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भारत में ऑनर किलिंग : एक सामाजिक चुनौती

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: सामाजिक सशक्तीकरण, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्मनिरपेक्षता; अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय)

संदर्भ

भारत में जाति-आधारित भेदभाव आज भी सामाजिक संरचना का गहरा हिस्सा है। जब कोई व्यक्ति या परिवार परंपरागत जातिगत ढाँचे को चुनौती देता है, तो कई बार यह हिंसक रूप ले लेता है। इनमें सबसे भयावह रूप है ऑनर किलिंग (Honour Killing), जिसमें परिवार या समुदाय अपनी तथाकथित ‘इज़्ज़त’ बचाने के नाम पर हत्या तक कर देता है।

क्या है ऑनर किलिंग 

  • ऑनर किलिंग वह अपराध है जिसमें परिवार या समुदाय किसी ऐसे व्यक्ति (अक्सर महिला) की हत्या कर देता है जिसने पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं विशेषकर जाति, धर्म या गोत्र के खिलाफ जाकर विवाह या संबंध बनाया हो।
  • यह अपराध मुख्यतः अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ा होता है।

प्रमुख कारक

  • जातिगत श्रेष्ठता और पितृसत्तात्मक मानसिकता
  • परिवार की ‘इज़्ज़त’ को समुदाय से जोड़कर देखना
  • सामाजिक दबाव और बिरादरी की राजनीति
  • महिला की पसंद और स्वतंत्रता को नियंत्रित करने की सोच

सामाजिक स्वीकार्यता एवं चुनौती

  • परिवार और समाज इसे ‘इज़्ज़त बचाने’ की कार्रवाई बताते हैं।
  • सोशल मीडिया और जातिगत संगठन कभी-कभी खुले या गुप्त रूप से इसे सही ठहराते हैं।
  • सामुदायिक दबाव इसे सामाजिक ‘कर्तव्य’ जैसा स्वरूप दे देता है।
  • ऐसी घटनाओं में वृद्धि इसलिए भी हो रही हैं क्योंकि यह केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समुदाय की मानसिकता से जुड़ा होता है।
  • जब दलित या पिछड़े वर्ग मुख्यधारा में बराबरी का स्थान हासिल करते हैं, तो यह प्रभुत्वशाली जातियों को चुनौती देता है।
  • यही चुनौती कई बार हिंसक प्रतिक्रिया के रूप में प्रकट होती है।

तमिलनाडु का जातिगत विरोधाभास

  • तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहाँ दलितों को अपेक्षाकृत अधिक शिक्षा और अवसर मिले हैं, वहाँ अंतरजातीय विवाह की दर राष्ट्रीय औसत (5%) से कहीं अधिक है।
  • यह सशक्तिकरण पारंपरिक जातिगत संरचना को चुनौती देता है, जिससे यहाँ ऑनर किलिंग की घटनाएँ भी अधिक दर्ज होती हैं।
  • विरोधाभास यह है कि तमिलनाडु में एक ओर सशक्त नागरिक समाज और जाति-विरोधी आंदोलन है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया और निजी दायरों में जाति गौरव का महिमामंडन भी देखने को मिलता है।

संबंधित नियम

  • अनुच्छेद 21: यह प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954: यह अंतरजातीय व अंतरधार्मिक विवाह को कानूनी मान्यता देता है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS): इसके अंतर्गत हत्या (धारा 103), आपराधिक साजिश (धारा 61(2)) और धारा 187 (अवैध सभा), धारा 188 (दंगा) एवं धारा 189 (संबंधित अपराध) के अंतर्गत सजा का प्रावधान है।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय

  • शक्ति वाहिनी बनाम भारत सरकार (2018) : सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि ऑनर किलिंग ‘शर्मनाक अपराध’ है और इसे किसी भी परिस्थिति में वैध नहीं ठहराया जा सकता है।
    • खाप पंचायतों द्वारा हस्तक्षेप पर रोक।
    • न्यायालय ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिए कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा और त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
  • लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2006): अंतर-जातीय विवाहों की सुरक्षा और स्वतंत्रता की पुष्टि।
  • अर्जुमंद अहमद बनाम उत्तराखंड सरकार (2019): व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विवाह के अधिकार पर जोर।

चुनौतियाँ

  • ग्रामीण इलाकों में जातिगत दबाव और खाप पंचायतों का प्रभाव
  • सामाजिक चेतना और शिक्षा की कमी
  • पीड़ितों और गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा का अभाव
  • कानूनों के क्रियान्वयन में लापरवाही और पुलिस का उदासीन रवैया

आगे की राह

  • सामाजिक जागरूकता औ शिक्षा के माध्यम से जातिगत सोच को बदलना
  • पीड़ितों को सुरक्षित आश्रय, हेल्पलाइन और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना
  • सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर जातिगत नफरत फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई
  • समुदाय आधारित संवाद और सहभागिता से समाज में स्वीकार्यता बढ़ाना
  • न्यायपालिका और पुलिस को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाना

निष्कर्ष

ऑनर किलिंग सिर्फ अपराध नहीं बल्कि सामाजिक मानसिकता का आईना है। इसे समाप्त करने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के भीतर गहरे स्तर पर मानसिकता और सांस्कृतिक बदलाव की आवश्यकता है।

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