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गंगा एवं यमुना के लिए सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएँ

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

हाल ही में, नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में पाँच सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू होना विभिन्न राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण एवं नदी पुनर्जीवन प्रयासों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम है।

संबंधित प्रमुख बिंदु

  • इस वित्त वर्ष के दौरान अब तक 9 परियोजनाओं को चालू किया जा चुका है जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज उपचार क्षमता में सुधार हुआ है। दूसरी तिमाही तक, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड), मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), महेशतला (पश्चिम बंगाल) और जंगीपुर (पश्चिम बंगाल) में परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।
  • इन पांच परियोजनाओं के चालू होने के साथ ही नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत चालू की गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 3,976 एमएलडी तक पहुंच गई है जबकि चालू किए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कुल संख्या अब 173 हो गई है। 
  • ये उपलब्धियां नदियों में बिना शोधन के सीवेज के प्रवाह को रोकने और शहरी स्वच्छता सुविधा के ढांचे को बेहतर बनाने के मिशन के मुख्य उद्देश्य को मजबूती प्रदान करती हैं।

योजनाओं का विवरण 

शुक्लागंज (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के उन्नाव स्थित शुक्लागंज में 65 करोड़ रुपए की लागत से विकसित 5 एम.एल.डी. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन शुरू हो गया है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत लागू इस परियोजना में सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक का उपयोग किया गया है। 

आगरा (उत्तर प्रदेश) 

  • उत्तर प्रदेश का आगरा यमुना बेसिन का एक महत्वपूर्ण शहर है। यहाँ प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत आगरा परियोजना के तहत तीसरी तिमाही में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू किए गए हैं। 842 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत इस परियोजना में कुल 13 एस.टी.पी. के जरिए 177.6 एमएलडी की संयुक्त क्षमता विकसित की गई है। 
  • यह परियोजना एस.बी.आर. तकनीकी का उपयोग करते हुए एच.ए.एम. मॉडल पर आधारित है। इसके माध्यम से लगभग 25 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, यमुना नदी में अनुपचारित सीवेज का प्रवाह काफी हद तक कम होगा और शहर की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) 

वाराणसी शहर में अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी की क्षमता वाला एक एसटीपी संचालन में आया है। इस परियोजना को 308 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति दी गई है। एस.बी.आर. तकनीक पर आधारित व डी.बी.ओ.टी. मॉडल के तहत तैयार की गई यह परियोजना करीब 18 लाख लोगों की आबादी को सेवा प्रदान करेगी। 

बैरकपुर (पश्चिम बंगाल) 

  • पश्चिम बंगाल के उत्तर बैरकपुर में तीसरी तिमाही के दौरान 154 करोड़ रुपए की स्वीकृत परियोजना के तहत 30 एम.एल.डी. क्षमता वाला एक एस.टी.पी. (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) शुरू किया गया है। 
  • यह परियोजना दो एस.टी.पी. की कुल नियोजित क्षमता 38 एम.एल.डी. में से एक है। एच..एम. मॉडल पर आधारित इस परियोजना को एन.जी.टी. के मानकों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। 

कंकरबाग (बिहार)

बिहार में पटना के कंकरबाग स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही तक इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 एम.एल.डी. कर दी गई है। इससे शहर के सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक मजबूती मिलेगी जिससे गंगा नदी के तटों पर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा। 

नमामि गंगे कार्यक्रम के बारे में 

  • यह एक एकीकृत संरक्षण मिशन है जिसे जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लैगशिप कार्यक्रम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था। इसका बजट परिव्यय 20,000 करोड़ रुपए है।
  • इसका उद्देश्य राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण में प्रभावी कमी, संरक्षण एवं पुनरुद्धार के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करना है। 

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन

  • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, गंगा पुनरुद्धार के लिए विश्व भर में उपलब्ध सर्वोत्तम ज्ञान व संसाधनों का उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। 
  • स्वच्छ गंगा नदी पुनरुद्धार में विशेषज्ञता रखने वाले कई अंतरराष्ट्रीय देशों के लिए यह एक सदाबहार आकर्षण रहा है। ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फिनलैंड, इजरायल आदि देशों ने गंगा पुनरुद्धार के लिए भारत के साथ सहयोग करने में रुचि दिखाई है।
  • सरकारी योजनाओं के समन्वय के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, जैसे- मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। 
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