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ग्रेटर टिपरालैंड की मांग

प्रारंभिक परीक्षा – ग्रेटर टिपरालैंड

सन्दर्भ 

  • त्रिपुरा में एक राजनीतिक दल, तिपरा स्वदेशी प्रगतिशील क्षेत्रीय गठबंधन (TIPRA) मोथा द्वारा ग्रेटर टिपरालैंड की मांग की जा रही है।
  • टिपरा मोथा नें एक विजन डॉक्यूमेंट जारी किया, जिसमें कहा गया कि वह भारत के संविधान के अनुसार त्रिपुरा के स्वदेशी लोगों के अधिकारों को कायम रखने के लिए एक स्थायी समाधान की मांग करने के लिए प्रतिबद्ध है। 
    • इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 2 और 3 के तहत त्रिपुरा की 19 स्वदेशी जनजातियों के लिए एक नया राज्य बनाना है।

ग्रेटर टिपरालैंड

tripura

  • ग्रेटर टिपरालैंड, टिपरा मोथा की मुख्य वैचारिक मांग है।
  • सबसे पहले 2000 में गठित इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) ने टिपरालैंड की मांग की थी। 
  •  ग्रेटर टिपरालैंड, इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) द्वारा त्रिपुरा के आदिवासियों के लिये एक पृथक राज्य के रूप में टिपरालैंड की माँग का ही विस्तार है।
  • प्रस्तावित मॉडल की प्रमुख माँग ‘त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त ज़िला परिषद’ (TTAADC) के बाहर स्वदेशी क्षेत्र या गाँव में रहने वाले प्रत्येक आदिवासी व्यक्ति को शामिल करना है। 
  • ग्रेटर टिपरालैंड सिर्फ त्रिपुरा के आदिवासी परिषद के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है।
  • यह भारत के विभिन्न राज्यों जैसे असम, मिजोरम आदि में फैले त्रिपुरी (त्रिपुरा के मूल निवासी) को भी शामिल करता है।
  • त्रिपुरी (जिन्हें टिपरा, टिपरासा, ट्विप्रा के नाम से भी जाना जाता है) त्रिपुरा का मूल नृजातीय समूह है।
  • इसमें बंदरबन, चटगाँव, खगराचारी और पड़ोसी बांग्लादेश के अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं।

ग्रेटर टिपरालैंड की मांग के कारण 

  • 1941 की जनगणना के अनुसार, त्रिपुरा में आदिवासियों और गैर-आदिवासियों की जनसंख्या का अनुपात लगभग 50:50 था। 
  • हालांकि, अगली जनगणना के अनुसार, पूर्वी पाकिस्तान से शरणार्थियों के भारी प्रवाह के कारण जनजातीय आबादी 37% से से भी कम हो गई। 
  • 1950 और 1952 के बीच, लगभग 1.5 लाख शरणार्थियों ने आश्रय के लिए त्रिपुरा में प्रवेश किया था। 
  • शरणार्थियों की बाढ़ ने मतभेदों को जन्म दिया और अंततः आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच संघर्ष 1980 में बढ़ गया और इसने सशस्त्र विद्रोह का रूप ले लिया। 
  • इस समय के दौरान स्वायत्त क्षेत्रों या अलग राज्य की मांग संप्रभुता और स्वतंत्रता के रूप में बदल गई।
  • त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTADC) के साथ होने वाला कथित भेदभाव भी ग्रेटर टिपरालैंड की मांग का एक प्रमुख कारण है।
  • TTADC को राज्य के बजट का दो प्रतिशत प्राप्त होता है, जबकि इसमें राज्य की 40% आबादी रहती है।
    • TTADC का गठन 1985 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत किया गया था।
    • इसका उद्देश्य विकास सुनिश्चित करना और जनजातीय समुदायों के अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करना है।
    • इसके पास विधायी और कार्यकारी शक्तियाँ हैं और यह राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से को कवर करता है।
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