New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

भारत की प्रथम जनजातीय जीनोम परियोजना

(प्राथमिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ

भारत में जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य सुधार और आनुवंशिक बीमारियों से निपटने के लिए गुजरात ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘जनजातीय जीनोम अनुक्रमण परियोजना’ (Tribal Genome Sequencing Project) के माध्यम से गुजरात देश का पहला राज्य बन गया है जो विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के लिए जीनोम अनुक्रमण पर केंद्रित है।

जनजातीय जीनोम परियोजना के बारे में

  • परिचय : यह परियोजना गुजरात सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसके तहत राज्य के 17 जिलों में रहने वाले 2,000 जनजातीय समुदाय के व्यक्तियों के जीनोम का अनुक्रमण किया जाएगा।
  • परियोजना का शीर्षक : Creation of Reference Genome Database for Tribal Population in Gujarat
  • कार्यान्वयन : गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) द्वारा कार्यान्वित
  • परिव्यय : यह परियोजना वित्त वर्ष 2025-26 के राज्य बजट का हिस्सा है।
  • उद्देश्य : आनुवंशिक स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करना और जनजातीय समुदायों के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य समाधान प्रदान करना।

जनजातीय जीनोम परियोजना की विशेषताएँ 

  • जीनोम अनुक्रमण का दायरा : इस परियोजना के तहत 17 जिलों के 2,000 जनजातीय व्यक्तियों के जीनोम का अनुक्रमण किया जाएगा।
  • आनुवंशिक बीमारियों पर ध्यान : सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया एवं कुछ वंशानुगत कैंसर जैसी आनुवंशिक बीमारियों की प्रारंभिक पहचान व लक्षित उपचार पर केंद्रित।
  • उन्नत तकनीक : नमूना संग्रह, अनुक्रमण एवं आनुवंशिक डाटा की व्याख्या के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जाएगा।
  • प्राकृतिक प्रतिरक्षा मार्कर : यह परियोजना प्राकृतिक प्रतिरक्षा से संबंधित आनुवंशिक मार्करों की पहचान करेगी, जो व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रोफाइल को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
  • वैज्ञानिक एवं परंपरागत संतुलन : यह परियोजना विज्ञान एवं जनजातीय परंपराओं के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी, जिससे समुदायों को सशक्त बनाया जा सके।

जनजातीय जीनोम परियोजना के लाभ

  • सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जैसी बीमारियों की जल्द पहचान से समय पर उपचार संभव होगा, जिससे मृत्यु दर व रुग्णता में कमी आएगी।
  • जीनोम डाटा के आधार पर व्यक्तिगत एवं समुदाय-विशिष्ट स्वास्थ्य समाधान विकसित किए जाएंगे, जो दवाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाएंगे।
  • यह परियोजना न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित है बल्कि जनजातीय समुदायों को उन्नत तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखती है।
  • यह परियोजना भारत की राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन और अन्य स्वास्थ्य नीतियों को मजबूत करेगी।
  • जनजातीय आबादी का जीनोम डाटा वैश्विक आनुवंशिक विविधता के अध्ययन में योगदान देगा, विशेष रूप से भारत की अनूठी आनुवंशिक संरचना को समझने में।

भारत के लिए महत्त्व

  • भारत में जनजातीय आबादी (लगभग 8.6% जनसंख्या) में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों का बोझ अधिक है। 
    • उदाहरण के लिए, गुजरात के धोडिया, दुबला, गमित एवं नायका जनजातियों में सिकल सेल जीन (HbS) की व्यापकता 13-31% है। 
  • दक्षिण गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं मध्य प्रदेश जैसे क्षेत्रों में हाल के वर्षों में नवजात स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू किए गए हैं किंतु व्यापक जीनोम डाटा की कमी एक चुनौती रही है। 
  • गुजरात की यह परियोजना इस कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो 2,000 व्यक्तियों के जीनोम अनुक्रमण के माध्यम से एक संदर्भ डाटाबेस बनाएगी। 
  • यह भारत में जनजातीय स्वास्थ्य के लिए पहली ऐसी परियोजना है जो अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR