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कर्मचारी पेंशन योजना

(प्रारंभिक परीक्षा के लिए - कर्मचारी पेंशन योजना, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन)
(मुख्य परीक्षा के लिए, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र:2 – न्यायपालिका, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ 

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में, कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014 के प्रावधानों को कानूनी और वैध माना है।

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय के तहत पेंशन कोष में शामिल होने के लिए 15,000 रुपये मासिक वेतन की सीमा को रद्द कर दिया।
    • वर्ष  2014 के संशोधन के द्वारा अधिकतम पेंशन योग्य वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर) की सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय की गयी थी, संशोधन से पहले, अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 6,500 रुपये प्रति माह था।
  • सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ऐसे पात्र कर्मचारी, जो अंतिम तिथि तक योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें एक अतिरिक्त मौका दिया जाना चाहिए, क्योंकि केरल, राजस्थान और दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पारित फैसलों में इस मुद्दे पर स्पष्टता का अभाव था।
    • ऐसे पात्र कर्मचारियों को इस योजना में शामिल होने के लिए 4 महीने का समय दिया गया।
  • कोर्ट ने पेंशन योजना में 2014 के संसोधन द्वारा शामिल की गयी, इस शर्त को अमान्य करार दिया, कि कर्मचारियों को 15,000 रुपये से अधिक के वेतन पर 1.16 प्रतिशत का अतिरिक्त योगदान देना होगा।
    • हालांकि फैसले के इस हिस्से को छह महीने के लिए निलंबित रखा जाएगा, ताकि अधिकारी कोष एकत्र कर सकें।
  • अदालत ने, अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग उन पात्र कर्मचारियों को अनुमति देने के लिए किया, जिन्होंने 2014 के संशोधनों से पहले ईपीएफओ पेंशन कवरेज में वृद्धि का विकल्प नहीं चुना था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा, कि जो कर्मचारी 1 सितंबर, 2014 को संशोधन लागू होने से पहले सेवानिवृत्त हो गए थे और उन्होंने इस योजना में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना था, उन्हें इस निर्णय के बाद भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS)

  • इस योजना को 1995 में शुरू किया गया था, इसका संचालन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा किया जाता है।
  • यह योजना 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के बाद संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये पेंशन का प्रावधान करती है।
  • इस योजना के अंतर्गत केवल वही कर्मचारी पात्र होते हैं, जिन्होंने कम से कम 10 वर्ष तक नौकरी की हो।
  • वे कर्मचारी जो EPF के सदस्य है, स्वतः ही कर्मचारी पेंशन योजना के सदस्य बन जाते है।
  • नियोक्ता और कर्मचारी दोनों ही कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना में कर्मचारी के मासिक वेतन (मूल वेतन और महँगाई भत्ता) के 12% का योगदान करते हैं।
    • कर्मचारियों के मूल वेतन का 12% हिस्सा भविष्य निधि में जाता है, जबकि नियोक्ता के 12% हिस्से में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है, इस पेंशन कोष में सरकार की ओर से भी 1.16% का योगदान किया जाता है। 
  • इस योजना के अंतर्गत कर्मचारी को आजीवन पेंशन मिलती है, और उसकी मृत्यु पर उसके परिवार के सदस्य पेंशन के लिए पात्र  होते है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)

  • 1952 में कर्मचारी भविष्य निधि और प्रावधान अधिनियम 1952, के अन्तर्गत इस संगठन की स्थापना की गयी।
  • यह सदस्य कर्मचारियों की भविष्य निधि और पेंशन खातों का प्रबंधन करता है।
  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के प्रबन्धकों में केन्द्रीय न्यासी मण्डल, भारत सरकार और राज्य सरकार के प्रतिनिधि तथा नियोक्ता और कर्मचारी शामिल होते है।
  • भारत के केन्द्रीय श्रम मन्त्री इस संगठन के अध्यक्ष होते है।
  • यह कर्मचारी भविष्य निधि और प्रावधान अधिनियम, 1952 को लागू करता है, जो कारखानों और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिये भविष्य निधि संस्थान के रूप में कार्य करता है।
  • EPFO ग्राहकों और किए गए वित्तीय लेनदेन की मात्रा के मामले में विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है।
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