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चागोस द्वीपसमूह समझौता

प्रारंभिक परीक्षा 

(अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)

मुख्य परीक्षा

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव) 

संदर्भ

  • यूनाइटेड किंगडम एवं मॉरीशस के मध्य एक ऐतिहासिक समझौते के अनुसार, चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को हस्तांतरित कर दी जाएगी। हालाँकि, इस द्वीपसमूह का हिस्सा डिएगो गार्सिया द्वीप पर यूनाइटेड किंगडम-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा कम-से-कम अगले 99 वर्षों तक बना रहेगा।
  • दशकों पुराने क्षेत्रीय विवाद को सुलझाने में यह समझौता उल्लेखनीय है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के भविष्य को सुरक्षित करता है। भारत ने इस द्वीपसमूह से संबंधित कानूनी विवाद में मॉरीशस का समर्थन किया है। 

चागोस द्वीपसमूह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 

  • चागोस द्वीपसमूह (Chagos Archipelago) में 58 एटॉल शामिल हैं। 18वीं सदी के उत्तरार्ध में चागोस द्वीपसमूह सहित मॉरीशस फ्रांस का उपनिवेश बन गया और नारियल के बागानों की स्थापना की गयी।
    • बागानों में काम करने के लिए अफ्रीका से दासों को लाया गया था। बाद में अंग्रेजों ने इन द्वीपों पर कब्ज़ा कर लिया। 
    • चागोस द्वीपसमूह के सबसे बड़े एटोल दक्षिण-पूर्व में स्थित डिएगो गार्सिया तथा उत्तर में स्थित पेरोस बानहोस और सॉलोमन द्वीप हैं।
  • वर्ष 1965 में ब्रिटेन ने ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT) का गठन किया, जिसमें चागोस द्वीपसमूह एक केंद्रीय हिस्सा था। 
  • प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए चागोस द्वीपसमूह को हिंद महासागर में स्थित ब्रिटिश उपनिवेश मॉरीशस से संबद्ध कर दिया गया था। हालाँकि, वर्ष 1968 में मॉरीशस को स्वतंत्रता मिलने पर चागोस को ब्रिटेन के साथ ही रखा गया।
    • वर्ष 1976 में सेशेल्स को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली और इसे कुछ अन्य BIOT द्वीप सौंप दिए गए।


मॉरीशस द्वारा चागोस पर संप्रभुता के अधिकार संबंधी मुद्दा 

  • वर्ष 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से चागोस द्वीपसमूह की कानूनी स्थिति की जांच का अनुरोध करने के लिए मतदान किया था
  • दो वर्ष बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने  एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें यूनाइटेड किंगडम से छह महीने के भीतर इस क्षेत्र से बिना शर्त औपनिवेशिक प्रशासन वापस लेने की मांग की गई।
  • अधिकांश देशों सहित भारत ने वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के पक्ष में मतदान किया। 

यूके-मॉरीशस संधि का महत्व

  • मॉरीशस अब “डिएगो गार्सिया के अलावा चागोस द्वीपसमूह के द्वीपों पर पुनर्वास के कार्यक्रम को लागू करने के लिए स्वतंत्र है”। 
    • ब्रिटेन ने ‘चागोस वासियों के लाभ के लिए’ एक नया ट्रस्ट फंड बनाने का भी वादा किया है।
  • डिएगो गार्सिया विवाद का सफल समाधान एक स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत के प्रति पश्चिमी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा। 
  • भारत ने हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मुखरता के बीच मॉरीशस के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास किया है। इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिमी हिंद महासागर में मॉरीशस के अगालेगा द्वीपीय क्षेत्र में भारत ने हवाई पट्टी व एक जेटी का उद्घाटन किया गया था। 

ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT)

  • पूर्व में मॉरीशस के ब्रिटिश क्राउन कॉलोनी के भाग के रूप में प्रशासित ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT) की स्थापना वर्ष 1965 में यूनाइटेड किंगडम के एक विदेशी क्षेत्र के रूप में की गई थी। 
  • वर्ष 1976 में सेशेल्स की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस क्षेत्र के कई द्वीपों को सेशेल्स को सौंप दिया गया था। इसके बाद BIOT में छह मुख्य द्वीपसमूह शामिल हैं जो चागोस द्वीपसमूह का निर्माण करते हैं। 
    • चागोस द्वीपसमूह के सबसे बड़े एवं सबसे दक्षिणी द्वीप ‘डिएगो गार्सिया’ पर लोगों का निवास हैं। 
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