New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th Sept. 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th Sept. 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

धूमकेतु पी12/पोंस-ब्रूक्स (Comet P12/Ponce-Brookes)

प्रारम्भिक परीक्षा – धूमकेतु पी12/पोंस-ब्रूक्स
मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन, पेपर-1

चर्चा में क्यों 

  • भारत के हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप द्वारा 3,50,000 किमी आकार में फैले धूमकेतु को देखा गया है।

hct

प्रमुख बिंदु  

  • हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (एचसीटी) के द्वारा धूमकेतु पी12/पोंस-ब्रूक्स की तस्वीर खींची गई है, जिसका उपनाम 'डेविल धूमकेतु' दिया गया है तथा इसकी  तुलना 'मिलेनियम फाल्कन' से की गई है।

धूमकेतु पी12/पोंस-ब्रूक्स

  • इस धूमकेतु को वर्ष 1812 में पहली बार खोजा गया था। यह धूमकेतु 71 वर्ष में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। 
  • इस धूमकेतु में गैस और धूल के कई विस्फोटों के कारण इसकी चमक बढ़ गई है।
  • आकाश में धूमकेतु की तीव्र गति के कारण, तारे प्रत्येक एक्सपोज़र में विस्थापित दिखाई देते हैं ।
  • गोलाकार प्रभामंडल के रूप में दिखाई देने वाला धूमकेतु का वातावरण 3,50,000 किलोमीटर व्यास में विस्तृत है, जो हमारे सौर मंडल के इन प्राचीन पथिकों की गतिशील और अस्थिर प्रकृति का प्रमाण है।
  • आईआईए के एक खगोलशास्त्री मार्गरीटा सफोनोवा के अनुसार, इस धूमकेतु में जुलाई के बाद से, चार महत्वपूर्ण विस्फोट हुए हैं, जिससे धूमकेतु लगभग सौ गुना चमकीला हो गया है।इस धूमकेतु में हाल ही में 14 नवंबर 2023 को विस्फोट हुआ।
  • धूमकेतु पी12/पोंस-ब्रूक्स 21 अप्रैल, 2024 को सूर्य के सबसे निकट तथा 2 जून, 2024 को पृथ्वी के सबसे निकट होगा। 
  • जिस समय यह धूमकेतु पृथ्वी और सूर्य के सबसे निकट होगा उस समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का केवल 1.5 गुना होगी, जिससे यह संभावित रूप से नग्न आंखों या दूरबीन या छोटी दूरबीनों के माध्यम से दिखाई देगा।

हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) :- 

  • इस टेलीस्कोप को 4500 मीटर (15000 फीट) की ऊंचाई पर भारतीय खगोलीय वेधशाला (IAO)द्वारा माउंट सरस्वती, दिग्पा-रत्सा री पर हानले (लद्दाख) में स्थापित किया गया है। 
  • इस टेलीस्कोप का नाम नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रमण्यम चन्द्रशेखर के नाम पर हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप रखा गया है।
  • हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) 2-मीटर व्यास का है, जिसे भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु द्वारा संचालित किया जाता है।
  • यह टेलीस्कोप ऑप्टिकल, इन्फ्रारेड और गामा-रे दूरबीनों के लिए दुनिया की सबसे ऊंची स्थित साइटों में से एक है। 
  • भारतीय खगोलीय वेधशाला (IAO), भारत का पहला डार्क-स्काई संरक्षित क्षेत्र है। 

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न:- धूमकेतु पी12/पोंस-ब्रूक्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 

  1. इस धूमकेतु को हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) के द्वारा देखा गया है। जिसका उपनाम 'डेविल धूमकेतु' दिया गया है।
  2. इस धूमकेतु को वर्ष 1812 में पहली बार देखा गया था। 
  3. यह धूमकेतु 71 वर्ष में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। 

उपर्युक्त में से कितने सही हैं?

(a) केवल एक

(b) केवल दो

(c) सभी तीन

(d) कोई भी नहीं

उत्तर - (c)

मुख्य परीक्षा प्रश्न:- धूमकेतु क्या होता है? व्याख्या कीजिए।  

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR