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गोपीनाथ बोरदोलोई

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के नागांव जिले में श्रीमंत शंकरदेव अविर्भाव क्षेत्र का उद्घाटन किया और ‘गोपीनाथ बोरदोलोई’ को याद किया।

गोपीनाथ बोरदोलोई के बारे में 

  • जीवनकाल : 10 जून, 1890 से 5 अगस्त, 1950 तक 
  • जन्मस्थान : असम के नागांव के राहा में 
  • पिता : बुद्धेश्वर बोरदोलोई 
  • माता : प्रनेश्वरी बोरोदोलोई 
    • इनके ब्राह्मण पूर्वज उत्तर प्रदेश से जाकर असम में बस गए थे।
  • उपनाम : आधुनिक असम का निर्माता, शेर-ए-असम, लोकप्रिय 

स्वतंत्रता आन्दोलन में भागीदारी 

  • इन्होंने राष्ट्रीय आन्दोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था। 1941 ई. में ‘व्यक्तिगत सत्याग्रह’ में भाग लेने के कारण इन्हें कारावास जाना पड़ा था। वर्ष 1942 ई. में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में भागीदारी के कारण गोपीनाथ बोरदोलाई को पुन: सज़ा हुई। 
  • वे 19 सितंबर, 1938 से 17 नवंबर, 1939 तक असम के मुख्यमंत्री रहे। वे असम के पहले मुख्यमंत्री थे। उन्होंने असम की आधुनिक पहचान की नींव रखी। वे महात्मा गांधी के आदर्शों व अहिंसावादी सिद्धांतों को मानने वाले थे। उन्होंने लोगों के अधिकारों एवं कल्याण के लिए लगातार संघर्ष किया। 
  • उनका बड़ा योगदान कैबिनेट मिशन योजना का विरोध था जिसके तहत मुस्लिम लीग पूर्वोत्तर को भारत से अलग करना चाहता था। गोपीनाथ ने महात्मा गांधी का सहयोग मांगा और अहिंसक आंदोलन की शुरुआत की। वह लगातार इस कोशिश में जुटे रहे कि असम भारत का हिस्सा रहे। 
  • गोपीनाथ को मरणोपरांत सन् 1999 में भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। असम के राज्यपाल रह चुके जयराम दास ने उन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि दी थी।

इसे भी जानिए!

कुछ दिनों पूर्व ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। यह भारत का पहला प्रकृति थीम वाला हवाई अड्डा टर्मिनल है जो ‘बांस के बाग’ की थीम पर आधारित है।

बोरदोलोई समिति

  • गोपीनाथ बोरदोलोई समिति संविधान सभा की एक उप-समिति थी, जिसने ‘स्वायत्त ज़िला परिषदों’ के माध्यम से ‘स्व-शासन’ के द्वारा पूर्वोत्तर में आदिवासी समूहों की विशिष्ट पहचान, संस्कृति एवं जीवन-शैली को संरक्षित करने के लिये संस्तुति की थी। 
  • असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की अध्यक्षता वाली एक उप-समिति ने नेफा (असम के तहत) के प्रशासन के संबंध में कुछ सिफारिशें कीं। इसकी रिपोर्ट वर्ष 1951 में प्रस्तुत की गई।
  • बोरदोलोई समिति की रिपोर्ट के आधार पर अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन नेफा) से लगभग 3,648 वर्ग किमी. बालीपारा और सादिया तलहटी (Foothill) के समतल क्षेत्र को असम के तत्कालीन दरांग एवं लखीमपुर ज़िलों में मिला दिया था।
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