संविधान का संथाली संस्करण और ‘ओल चिकी’ लिपि

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारतीय संविधान का संथाली भाषा में विमोचन किया। इस प्रकार, देश का संविधान अब ‘ओल चिकी’ लिपि में उपलब्ध है। यह प्रकाशन ओल चिकी लिपि के शताब्दी वर्ष के साथ संयोग में किया गया है।

संथाली भाषा का इतिहास 

  • भाषाई गौरव और संवैधानिक मान्यता प्राप्त संथाली भारत की प्राचीनतम जीवित भाषाओं में से एक है। वर्ष 2003 में 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। 
  • यह भाषा मुख्यत: झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार के जनजातीय समुदायों द्वारा बोली जाती है। यह भाषा हो और मुंडारी भाषाओं से बहुत निकटता से संबद्ध है। संथाली भाषा ऑस्ट्रो-एशियाई भाषा-परिवार में मुंडा शाखा में आती है। 
  • भारत, बांग्लादेश, नेपाल एवं भूटान में लगभग 76 लाख लोग संथाली भाषा बोलते हैं। भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान संथाली भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती थी। वर्तमान में संथाली भाषा देवनागरी लिपि का उपयोग करके लिखी जाती है। 

ओल चिकी लिपि का शताब्दी वर्ष  

  • ऑल चिकी लिपि (Ol Chiki Script) संथाली भाषा लिखने में प्रयुक्त होती है। इसको ओल चेमेट (Ol Chemet), ओल सिकी (Ol Ciki), ओल (Ol) या संथाली वर्णमाला भी कहते हैं।
  • इसका आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू ने वर्ष 1925 में किया था। यह लिपि बाएँ से दाएँ लिखी गई है और इसके दो रूप ‘चपा’ एवं ‘उसरा’ हैं। 
  • यह संथाली के लिए आधिकारिक लेखन प्रणाली है। इसमें 30 अक्षर हैं जिनके रूपों का उद्देश्य प्राकृतिक आकृतियों को उद्घाटित करना है। 
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