New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM Spring Sale UPTO 75% Off GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 Spring Sale UPTO 75% Off GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX)

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास व अनुप्रयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास व नई प्रौद्योगिकी का विकास, अंतरिक्ष)

संदर्भ

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पहले डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX) के निष्कर्षों के आधार पर यह पुष्टि की है कि औसतन प्रत्येक 1,000 सेकंड में एक अंतरग्रहीय धूल कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है। 

डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX) के बारे में 

  • DEX भारत में विकसित किया गया पहला उपकरण है जो अत्यधिक वेग से चलने वाले अंतरग्रहीय धूल कणों (Interplanetary Dust Particles: IDPs) की पहचान करने में सक्षम है।
  • यह उपकरण विशेष रूप से उन कणों के अध्ययन के लिए तैयार किया गया है जो अत्यंत अल्प समय के लिए अस्तित्व में रहते हैं और जिनका पता लगाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।
  • इस उपकरण का विकास अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) द्वारा किया गया है। इसे 1 जनवरी, 2024 को PSLV-C58 XPoSat मिशन के अंतर्गत PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM) पर स्थापित कर अंतरिक्ष में भेजा गया। 

डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX) की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह एक कॉम्पैक्ट उपकरण है जिसे अंतरिक्ष धूल के टकरावों को ‘सुनने’ और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े दर्ज करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसके मुख्य घटक के रूप में हाइपरवेलोसिटी सिद्धांत पर आधारित लगभग 3 किलोग्राम वज़न का डस्त डिटेक्टर लगाया गया है जो केवल 4.5 वाट ऊर्जा की खपत में उच्च गति से टकराने वाले धूल कणों का पता लगा सकता है।
  • DEX एक ऐसे डिटेक्टर का मॉडल प्रस्तुत करता है जिसे वायुमंडल युक्त या वायुमंडल रहित किसी भी ग्रह पर ब्रह्मांडीय धूल कणों के अध्ययन के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। 

डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX) का महत्व

  • इस प्रयोग से प्राप्त आंकड़े ब्रह्मांड की संरचना तथा प्रक्रियाओं के बारे में हमारी समझ को और अधिक व्यापक बनाते हैं।
  • ये निष्कर्ष भविष्य में मानवयुक्त गहरे अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
  • पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाली अंतरग्रहीय धूल से संबंधित जानकारी गगनयान मिशन की योजना और सुरक्षा आकलन के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी। 

अंतरग्रहीय धूल कण (IDPs) के बारे में 

  • अंतरग्रहीय धूल कण अत्यंत सूक्ष्म (माइक्रोमीटर आकार के) कण होते हैं जिनकी उत्पत्ति सौर मंडल के भीतर होती है।
  • ये मुख्यत: धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से टूटकर निकले सूक्ष्म कण होते हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर एक रहस्यमय ‘उल्का परत’ का निर्माण करते हैं।
  • जब ये कण वायुमंडल में जलते हैं तो रात के आकाश में इन्हें ‘टूटते तारे’ के रूप में देखा जाता है। 
  • इन कणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करके उनकी उत्पत्ति, निर्माण प्रक्रिया तथा प्रारंभिक सौर एवं पूर्व-सौर काल में हुई घटनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।  
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X