New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

चेन्नाकेशव मंदिर

प्रधानमंत्री के नए कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ की वास्तुकला 12वीं शताब्दी के चेन्नाकेशव मंदिर की विशिष्टताओं से प्रेरित होकर भारतीय स्थापत्य परंपरा में तैयार की गई है। 

चेन्नाकेशव मंदिर का परिचय 

  • बेलूर के चेन्नाकेशव मंदिर को केशव या विजयनारायण मंदिर भी कहा जाता है जोकि कर्नाटक में स्थित 12वीं सदी का एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।
  • मंदिर का निर्माण राजा विष्णुवर्धन ने 1117 ईस्वी में शुरू किया था, जो तलक्कड़ के महान युद्ध (1116 ईस्वी) में चोलों पर बड़ी सैन्य विजय के बाद यागाची नदी के किनारे बेलूर में करवाया गया था। इस क्षेत्र को पहले वेलापुरा के नाम से जाना जाता था।
  • मंदिर का निर्माण तीन पीढ़ियों में हुआ और इसे पूरा होने में लगभग 103 वर्ष लगे। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी सूचीबद्ध है। 

चेन्नाकेशव मंदिर की वास्तुकला 

  • मंदिर होयसला स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। होयसला जनजाति अपने निर्माण कार्य में मुलायम सोपस्टोन का प्रयोग करती थी, जो जटिल नक्काशी के लिए उपयुक्त था। 
  • इसे गोपुरा वाले प्राकार से घेरा गया है। यह एक चबूतरे (जगती) पर स्थित है और आकार में विशाल ताबूत जैसा प्रतीत होता है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर जटिल नक्काशी की गई है जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं और पौराणिक जीवों को दर्शाया गया है।
  • इसमें लगभग 80 मदनिका मूर्तियाँ हैं जो नृत्य, शिकार या पेड़ की छतरी के नीचे खड़े होने जैसी स्थितियों को दर्शाती हैं। मंदिर परिसर की एक अनूठी विशेषता सीढ़ीदार कुआँ है जो स्थापत्य में नवाचार का उदाहरण प्रस्तुत करता है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR