New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 23rd Oct. 2026, 11:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 23rd Oct. 2026, 11:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

एस्बेस्टस पर प्रतिबंध

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)
संदर्भ 

हाल ही में, यू.एस.ए. की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने घातक कार्सिनोजेन ‘एस्बेस्टस’ (Asbestos) के सभी रूपों/प्रकारों पर व्यापक प्रतिबंध की घोषणा है। 

एस्बेस्टस के बारे में 

  • एस्बेस्टस समान किंतु विशिष्ट गुणों वाले 6 सिलिकेट खनिजों के समूह के लिए एक सामान्य शब्द है। 
  • यह सूक्ष्म रेशों या फाइबर से बना एक मुलायम एवं रोएंदार पदार्थ है जिसका फाइबर नुकीला व सुई जैसे होता है।
  • इसे दो उप-समूहों ‘सर्पेन्टाइन’ एवं ‘एम्फिबोल’ में विभाजित किया गया है जिसमें एकमात्र सर्पेन्टाइन एस्बेस्टस ‘क्राइसोटाइल या सफेद एस्बेस्टस’ का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।
  • इसका व्यापक उपयोग कई निर्माण व अग्निरोधक उत्पादों व मशीनरी पार्ट्स में किया जाता रहा है।

भौतिक गुण 

  • यह गर्मी एवं संक्षारण प्रतिरोधी होता हैं।
  • यह अत्यधिक लचीला, मजबूत व टिकाऊ होता है।
  • यह बहुत अधिक तापमान पर भी ज्वलनशील नहीं होता है।
  • इसमें कम तापीय चालकता और बिजली के प्रति उच्च प्रतिरोध होता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एस्बेस्टस के संपर्क में आने से मनुष्यों को कई गंभीर रोग हो सकते हैं जिनमें मीसोथैलियोमा, लॉरिन्जियल कैंसर, डिम्बग्रंथि कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और एस्बेस्टॉसिस (फेफड़ों में फाइब्रोसिस जैसी स्थिति) शामिल हैं। 
  • जब एस्बेस्टस युक्त उत्पादों का उपयोग किया जाता है, तो सूक्ष्म एस्बेस्टस फाइबर हवा में वितरित हो जाते हैं जो मनुष्य के शरीर में साँस के माध्यम से फेफड़ों में पहुँच जाते हैं और लंबे समय तक वहीं बने रहते हैं।
  • विश्व के 55 देशों में एस्बेस्टस पर प्रतिबंध है किंतु अभी तक अमेरिका में इसका आयात और उपयोग जारी था। प्रतिबंध के बावजूद एस्बेस्टस के पुराने उपयोगों से इसके संपर्क में आने का खतरा बना हुआ है।

एस्बेस्टस के भंडार स्रोत  

  • दुनिया भर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एस्बेस्टस के भंडार मौजूद हैं। 
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में पश्चिमी और पूर्वी तटों वाले राज्यों में सबसे अधिक एस्बेस्टस भंडार हैं।
  • भारत की एस्बेस्टस आवश्यकता रूस, कजाकिस्तान, ब्राजील और चीन से आयात के माध्यम से पूरी होती है।

सफेद एस्बेस्टस

  • सफेद एस्बेस्टस को क्रिसोटाइल भी कहा जाता है जो एस्बेस्टस का सबसे आम रूप है। 
  • यह फ़ाइलोसिलिकेट्स के सर्पेन्टाइन उपसमूह में एक मुलायम, रेशेदार सिलिकेट खनिज है। इसका रासायनिक सूत्र Mg3(Si2O)(OH)4 है।​ 
  • क्रिसोटाइल एस्बेस्टस का उपयोग मुख्यत: क्लोर-क्षार उद्योग में किया जाता था जो क्लोरीन ब्लीच, कास्टिक सोडा व जल उपचार में उपयोग किए जाने वाले अन्य रसायनों का उत्पादन करता है। 
  • हालाँकि, क्रिसोटाइल एस्बेस्टस डायाफ्राम, क्लोरीन उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले फिल्टर के सुरक्षित विकल्प कुछ समय से उपलब्ध हैं। 
  • इसके भौतिक गुण इसे निर्माण सामग्री में शामिल करने के लिए वांछनीय बनाते हैं, लेकिन हवा में फैलने और सांस के साथ लेने पर यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। 
  • अमेरिका में कानूनी रूप से उपयोग किया जाने वाला यह अंतिम एस्बेस्टस प्रकार था।
  • वर्ष 2005 से सभी एस्बेस्टस उत्पादों पर यूरोपीय संघ के सभी देशों में प्रतिबंध लगा दिया गया जिसमें पूर्वी यूरोप के सदस्य देश भी शामिल थे।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR