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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए नए लोगो का अनावरण

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, आर्थिक एवं सामाजिक विकास)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

वित्त मंत्रालय ने 18 दिसंबर, 2025 को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के लिए नया लोगो पेश किया, जो इन बैंकों की एकीकृत एवं पहचान योग्य ब्रांड छवि को दर्शाता है।

संबंधित तथ्य 

  • ‘एक राज्य, एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक’ के सिद्धांत के तहत वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 26 आरआरबी का विलय किया, जो 1 मई, 2025 से लागू हुआ। इस कदम का उद्देश्य मजबूत एवं कुशल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का निर्माण करना था।
  • वर्तमान में 28 आर.आर.बी. देश के 700 से अधिक जिलों में 22,000 से अधिक शाखाओं के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सेवा प्रदान कर रहे हैं। 
  • नए लोगो में प्रयोग किए गए रंगों का चयन भी विशिष्ट अर्थ रखता है जिसमें गहरा नीला वित्त व विश्वास का प्रतीक है, जबकि हरा रंग जीवन एवं विकास का प्रतीक है, जो ग्रामीण भारत की सेवा के प्रति आर.आर.बी. के मिशन को दर्शाता है।

  • सरकार की इस साझा ब्रांडिंग योजना से राष्ट्रीय स्तर पर आर.आर.बी. को एक आधुनिक, विशिष्ट एवं आसानी से पहचान योग्य ब्रांड पहचान मिलने की उम्मीद है। यह कदम ग्रामीण विकास एवं वित्तीय समावेशन के प्रति इन बैंकों की सामूहिक प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।
  • ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रगति व विकास के विषयों को दर्शाते हुए यह लोगो आर.आर.बी. द्वारा अपनाए गए मूल्यों को सुदृढ़ करता है। 
  • इनमें शामिल हैं:
    • ऊपर की ओर संकेत करने वाला तीर (प्रगति का प्रतीक) Image: ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि, विकास एवं उन्नति का प्रतिनिधित्व करता है।
    • हाथ (पोषण का प्रतीक)Image : ग्रामीण समुदायों के लिए देखभाल, समर्थन एवं मदद का हाथ दर्शाता है।
    • लौ (ज्ञानोदय का प्रतीक)Image : यह गर्माहट, ज्ञान एवं ग्रामीण आबादी को सशक्त बनाने का प्रतीक है। 
  • सरकार की इस साझा ब्रांडिंग पहल से राष्ट्रीय स्तर पर आर.आर.बी. (ग्रामीण विकास बैंक) को एक विशिष्ट, आधुनिक व आसानी से पहचाने जाने योग्य ब्रांड पहचान मिलने की उम्मीद है। यह वित्तीय समावेशन और ग्रामीण विकास के प्रति उनकी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के बारे में 

  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) की स्थापना भारत के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। 
  • ये बैंक केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों और प्रायोजक वाणिज्यिक बैंकों के संयुक्त प्रयास से गठित किए जाते हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण व बैंकिंग सेवाएँ सुलभ हो सकें।

उद्देश्य 

  • आर.आर.बी. का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में कम सेवा प्राप्त वर्गों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करना है। 
  • इनमें प्रमुख रूप से छोटे व सीमांत किसान, कृषि मजदूर, कारीगर, छोटे उद्यमी और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शामिल हैं। 
  • ये बैंक ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से संसाधन जुटाकर उन्हीं क्षेत्रों में ऋण एवं अग्रिम उपलब्ध कराते हैं।

स्थापना एवं गठन 

  • आर.आर.बी. की स्थापना क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के अंतर्गत की गई थी, जो नरसिम्हम समिति (1975) की सिफारिशों पर आधारित थी। देश का पहला आर.आर.बी. ‘प्रथमा ग्रामीण बैंक’ 2 अक्टूबर, 1975 को स्थापित हुआ।
  • आर.आर.बी. को एक हाइब्रिड माइक्रो-बैंकिंग संस्था के रूप में विकसित किया गया, जिसमें सहकारी संस्थाओं की स्थानीय समझ और छोटे ऋण की परंपरा को वाणिज्यिक बैंकों की पेशेवर कार्यशैली के साथ जोड़ा गया।

प्रमुख कार्य

  • आर.आर.बी. विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान करते हैं जिनमें शामिल हैं-
    • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करना
    • सरकारी योजनाओं के अंतर्गत कार्य, जैसे- मजदूरी वितरण, पेंशन भुगतान आदि की सुविधा उपलब्ध कराना
    • पैरा-बैंकिंग सेवाएँ, जैसे- लॉकर सुविधा, डेबिट व क्रेडिट कार्ड, मोबाइल एवं इंटरनेट बैंकिंग, यू.पी.आई. आदि सेवाएँ उपलब्ध कराना 
  • प्राथमिकता क्षेत्र ऋण : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आर.आर.बी. के लिए कुल अग्रिमों का 75% प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के रूप में निर्धारित किया है जबकि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए यह लक्ष्य 40% है।
  • स्वामित्व एवं संचालन क्षेत्र : आर.आर.बी. की इक्विटी हिस्सेदारी केंद्र सरकार (50%), राज्य सरकार (15%) और प्रायोजक बैंक (35%) के बीच विभाजित होती है। इन बैंकों का संचालन क्षेत्र भारत सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्रों तक सीमित होता है जिसमें किसी राज्य के एक या अधिक जिले शामिल हो सकते हैं।
  • नियमन एवं पर्यवेक्षण : आर.आर.बी. का नियमन आर.बी.आई. द्वारा किया जाता है जबकि उनका पर्यवेक्षण राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) करता है।
  • निधि के स्रोत : आर.आर.बी. की निधियां विभिन्न स्रोतों से आती हैं, जैसे- स्वामित्व निधि व जमा राशि, नाबार्ड से प्राप्त ऋण, प्रायोजक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण, जिनमें सिडबी (SIDBI) एवं राष्ट्रीय आवास बैंक शामिल हैं।
  • प्रबंधन संरचना : आर.आर.बी. का प्रबंधन एक निदेशक मंडल के माध्यम से किया जाता है, जिसमें एक अध्यक्ष, केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन निदेशक, संबंधित राज्य सरकार द्वारा नामित अधिकतम दो निदेशक और प्रायोजक बैंक द्वारा नामित अधिकतम तीन निदेशक शामिल होते हैं।
  • वर्तमान स्थिति : वर्तमान में देशभर में 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कार्यरत हैं जो 700 से अधिक जिलों में 22,000 से ज्यादा शाखाओं के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से ग्रामीण भारत को बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। 
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