(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय) |
संदर्भ
हाल ही में, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने घोषणा की कि आयोग द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की परीक्षा केंद्रों पर चेहरे की पहचान के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।
पायलट परियोजना के बाद फैसला
- इससे पहले सितंबर 2025 में यू.पी.एस.सी. ने दो परीक्षाओं के दौरान उम्मीदवारों के त्वरित एवं सुरक्षित सत्यापन के लिए एआई-आधारित चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक का पायलट परीक्षण किया था। यह पायलट प्रोजेक्ट राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के सहयोग से संचालित किया गया।
- इस पहल का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को अधिक मजबूत करना तथा परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाना है। इस प्रणाली के लागू होने से सत्यापन का समय घटकर औसतन केवल 8–10 सेकंड प्रति उम्मीदवार रह गया, जिससे न केवल प्रवेश प्रक्रिया तेज हुई बल्कि सुरक्षा का एक अतिरिक्त स्तर भी जुड़ गया।
बायोमेट्रिक सत्यापन की योजना
- 10 जुलाई, 2025 को यू.पी.एस.सी. ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) से एक नई निविदा जारी की थी, जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक विवरणों का मिलान और क्रॉस-वेरिफिकेशन करना था, ताकि धोखाधड़ी, जालसाजी, अनुचित साधनों व प्रतिरूपण की घटनाओं को रोका जा सके।
- दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया था कि आयोग आधार-आधारित फिंगरप्रिंट प्रमाणीकरण (या डिजिटल फिंगरप्रिंट कैप्चरिंग), चेहरे की पहचान तकनीक और ई-एडमिट कार्ड पर दिए गए क्यूआर कोड की स्कैनिंग को शामिल करने की योजना बना रहा है।
आवश्यकता का कारण
- यह कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं जब नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े विवाद और आई.ए.एस. परिवीक्षाधीन पूजा खेड़कर के मामले के कारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे।
- सुश्री खेड़कर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन के लिए पहचान संबंधी दस्तावेजों और दिव्यांग (PwBD) प्रमाण-पत्र को जाली रूप से प्रस्तुत करने का आरोप है। हालांकि, सेवा आवंटन का निर्णय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा किया जाता है।
- यू.पी.एस.सी. ने सुश्री खेड़कर के विरुद्ध यह आरोप लगाते हुए आपराधिक मामला दर्ज किया है कि उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2022 में निर्धारित सीमा से अधिक प्रयास प्राप्त करने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।
- इसके अलावा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2024 के आयोजन में सामने आई कई अनियमितताओं के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
- इसी क्रम में वर्ष 2024 में सिविल सेवा परीक्षा के नियमों में संशोधन किया गया। इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा के चरण में ही शैक्षिक योग्यता, जाति एवं शारीरिक विकलांगता से संबंधित प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया, जबकि पहले यह प्रक्रिया मुख्य परीक्षा में चयन के बाद की जाती थी।
संघ लोक सेवा आयोग के बारे में
- भारत सरकार अधिनियम, 1919 की धारा 96 (c) के प्रावधानों के तहत भारत में पहली बार लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्तूबर, 1926 को की गई।
- इसमें अध्यक्ष के अतिरिक्त 4 सदस्य भी थे। यूनाइटिड किंगडम के गृह सिविल सेवा के एक सदस्य ‘सर रॉस बार्कर’ आयोग के प्रथम अध्यक्ष बने।
- भारत सरकार अधिनियम, 1935 में फेडरेशन के लिए लोक सेवा आयोग तथा प्रत्येक प्रांत अथवा प्रांतों के समूहों के लिए प्रांतीय लोक सेवा आयोग पर विचार किया गया। अतः, भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1937 से प्रभावी होने के साथ ही लोक सेवा आयोग, फेडरल लोक सेवा आयोग बन गया।
- 26 जनवरी, 1950 को भारत के संविधान के प्रारंभ के साथ ही संविधान के अनुच्छेद 378 के खंड (1) के आधार पर फेडरल लोक सेवा आयोग, संघ लोक सेवा आयोग के रूप में पहचाना जाने लगा तथा फेडरल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य बन गए।
आयोग के कार्य
संविधान के अनुच्छेद 320 के अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ सिविल सेवाओं तथा पदों के लिए भर्ती संबंधी सभी मामलों में आयोग का परामर्श लिया जाना अनिवार्य होता है। संविधान के अनुच्छेद 320 के अंतर्गत आयोग के प्रकार्य इस प्रकार हैं:
- संघ के लिए सेवाओं में नियुक्ति हेतु परीक्षा आयोजित करना
- साक्षात्कार द्वारा चयन से सीधी भर्ती करना
- प्रोन्नति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा अधिकारियों की नियुक्ति करना
- सरकार के अधीन विभिन्न सेवाओं तथा पदों के लिए भर्ती नियम तैयार करना तथा उनमें संशोधन करना
- विभिन्न सिविल सेवाओं से संबंधित अनुशासनिक मामले
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोग को प्रेषित किसी भी मामले में सरकार को परामर्श देना
- यू.पी.एस.सी. देशभर में लगभग 180 शहरों के 3,000 से अधिक स्थानों पर 14 प्रमुख परीक्षाओं के साथ-साथ कई भर्ती परीक्षाएँ एवं साक्षात्कार आयोजित करता है जिनमें कुल मिलाकर लगभग 12 लाख उम्मीदवार भाग लेते हैं।