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विश्व सर्प दिवस, 2025

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

16 जुलाई को राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नई दिल्ली ने विश्व सर्प दिवस (World Snake Day) के अवसर पर एक व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य सांपों (सर्प) के पारिस्थितिकीय महत्व के बारे में शिक्षित करना था।

विश्व सर्प दिवस के बारे में

  • परिचय : यह दिवस की शुरुआत 1970 के दशक में हुई है।
  • लक्ष्य : सांपों की 3,500 से अधिक प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, उनके पारिस्थितिक महत्व को उजागर करना और उनके संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयासों को प्रोत्साहित करना।

विश्व में सांपों की स्थिति

  • वैश्विक स्तर पर 3,789 से अधिक सांप प्रजातियाँ मौजूद हैं, जिनमें से केवल 600 (लगभग 25%) जहरीली हैं। केवल 200 प्रजातियाँ ही मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। 
  • सांप सभी महाद्वीपों (अंटार्कटिका को छोड़कर) और विभिन्न आवासों, जैसे- जंगलों, रेगिस्तानों एवं समुद्रों में पाए जाते हैं। 
  • हालाँकि, सांपों की वैश्विक आबादी में विगत 30 वर्षों में 60% से अधिक की गिरावट आई है और कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं। 

सांप का पारिस्थितिकीय महत्व

  • सांप पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे प्राकृतिक कीट नियंत्रक के रूप में कार्य करते हैं और चूहों, कीड़ों एवं अन्य छोटे जानवरों की आबादी को नियंत्रित करते हैं, जो फसल क्षति तथा बीमारियों के प्रसार को रोकता है। 
  • सांप पर्यावरणीय स्वास्थ्य के सूचक भी हैं और इनकी उपस्थिति एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है। 
  • इसके अलावा, सांपों का विष चिकित्सा अनुसंधान में महत्वपूर्ण है, जैसे- रक्तचाप की दवाओं और एंटीवेनम के विकास में। 

भारत में सांपों की स्थिति

  • प्रजातियाँ : भारत में 300 से अधिक सर्प प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें 60 से अधिक जहरीली हैं, जिनमें ‘बिग फोर’ (कॉमन करैत, इंडियन कोबरा, रसेल्स वाइपर एवं सॉ-स्केल्ड वाइपर) शामिल हैं। 
  • सांस्कृतिक महत्व : हिंदू पौराणिक कथाओं में सांपों को ‘नाग’ के रूप में पूजा जाता है और भगवान शिव के गले में सांप का प्रतीक शक्ति एवं पुनर्जनन का प्रतीक है।
  • स्नेकबाइट की समस्या : WHO के अनुसार, भारत में स्नेकबाइट के 90% मामले बिग फोर सांपों के कारण होते हैं। पिछले दो दशकों में भारत में 12 मिलियन स्नेकबाइट मौतें दर्ज की गई हैं।
  • संरक्षण प्रयास : वन्यजीव संगठन, जैसे- वाइल्डलाइफ SOS और ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल सांप के बचाव, पुनर्वास एवं जागरूकता अभियानों में सक्रिय हैं।
  • नई खोजें : पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी घाटों में कई नई प्रजातियों की खोज हो रही हैं किंतु समुद्री सांपों के बारे में जानकारी सीमित है।

प्रमुख खतरे 

  • आवास हानि : वनों की कटाई और शहरीकरण के कारण सांपों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं, विशेष रूप से वर्षावन-निर्भर प्रजातियों के लिए।
  • जलवायु परिवर्तन : तापमान और मौसम में परिवर्तन सांपों के आवास व शिकार की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं।
  • विरोध : भय व अंधविश्वास के कारण लोग गैर-जहरीले सांपों को भी मार देते हैं।
  • पालतू व्यापार : सांपों को पालतू जानवर के रूप में रखने के लिए जंगल से पकड़ा जाता है जिससे उनकी मृत्यु दर बढ़ती है (75% पालतू सांप एक वर्ष में मृत)
  • स्नेकबाइट : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्नेकबाइट को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग माना गया है, जो प्रतिवर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करता है।

आगे की राह

  • जागरूकता अभियान : स्कूलों, समुदायों और सोशल मीडिया के माध्यम से जागृति
  • संरक्षण प्रयास : सांप बचाव एवं पुनर्वास केंद्रों को बढ़ावा देना और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना
  • स्नेकबाइट रोकथाम : उचित प्राथमिक चिकित्सा और एंटीवेनम की उपलब्धता को बढ़ावा देना तथा मानव-सांप संघर्ष को कम करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना
  • अनुसंधान एवं वर्गीकरण : सांप प्रजातियों के अध्ययन के लिए अधिक वित्त पोषण और परमिट की सुविधा प्रदान करना
  • कानूनी संरक्षण : विदेशी पालतू व्यापार और अवैध शिकार पर सख्त कानून लागू करना
  • सामुदायिक भागीदारी : स्थानीय समुदायों को सांपों के महत्व एवं सुरक्षित व्यवहार के बारे में शिक्षित करना
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