(प्रारंभिक परीक्षा: भारत एवं विश्व का भूगोल : भारत एवं विश्व का प्राकृतिक भूगोल) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत व हिमावरण सहित) तथा वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव) |
संदर्भ
हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि दक्षिणी महासागर मानव गतिविधियों से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड की बड़ी मात्रा को अपने भीतर समाहित कर लेता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह वैश्विक सतह तापमान में हो रही वृद्धि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
दक्षिणी महासागर के बारे में
- दक्षिणी महासागर (जिसे अंटार्कटिक महासागर भी कहा जाता है) पृथ्वी के पाँच विशाल महासागरीय बेसिनों में से एक है। इसका निर्माण लगभग 34 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ था जब अंटार्कटिका एवं दक्षिण अमेरिका अलग हो गए थे, जिससे ड्रेक पैसेज का निर्माण हुआ।
- इस प्रकार यह पृथ्वी का सबसे युवा महासागरीय बेसिन है। यह एकमात्र ऐसा महासागर है जो बिना किसी भूमि अवरोध के पूरी दुनिया में बहता है और अंटार्कटिका को एक खाई की तरह घेरे हुए है।
- विश्व के प्रमुख महासागरों के बीच प्राथमिक मिश्रण क्षेत्र होने के नाते दक्षिणी महासागर विश्व भर में जल परिसंचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह अपनी धाराओं, मौसमी समुद्री बर्फ एवं वायुमंडल से ऊष्मा व कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अंटार्कटिक अभिसरण
- दक्षिणी महासागर की उत्तरी सीमा के आसपास एक प्राकृतिक, जैविक सीमा है जिसे अंटार्कटिक अभिसरण या ध्रुवीय मोर्चा कहा जाता है।
- अभिसरण के उत्तर में सतह के निकट जल का तापमान लगभग 42.1°F (5.6°C) रहता है जो उप-अंटार्कटिक जलवायु के अनुकूल समुद्री जीवों के लिए आदर्श है।
- अभिसरण के दक्षिण में जल का तापमान नाटकीय रूप से गिरकर 36°F (2°C) से नीचे आ जाता है जिससे अंटार्कटिक के विशिष्ट वन्यजीवों के फलने-फूलने के लिए उत्तम परिस्थितियाँ बनती हैं।
तेज़ धाराएँ
- दक्षिणी महासागर में अंटार्कटिक ध्रुवीय धारा (ACC) का प्रभुत्व है: यह पृथ्वी की सबसे लंबी, सबसे शक्तिशाली और सबसे गहरी धारा है।
- ACC महाद्वीप के चारों ओर दक्षिणावर्त दिशा में घूमती है और किसी भी अन्य धारा की तुलना में विश्व भर में अधिक जल का परिवहन करती है।
जमा हुआ महासागर
- हर सर्दियों में अंटार्कटिका में पृथ्वी पर होने वाले सबसे उल्लेखनीय मौसमी परिवर्तनों में से एक देखने को मिलता है। तापमान में भारी गिरावट के साथ दक्षिणी महासागर जम कर समुद्री बर्फ की एक पट्टी में तब्दील हो जाता है जिससे अंटार्कटिका का आकार लगभग दोगुना हो जाता है।
- अंटार्कटिका की शीतकालीन समुद्री बर्फ लगभग 11 मिलियन मील (18 मिलियन वर्ग किमी) क्षेत्र को कवर करती है जो अमेरिका के आकार से लगभग दोगुना है।
पृथ्वी पर सबसे अधिक उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में से एक
- तेज़ समुद्री धाराएँ, ठंडा तापमान और पोषक तत्वों एवं ऑक्सीजन से भरपूर जल दक्षिणी महासागर को पृथ्वी के सबसे उत्पादक समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में से एक बनाते हैं।
- गर्मियों में अरबों सूक्ष्म शैवाल (फाइटोप्लांकटन) पनपते हैं और इतने बड़े समूह में फैल जाते हैं कि उन्हें अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। ये एककोशिकीय समुद्री पौधे छोटे अकशेरुकी जीवों, शंखों और अंटार्कटिक क्रिल ( यूफौसिया सुपरबा ) को पोषण प्रदान करते हैं।
- अंटार्कटिक क्रिल, अंटार्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र की एक प्रमुख प्रजाति है।
- दक्षिणी महासागर में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले शैवाल पर चरते हुए हर ग्रीष्म ऋतु में सैकड़ों खरब क्रिल जल स्तंभ में तैरते रहते हैं। फाइटोप्लांकटन की तरह इनके विशाल झुंड अंतरिक्ष से गुलाबी धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। ये छोटे, झींगा जैसे क्रस्टेशियन कई अंटार्कटिक समुद्री जीवों के आहार का आधार बनते हैं जिनमें पेंगुइन, सील व व्हेल शामिल हैं।