New
Solved - UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Solved - UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

भारत में चीता पुनर्वास

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर नामिबिया से 8 अफ्रीकी चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया। इसमें से 5 मादा और 3 नर चीते हैं जिनकी आयु 4 से 6 वर्ष के बीच है। 

प्रमुख बिंदु

  • यह कार्य 90 करोड़ रुपए की लागत से संचालित ‘चीता परिचय परियोजना’ के अंतर्गत किया जा रहा है।

cheetahs

  • उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की योजना इस वर्ष 20 चीतों (निमिबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12) को अफ्रीका से भारत स्थानांतरित करने की है। हालाँकि, दक्षिण अफ्रीका सरकार की अनुमति अभी लंबित है।
  • इसे विश्व के साथ-साथ भारत में किसी बड़े माँसाहारी जीव का पहला अंतर-महाद्वीपीय स्थानांतरण माना जा रहा है। हालाँकि, स्वतंत्र भारत में विशेष रूप से चिड़ियाघरों के लिये चीतों को कम संख्या में भारत लाया जाता रहा है।
  • इन्हें नामीबिया की राजधानी विंडहॉक से एक चार्टर्ड बोइंग 747 कार्गो विमान से ग्वालियर हवाई अड्डे पर लाया गया।

भारत में चीता शब्द की उत्पत्ति

namibia

  • पुरातत्वविदों के अनुसार, मध्य प्रदेश के मंदसौर के चतुर्भुज नाला की नवपाषण गुफा से प्राप्त एक पतली चित्तीदार बिल्ली सदृश्य जानवर के शिकार की चित्रकारी (Painting) को भारत में चीते की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का प्रतीक माना जाता है।
  • चीता शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘चित्रक’ शब्द से मानी जाती है, जिसका अर्थ होता है ‘चित्तीदार’। 
  • भारत में चीते के शिकार का सर्वप्रथम उपलब्ध साक्ष्य 12वीं शताब्दी के संस्कृत साहित्य ‘मानसोल्लास’ में मिलता है। इसे ‘अभिलाषितार्थ चिंतामणि’ के नाम से भी जाना जाता है जिसकी रचना कल्याणी चालुक्य शासक सोमेश्वर-III ने की थी।

भारत में चीते का इतिहास 

  • उल्लेखनीय है कि भारत में पहले चीते उत्तर में जयपुर एवं लखनऊ से दक्षिण के मैसूर तथा पश्चिम में कठियावाड से पूर्व में देवगढ़ तक पाए जाते थे।
  • अनुमानत: वर्ष 1947 में कोरिया रियासत के महाराज रामानुज प्रताप सिंह देव ने अपने शिकार के दौरान भारत के अंतिम तीन अभिलिखित एशियाई चीतों का शिकार किया। इसके बाद से भारतीय प्राकृतिक क्षेत्र में चीतों को विलुप्त माना जाने लगा।
  • भारत सरकार ने वर्ष 1952 में अधिकारिक तौर पर चीता को विलुप्त घोषित कर दिया। 

चीता की विलुप्ति के कारण 

  • अत्यधिक शिकार।
  • चीतों के शिकार आधार वाली प्रजातियों (जैसे- चीतल, हिरन आदि) की संख्या में कमी।
  • आवास की क्षति 
  • स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विस्तार पर ज़ोर देने के कारण।
  • मानवीय हस्तक्षेपों के कारण घास के मैदानों और जंगल क्षेत्र में कमी।
  • अवैध व्यापर और तस्करी। 

चीते की वैश्विक स्थिति

  • वर्तमान में चीते की दो मान्यता प्राप्त उप-प्रजातियाँ– एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) और अफ़्रीकी चीता (Acinonyx jubatus jubatus) मौजूद हैं। अफ़्रीकी चीता मुख्यत: सवाना क्षेत्र में पाया जाता है।  
  • उल्लेखनीय है कि 1940 के दशक से विश्व के 14 अन्य देशों में भी चीते विलुप्त हो गए हैं- जॉर्डन, इराक, इजरायल, मोरक्को, सीरिया, ओमान, ट्यूनीशिया, सऊदी अरब, जिबूती, घाना, नाइजीरिया, कज़ाखस्तान, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान।
  • चीता कई प्रकार के आवासों, जैसे- अर्ध-शुष्क घास का मैदान, तटीय झाड़ियाँ, जंगली सवाना, पर्वतीय क्षेत्र, बर्फीले रेगिस्तान और ऊबड़-खाबड़ अर्ध शुष्क क्षेत्रों में निवास में सक्षम है। 

वैश्विक प्रयास

  • चीता को 1 जुलाई, 1975 से ‘लुप्तप्राय वन्यजीव एवं वनस्पति प्रजाति अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभिसमय’ (CITIES) के परिशिष्ट-I के तहत संरक्षित किया गया है और वाणिज्यिक प्रयोग के लिये इसका अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधित है।
  • चीता को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में संवेदनशील (Vulnerable) के रूप में अधिसूचित किया गया है। 

