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जलवायु परिवर्तन और यूरोप में दावानल: एक गंभीर चुनौती

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन; आपदा एवं आपदा प्रबंधन)

संदर्भ

जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप, विशेष रूप से भूमध्यसागरीय क्षेत्र, में जंगल की आग (दावानल) की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। 

यूरोप में दावानल के बारे में

  • वर्ष 2025 में यूरोप में 1,118 आग की घटनाएँ दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 716 की तुलना में काफी अधिक है।
  • वर्ष 2025 में यूरोप में जंगल की आग ने 227,000 हेक्टेयर भूमि को प्रभावित किया, जो विगत दो दशकों के औसत से दोगुना है।
  • जलवायु परिवर्तन ने यूरोप में तापमान एवं मौसम के पैटर्न को बदल दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जंगल की आग की तीव्रता व आवृत्ति में वृद्धि हुई है। 

प्रमुख प्रेरक कारक: जलवायु परिवर्तन 

तापमान में वृद्धि

  • वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में 1.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है जबकि यूरोप में यह वृद्धि दोगुनी, यानी लगभग 2.6 डिग्री सेल्सियस है।
  • हीट वेव्स की बारंबारता और तीव्रता बढ़ रही हैं, जिससे वनस्पति का नमी स्तर कम होता है तथा यह आग के लिए ईंधन बन जाती है।
  • अगस्त 2025 में यूरोप में सामान्य से अधिक तापमान की भविष्यवाणी की गई है जो आग के खतरे को अधिक बढ़ाएगी।

सूखे की स्थिति

  • जलवायु परिवर्तन ने वर्षा के पैटर्न को प्रभावित किया है जिससे भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सूखा अधिक गंभीर एवं लंबा हो गया है।
  • सूखी मिट्टी एवं वनस्पति आग को आसानी से फैलने में मदद करती है, खासकर जब तेज हवाएँ चल रही हों।

मौसम का विस्तार

  • पहले जंगल की आग मुख्यत: गर्मियों तक सीमित थी किंतु अब यह मौसम पहले शुरू होता है और देर तक चलता है।
  • ग्रीस एवं दक्षिणी इटली जैसे क्षेत्रों में आग का मौसम अब पारंपरिक गर्मियों से परे विस्तारित हो रहा है।

मानवजनित ग्रीनहाउस गैसें

  • कोयला, तेल एवं गैस के दहन से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों से वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही हैं जो आग के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती हैं।
  • विश्व मौसम संगठन (WMO) एवं अंतर सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) ने पुष्टि की है कि जलवायु परिवर्तन से हीट वेव व सूखे में वृद्धि हो रही है।

दीर्घकालिक प्रभाव एवं चुनौतियाँ 

जलवायु परिवर्तन एवं जंगल की आग का यूरोप पर दीर्घकालिक प्रभाव गंभीर व बहुआयामी है:

  • पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
    • जंगल की आग कार्बन सिंक को नष्ट कर देती है जिससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है और जलवायु परिवर्तन अधिक तेज होता है।
    • वर्ष 2024 में जंगल की आग से यूरोप में 4.1 गीगाटन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हुआ, जो छह यूरोपीय देशों की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है।
  • जैव विविधता का नुकसान
    • बार-बार होने वाली आगें यूरोप के जंगलों में जैव विविधता को खतरे में डाल रही हैं जिससे पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं।
    • ग्रीस एवं पुर्तगाल जैसे देशों में वर्ष 2023 व 2024 में आग ने बड़े पैमाने पर वन क्षेत्रों को नष्ट किया, जिससे वन्यजीवों के आवास नष्ट हुए।
  • मानव स्वास्थ्य एवं आजीविका
    • आग के धुएँ से वायु प्रदूषण बढ़ता है जिसके कारण श्वसन संबंधी बीमारियाँ और 8 मिलियन समयपूर्व मृत्यु प्रति वर्ष होती हैं।
    • आग के कारण संपत्ति, आजीविका एवं मानव जीवन को नुकसान पहुंचता है, विशेष रूप से ग्रामीण व शहरी-जंगली क्षेत्रों में।
  • आर्थिक प्रभाव
    • आग से होने वाली क्षति यूरोप की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता है, जिसमें पुनर्जनन एवं पुनर्वास की लागत शामिल है।
    • वर्ष 2023 में यूरोप में 500,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि प्रभावित हुई जो साइप्रस के आकार का लगभग आधा है।
  • आग के मौसम का विस्तार
    • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सदी के अंत तक गंभीर आग की घटनाएँ 14% तक बढ़ सकती हैं और आग का मौसम एक सप्ताह तक लंबा हो सकता है।
    • दक्षिणी यूरोप में आग की संभावना दस गुना बढ़ सकती है जबकि मध्य एवं उत्तरी यूरोप भी सूखे के दौरान जोखिम में होंगे।
  • जलवायु प्रतिक्रिया चक्र
    • आग से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसें जलवायु परिवर्तन को अधिक तेज करती हैं जिससे एक खतरनाक प्रतिक्रिया चक्र (Feedback Loop) बनता है।
    • यह चक्र कार्बन भंडारण की क्षमता को कम करता है जिससे वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करना अधिक कठिन हो जाता है।

आगे की राह

  • निवारक उपायों पर ध्यान
    • संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों से आग के बाद प्रतिक्रिया के बजाय निवारक उपायों में निवेश करने का आग्रह किया है, जैसे कि गर्मियों से पहले नियंत्रित आग जलाना और आर्द्रभूमि/पीटलैंड का पुनर्जनन।
    • ‘फायर रेडी फॉर्मूला’ के तहत दो-तिहाई संसाधनों को योजना, रोकथाम, तैयारी एवं पुनर्वास पर खर्च करना चाहिए।
  • टिकाऊ वन प्रबंधन
    • वनस्पति घनत्व, संरचना एवं प्रजातियों के प्रकार को प्रबंधित करने के लिए जलवायु-स्मार्ट वन प्रबंधन को अपनाना।
    • नियमित रूप से सूखी वनस्पति, मृत वृक्षों एवं झाड़ियों को साफ करने से आग के प्रसार के लिए ईंधन कम हो।
  • उन्नत निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी
    • उपग्रह इमेजिंग एवं ड्रोन जैसे उन्नत तकनीकों का उपयोग करके आग का जल्दी पता लगाना और त्वरित प्रतिक्रिया देना।
    • यूरोपीय वन आग सूचना प्रणाली (EFFIS) को मजबूत करना, जो 43 देशों के बीच आग की जानकारी साझा करती है।
  • जल प्रबंधन में सुधार
    • छोटी नदियों, दलदलों एवं बाढ़ के मैदानों का पुनर्जनन करके मिट्टी की नमी को बनाए रखना
    • सूखे से निपटने के लिए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन
  • समुदाय की भागीदारी एवं जागरूकता
    • ग्रामीण समुदायों को वन प्रबंधन और आग रोकथाम गतिविधियों में शामिल करना
    • जन जागरूकता अभियान चलाकर मानवजनित आग (जैसे- आगजनी) को कम करना
  • नीतिगत और विधायी उपाय
    • यूरोपीय संघ की वन रणनीति 2030 और प्रकृति पुनर्जनन कानून (Nature Restoration Law) को लागू करना ताकि जंगलों की जलवायु लचीलापन क्षमता बढ़े।
    • एक पारदर्शी वन निगरानी ढांचा विकसित करना ताकि जंगलों की स्थिति और जलवायु प्रभावों का आकलन किया जा सके।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
    • कोयला, तेल एवं गैस के उपयोग को कम करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करना, जो जलवायु परिवर्तन को कम करेगा।
    • वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए पेरिस समझौते के लक्ष्यों का पालन करना।
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