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बल्क ड्रग्स पार्क

इस वर्ष की शुरुआत में केंद्र सरकार ने तीन बल्क ड्रग पार्क स्थापित करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश ने बल्क ड्रग पार्क के आवंटित किये जाने की माँग की है।

बल्क ड्रग्स या ए.पी.आई. क्या हैं?

  • बल्क ड्रग, जिन्हें सक्रिय दवा सामग्री (active pharmaceutical ingredient - API) भी कहा जाता है, किसी दवा या ड्रग के प्रमुख घटक होते हैं, जो दवा या ड्रग को वांछित चिकित्सीय प्रभाव देते हैं।
  • प्रत्येक दवा दो मुख्य अवयवों से बनी होती है। इसमें से एक अवयव है रासायनिक रूप से सक्रिय ए.पी.आई. तथा दूसरा अवयव रासायनिक रूप से निष्क्रिय (Excipients) घटक होता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो ए.पी.आई. के प्रभाव को शरीर के किसी हिस्से या किसी प्रणाली में पहुँचाता है। इन दोनों अवयवों को मिला कर ही किसी औषधि का फ़ॉर्मूला तैयार किया जाता है।
  • ए.पी.आई. एक रासायनिक यौगिक है, जो किसी दवा को अंतिम रूप से उत्पादित करने हेतु सबसे महत्त्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है।
  • चिकित्सा क्षेत्र में, ए.पी.आई. ही किसी बीमारी को ठीक करने के लिये आवश्यक प्रभाव उत्पन्न करता है। उदाहरण के तौर पर पैरासिटामॉल, क्रोसिन के लिये एक ए.पी.आई. है और यह पैरासिटामॉल ए.पी.आई. ही शरीर में दर्द और बुखार से राहत देता है, जबकि एम.जी. (mg) किसी दवा में उपस्थित सक्रिय औषधीय अवयव (ए.पी.आई.) की मात्रा प्रदर्शित करती है जैसे- क्रोसिन 450 एम.जी. का अर्थ है कि इस टेबलेट में 450 एम.जी. सक्रिय औषधीय अवयव है।
  • फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन ड्रग्स (औषधि) विभिन्न ए.पी.आई. का उपयोग करते हैं, जबकि क्रोसिन जैसी सिंगल-डोज़ ड्रग्स सिर्फ एक ए.पी.आई. का उपयोग करती हैं।
  • बुनियादी कच्चा माल या प्राथमिक रसायन जो ए.पी.आई. बनाने के लिये विभिन्न अभिक्रियाओं से गुज़रते हैं उन्हें प्रमुख प्रारम्भिक सामग्री (key starting material) या के.एस.एम. कहा जाता है।
  • इन अभिक्रियाओं के दौरान मध्यवर्ती चरणों में बनने वाले रासायनिक यौगिकों को दवा मध्यवर्ती (drug intermediates) या डी.आई. कहा जाता है।

भारत बल्क ड्रग पार्क को क्यों बढ़ावा दे रहा है?

  • भारत में दुनिया के सबसे बड़े फार्मास्युटिकल उद्योगों में से एक (परिमाण के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा) है, लेकिन यह उद्योग ए.पी.आई, डी.आई.एस. और के.एस.एम. के आयात के लिये बड़े पैमाने पर अन्य देशों, विशेष रूप से चीन पर निर्भर है।
  • ध्यातव्य है कि इस वर्ष भारत में दवा निर्माताओं को आयात में लगातार आ रहे व्यवधानों के कारण बार-बार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
  • पहले लॉकडाउन के कारण चीन में फैक्ट्रियाँ बंद हो गईं फिर पूरे विश्व में महामारी फैलने के बाद अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला भी बुरी तरह से प्रभावित हो गई।
  • भारत और चीन के बीच सीमा संघर्ष ने व्यापार समीकरणों को और खराब कर दिया।

केंद्र की योजना क्या है?

  • केंद्र की योजना आम बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिये एकमुश्त अनुदान सहायता प्रदान करके देश के तीन चयनित पार्कों  के निर्माण में सहायता प्रदान करने की है।
  • सरकार आम सुविधाओं की लागत का 70% अनुदान सहायता के रूप में देगी जबकि हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी राज्यों के मामले में यह सहायता 90% होगी।
  • केंद्र प्रति पार्क अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये प्रदान करेगा।
  • एक राज्य केवल एक साइट का प्रस्ताव कर सकता है, जो क्षेत्र में एक हज़ार एकड़ से कम न हो या पहाड़ी राज्यों के मामले में 700 एकड़ से कम ना हो।

बल्क पार्क क्या प्रदान करता है?

  • बल्क ड्रग पार्क में ए.पी.आई, डी.आई, या के.एस.एम. के अनन्य निर्माण के लिये सामान्य अवस्थापना सुविधाओं के साथ भूमि का एक निर्दिष्ट सन्निहित क्षेत्र होगा और एक सामान्य अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली भी होगी।
  • इन पार्कों से देश में थोक दवाओं की विनिर्माण लागत में कमी आने और घरेलू बल्क ड्रग उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।

हिमाचल ही क्यों?

  • हिमाचल में पहले से ही एशिया का सबसे बड़ा फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र (Baddi-Barotiwala-Nalagarh industrial belt) है और यह राज्य भारत की कुल दवा निर्माण का लगभग आधा हिस्सा उत्पादित करता है।
  • हिमाचल प्रदेश, देश में सबसे कम दरों पर बिजली और पानी प्रदान करता है और यहाँ एक औद्योगिक गैस पाइपलाइन भी है।
  • हिमाचल प्रदेश ने पिछले महीने केंद्र द्वारा घोषित की गई व्यापार रैंकिंग में नौ स्थान की छलांग लगाते हुए देश में सातवाँ स्थान हासिल किया है।
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