भारत में चीता स्थानांतरण के उद्देश्य

  • भारत के ऐतिहासिक विकासवादी संतुलन को बहाल करना।
  • चीता मेटापॉपुलेशन (Metapopulation) विकसित करना, जिससे चीते के वैश्विक संरक्षण में सहायता की जा सके।
  • मेटापॉपुलेशन कुछ बड़े क्षेत्र के भीतर स्थानीय आबादी का एक समूह है, जहां एक आबादी से दूसरी आबादी में प्रवास संभव है।
  • चीता एक प्रमुख प्रजाति है और इसके संरक्षण से चारागाह-जंगल और उसके बायोम व आवास को पुनर्जीवित किया जा सकेगा।
  • उदाहरणस्वरुप प्रोजेक्ट टाइगर से वनों और इनमें पाई जाने वाली सभी प्रजातियों के लिये बायोम का निर्माण हुआ।
  • प्रोजेक्ट टाइगर के परिणामस्वरूप भारत के 52 टाइगर रिजर्व के 250 जल निकायों का संरक्षण भी हुआ है।
  • इस परियोजना ने अफ्रीका, विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका में संरक्षण प्रयासों में भी मदद की है
  • गौरतलब है कि 7000 की कुल वैश्विक चीता आबादी में से लगभग 4500 का संबंध दक्षिण अफ्रीका से है। 

पूर्व प्रयास 

  • विशेषज्ञों के अनुसार, चीते की उत्पत्ति दक्षिण अफ्रीका में हुई और भूमि-संपर्क के कारण इसका विस्तार विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में हुआ। 
  • अवैध व्यापार और शिकार के कारण कालाहारी में चीता कभी गंभीर रूप से संकटग्रस्त था। हालाँकि, बाद में इनकी संख्या में सुधार आया।
  • भारत में चीतों के स्थानांतरण से संबंधित प्रथम प्रयास 1970 के दशक में किया गया था। हालाँकि, इसे वास्तविक स्वरुप नहीं दिया जा सका था। 
  • इसके अतिरिक्त भारत में चीता संरक्षण से संबंधित प्रयास वर्ष 2009 में शुरू किये गए थे किंतु उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में वर्ष 2020 में अनुमति प्रदान की थी।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चयन का कारण 

  • भारतीय वन्यजीव संस्थान ने स्थानांतरण के लिये छह क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इसमें कूनो राष्ट्रीय उद्यान, मध्य प्रदेश का चयन किया गया। पूर्व में इसे एशियाई शेरों के स्थानांतरण के लिये तैयार किया गया था।
  • श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान की सभी पर्यावरणीय परिस्थितियां (वर्षा का स्तर, तापमान, ऊंचाई आदि) दक्षिण अफ्रीका और निमिबिया के समरूप है।
  • इसके अतिरिक्त यहाँ विस्तृत वास स्थान की उपलब्धता, मानव आबादी के विस्थापन में आसानी, पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव की नगण्य संभावना और शिकार के लिये पर्याप्त जीवों की उपलब्धता इसके चयन के प्रमुख कारण हैं। 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान की विशेषताएँ

  • वन मंत्रालय के अनुसार, 740 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तारित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में शिकार का पर्याप्त आधार उपलब्ध है। यहाँ चीतल, संभल, नील गाय, जंगली सुअर, चिंकारा, मवेशी, लंगूर, मोर आदि प्रमुखता से पाए जाते हैं। 
  • इस क्षेत्र का दक्षिण-पूर्वी भाग माधव राष्ट्रीय उद्यान-शिवपुरी वन प्रभाग के माध्यम से पन्ना-टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है। चंबल नदी के पार राजस्थान में रणथंभौर टाइगर रिजर्व उत्तर-पश्चिमी तरफ जुड़ा हुआ है।

चीता पुनर्वास से लाभ

  • चीते के संरक्षण से घास के मैदानों और उनके पारिस्थितिक तंत्र, जैसे- बायोम और आवास को पुनर्जीवित करना।
  • चीता संरक्षण की दिशा में वैश्विक प्रयास में योगदान देना।
  • स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिये अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना एवं उनके जीवन स्तर में वृद्धि करना।
  • इकोटूरिज़्म और संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देना।

 चिंताएं

  • जीन प्रवाह से संबंधित चिंताएं
  • विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों के इतने छोटे समूह में जीन प्रवाह चिंताजनक है। 
  • भारत के पारिस्थितिकी तंत्र में उसके व्यवहार का अध्ययन करना 
  • जलवायु अनुकूलन स्थापित करना 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR