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आर्सेनिक की सीमित मात्रा भी खतरनाक

प्रारम्भिक परीक्षा : सामान्य विज्ञान
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 –विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। 

संदर्भ:

आर्सेनिक की सीमित मात्रा भी खतरनाक

आर्सेनिक की सीमित मात्रा भी बोध क्षमता को प्रभावित सकती है: अध्ययन

  • भारत में भूजल में उच्च स्तर के आर्सेनिक का मिलना कोई नई बात नहीं है जो इससे संबंधित कई बीमारियों का कारण है। पर हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि आर्सेनिक की सीमित मात्रा भी बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों की बोध क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
  • पूरे भारत के पांच क्षेत्रों से 1,014 प्रतिभागियों के साथ शोध करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे मस्तिष्क के ग्रे मैटर में कमी आई और बच्चों और युवा वयस्कों की एकाग्रता प्रभावित हुई। यह अध्ययन विज्ञान क्षेत्र की पत्रिका‘जामा नेटवर्क ओपन’ के नवीनतम अंक में प्रकाशित हुआ है।
  • एक अन्य अध्ययन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) और किंग्स कॉलेज, लंदन के नेतृत्व में अपनी तरह के पहले अध्ययन में आर्सेनिक के बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों के मस्तिष्क कार्यों को प्रभावित करने की चिंताजनक संभावना का संकेत दिया गया है।
  • इस अध्ययन में पाया गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित सीमा से काफी नीचे आर्सेनिक के संपर्क में आने से भी 6-23 आयु वर्ग के लोगों के मस्तिष्क की संरचना में "बदलाव" हो सकता है और संज्ञानात्मक क्षमताओं में कमी आ सकती है, जिससे वे इसके प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
  • अध्ययन में पाया गया कि निचले स्तर के आर्सेनिक के संपर्क में आने का प्रभाव सिंधु, गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदियों, मेकांग जैसी बड़े नदी नेटवर्क के बाढ़ के मैदानों और डेल्टाओं में रहने वाले लोगों तक ही सीमित नहीं है जिनमें से सभी की उत्पत्ति हिमालय की आर्सेनिक युक्तचट्टानों से हुई हैबल्कि बेंगलुरु जैसे दूर-दराज के शहरों में भी इसकी उपस्थितिपाई गई है।
  • अध्ययन, 'द कंसोर्टियम ऑन वल्नेरेबिलिटी टू एक्सटर्नलाइजिंग डिसऑर्डर एंड एडिक्शन (cVEDA)', भारत भर के सात केंद्रों में 9,000 से अधिक बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों का एक बहु-क्षेत्रीय, जनसंख्या-आधारित समूह अध्ययन था। यह पाया गया कि आयु वर्ग (छह से 23 वर्ष) के दौरान डब्ल्यूएचओ की स्वीकृत सीमा से बहुत कम आर्सेनिक भीमस्तिष्क संरचना और कार्य के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है और मानव सीज़ोफ्रेनिया, द्विध्रुवीय विकार आदि जैसे मानसिक बीमारियों की चपेट में आ सकता है। 

आर्सेनिक क्या है?

  • आर्सेनिक (As) एक गंधहीन और स्वादहीन उपधातु है जो ज़मीन की सतह के नीचे प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रसायन-विज्ञान की पीरियोडिक टेबल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, एंटीमनी और बिस्मथ सहित ग्रुप VA का सदस्य है। इसका परमाणु क्रमांक (एटोमिक नंबर) 33 है और परमाणु भार (एटोमिक मास) 74.91 है।

प्रकृति में आर्सेनिक किन-किन रूपों में उपलब्ध है?

  • आर्सेनिक और इसके यौगिक रवेदार (क्रिस्टेलाइन), पाउडर और एमोरफस या काँच जैसी अवस्था में पाये जाते हैं। यह सामान्यतः चट्टान, मिट्टी, पानी और वायु में काफी मात्रा में पाया जाता है। यह धरती के भीतरप्रचुर मात्रा में पाए जाना वाला 26वाँ तत्व है।

आर्सेनिक के विभिन्न प्रत्यक्ष स्रोत कौन-कौन से हैं?

  • इस वातावरण में उपलब्ध आर्सेनिक के प्रकट स्रोत में प्राकृतिक और मानवजनित स्रोत निम्न हैं-
    • प्राकृतिक- आर्सेनिक युक्त गाद से भूजल में आर्सेनिक का रिसाव; मिट्टी में आर्सेनिक का रिसना और घुलना।
    • मानवजनित- कृषि रसायन, दीमकरोधी जैसे रासायनिक तत्व, औद्योगिक स्रोत, खनिज संशोधन, खनिज संशोधन के अम्ल-अपशिष्ट का निस्तार, जैव-ईंधन का जलना, आदि।

आर्सेनिक के स्वास्थ्य पर प्रभाव क्या-क्या हैं?

  • आर्सेनिक की वजह से कई बीमारियाँ होती हैं और कई बीमारियों का खतरे की गम्भीरता बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर त्वचा का फटना, केराटोइस और त्वचा का कैंसर, फेफड़े और मूत्राशय का कैंसर और नाड़ी से सम्बन्धित रोग आदि। दूसरी परेशानियाँ जैसे मधुमेह, दूसरे अंगों का कैंसर, संतानोत्पत्ति से सम्बन्धित गड़बड़ियाँ आदि के मामले भी देखे गए हैं। अभी हुएशोध केअनुसार डब्लूएचओ के निर्देशित मानक या मैक्सिमम कंटामिनेशन लेवल (एमएलसी) 10 पीपीबी सेकम की मात्रा भी बच्चों और किशोरों युवा वयस्कों की बोध क्षमता को बहुत ज्यादा प्रभावित कर सकती है।

पेयजल में आर्सेनिक की सान्द्रता का स्वीकृत मात्रा क्या है?

  • पेयजल में आर्सेनिक के लिये निर्देशित मानक या मैक्सिमम कंटामिनेशन लेवल (एमएलसी) 10 पीपीबी (parts per billion) (डब्लूएचओ के अनुसार) है जिसे अधिकतर विकसित देश मानते हैं। विकासशील देश जिनमें भारत और बांग्लादेश भी शामिल हैं, में पेयजल में आर्सेनिक की स्वीकृत मात्रा 50 पीपीबी मानी गई है।

गंगा-मेघना बेसिन मैदान में आर्सेनिक के स्रोत क्या हैं?

  • कई नदियों के खादर हिमालय पर्वत और तिब्बत के पठार से प्रभावित होते हैं। गंगा का मैदान हिमालय और प्रायद्वीपीय पठारों से निकली मिट्टी से तैयार हुआ है। हिमालय से लाये गए पदार्थ मैदानी भाग में जमा होते रहते हैं जहाँ वे फिर से रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से टूटते हैं, इससे उनमें कई बार ऋणायन और धनायन होता है। गंगा नदी के गाद में आर्सेनिक, क्रोमियम, कॉपर, लेड, यूरेनियम, थोरियम, टंगस्टन आदि पाये जाते हैं।

भारत में कितने राज्य आर्सेनिक प्रभावित हैं?

  • पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, असम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश आदि राज्यों में आर्सेनिक का प्रभाव पाया गया है। ज्यादा प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखण्ड हैं।

फसलों के जरिए कैसे आर्सेनिक खाद्य चक्र में शामिल हो जाता है?

  • जब खेतों की सिंचाई आर्सेनिक युक्त पानी से की जा रही हो तो आर्सेनिक का अकार्बनिक स्वरूप पौधों में अवशोषित हो जाता है और इस तरह आर्सेनिक खाद्य चक्र में शामिल हो जाता है। अभी तक मुख्य रूप सेचावल ऐसे खाद्य पदार्थ के रूप में सामने आया है।
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