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दक्षिण अफ्रीका की राइज़ोटोप परियोजना

चर्चा में क्यों ?

दक्षिण अफ्रीका के विटवाटरसैंड विश्वविद्यालय ने गैंडों के अवैध शिकार की रोकथाम के लिए एक अभिनव तकनीक विकसित की है।

प्रमुख बिंदु 

  • इस पहल के अंतर्गत गैंडे के सींगों में रेडियोधर्मी समस्थानिक का इंजेक्शन लगाया जाता है,ताकि उनकी तस्करी रोकी जा सके। 
  • यह 6 वर्षों के शोध का परिणाम है और इसे अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का समर्थन प्राप्त है।

परियोजना की शुरुआत: राइज़ोटोप प्रोजेक्ट

  • यह अभियान दक्षिण अफ्रीका के वाटरबर्ग बायोस्फीयर रिजर्व में प्रारंभ हुआ।
  • प्रारंभ में 5 गैंडों पर रेडियोधर्मी समस्थानिकों का परीक्षण किया गया।
  • इसके सफल परिणामों के बाद 20 गैंडों पर विस्तारित परीक्षण किए गए।
  • अब इसे पूरे देश में लागू करने की योजना है।

रेडियोधर्मी टैगिंग कैसे कार्य करती है ?

  • इस तकनीक में कम मात्रा में रेडियोधर्मी समस्थानिकों को सींगों के केराटिन ऊतक में इंजेक्ट किया जाता है।
  • यह एक गैर-आक्रामक प्रक्रिया है, जो गैंडे के स्वास्थ्य या व्यवहार को प्रभावित नहीं करती।
  • सींगों से उत्सर्जित विकिरण सीमा शुल्क विकिरण मॉनिटरों द्वारा आसानी से पता लगाया जा सकता है।
  • तस्करी के दौरान यदि कोई सींग ले जाया जाता है तो वह बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर तुरंत ट्रैक हो सकता है।

स्वास्थ्य और जैविक सुरक्षा परीक्षण

  • गेन्ट विश्वविद्यालय द्वारा गैंडों की स्वास्थ्य निगरानी की गई।
  • रिपोर्ट के अनुसार कोई कोशिकीय क्षति या जैविक विकृति नहीं पाई गई।
  • जैविक डोसिमेट्री और कोशिका विज्ञान परीक्षणों ने इसे पूर्णतः सुरक्षित घोषित किया।
  • रेडियोधर्मी टैगिंग से सींग मनुष्यों के लिए अनुपयोगी और विषाक्त बन जाते हैं, जिससे बाज़ार मूल्य गिरता है।

अवैध शिकार संकट: 

  • 20वीं सदी की शुरुआत में गैंडों की संख्या लगभग 5 लाख थी,जो अब घटकर केवल 27,000 रह गई है।
  • पिछले एक दशक में दक्षिण अफ्रीका में 10,000 से अधिक गैंडों का शिकार हो चुका है।
  • गैंडे के सींगों की भारी मांग एशियाई बाज़ारों (विशेषकर चीन और वियतनाम) में है, जहाँ इन्हें औषधीय और विलासिता की वस्तु माना जाता है।
  • रेडियोधर्मी टैगिंग इन सींगों को अवैध व्यापार के लिए अप्रिय बनाती है और इसका पता लगाया जा सकता है।

अन्य उपायों की तुलना में लाभ

उपाय

विशेषताएँ

सीमाएँ

सींग हटाना

शिकार को रोकने की एक पारंपरिक विधि

गैंडे के व्यवहार और सामाजिक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव

रेडियो टैगिंग

GPS आधारित निगरानी

सीमित भौगोलिक कवरेज

रेडियोधर्मी टैगिंग

अदृश्य, प्रभावी और सीमा पर पता लगाने योग्य

जनजागरूकता और तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता

प्रश्न. रेडियोधर्मी टैगिंग तकनीक का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

(a) गैंडों के स्वास्थ्य की निगरानी

(b) गैंडों की प्रजनन दर बढ़ाना

(c) गैंडों के सींगों की तस्करी को रोकना

(d) गैंडों को GPS से ट्रैक करना

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