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पाठ्यपुस्तकों पर कॉपीराइट का दावा

चर्चा में क्यों?

हाल ही में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि, “गणितीय समीकरणों और विज्ञान विषयों से संबंधित पाठ्यपुस्तकें कॉपीराइट कानून के तहत नहीं आती हैं, क्योंकि उनकी सामग्री प्रकृति में गैर-साहित्यिक है”

कॉपीराइट क्या है? 

  • कॉपीराइट का तात्पर्य साहित्यिक, नाटकीय, संगीतमय और कलात्मक कार्यों के रचनाकारों व सिनेमैटोग्राफ फिल्मों तथा ध्वनि रिकॉर्डिंग के निर्माताओं को कानून द्वारा दिए गए अधिकार से है।
  • कॉपीराइट अधिकारों में पुनरुत्पादन, जनता से संचार, अनुकूलन और किसी कार्य के अनुवाद के अधिकार शामिल हैं। 
  • कॉपीराइट अधिनियम, 1957 का उद्देश्य रचनाकार की बौद्धिक संपदा माने जाने वाले रचनात्मक कार्यों की सुरक्षा करना है।

उल्लंघन

  • किसी कॉपीराइट स्वामी के अनुमति के बिना उसके द्वारा किए गए किसी कार्य के एक संतोषजनक हिस्से का उपयोग किया जाता है तो उसे कॉपीराइट का "उल्लंघन" माना जाएगा। 
  • उल्लंघन के मामलों में, कॉपीराइट स्वामी कानूनी कार्रवाई कर सकता है और निषेधाज्ञा व क्षतिपूर्ति जैसे उपचार का हकदार होता है।

क्या पाठ्यपुस्तकों पर कभी कॉपीराइट हो सकता है?

  • हाल ही में, सरकार की सलाहकार संस्था, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी शैक्षिक सामग्रियों के कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ चेतावनी जारी किया था।
  • हालाँकि, 'चांसलर मास्टर्स एंड स्कॉलर्स ऑफ द यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड बनाम नरेंद्र पब्लिशिंग हाउस' (2008) में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि, “गणितीय प्रश्न प्रकृति के नियमों की अभिव्यक्ति हैं। ऐसे कानूनों की खोज उन लोगों को एकाधिकार प्रदान नहीं कर सकती जो इसका वर्णन करते हैं। इसका कारण यह है कि भाषा एक सीमित माध्यम है, जो केवल कुछ तरीकों से प्रकृति के ऐसे नियमों का वर्णन करने में सक्षम बनाती है” ।
  • वर्ष 2008 में ही 'ईस्टर्न बुक कंपनी बनाम डी.बी.' मोदक  मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि, “पहले से मौजूद डेटा के चयन, समन्वय या व्यवस्था के आधार पर निर्मित चरित्र में कुछ अलग काम को शब्दशः पुनरुत्पादन के बजाय मूल माना जाना चाहिए” ।
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