अतीत की खोज में हस्तिनापुर और अयोध्या की खुदाई पर प्रकाश’ नामक पत्र में प्रकाशित किया।
  • इन्होंने वर्ष 1975 में ‘रामायण स्थलों का पुरातत्व’ नामक एक अन्य परियोजना का आरंभ किया। इसमें रामायण से संबंधित पांच क्षेत्र, अर्थात- अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, नंदीग्राम, चित्रकूट और श्रृंगवेरापुर शामिल थे।
  • वर्ष 1990 में उन्होंने अयोध्या की खुदाई के आधार पर ‘एक स्तंभ आधारित सिद्धांत’ प्रस्तुत किया।
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