संदर्भ
विश्व मोटापा एटलस 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में अधिक वजन और मोटापे की संख्या के आधार पर भारत विश्व में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। वस्तुतः पिछले लगभग दो दशकों में बाल मोटापा (Childhood Obesity) विश्व स्तर पर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरा है।
एटलस 2026 के प्रमुख तथ्य
- विश्व में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के पाँच में से एक से अधिक बच्चे अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित हैं।
- यह लगभग 20.7% बच्चों के बराबर है, जबकि 2010 में यह अनुपात 14.6% था।
- दुनिया में 200 मिलियन से अधिक स्कूली आयु के बच्चे अधिक वजन या मोटापे के साथ जीवन जी रहे हैं।
- इन बच्चों का बड़ा हिस्सा केवल 10 देशों में केंद्रित है।
- इन देशों में चीन, भारत और अमेरिका प्रमुख हैं, जो इस वैश्विक समस्या का बड़ा हिस्सा वहन करते हैं।
- अनुमान है कि वर्ष 2040 तक विश्व में लगभग 507 मिलियन बच्चे अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित हो सकते हैं।
- यह स्थिति दर्शाती है कि बाल मोटापा अब केवल उच्च आय वाले देशों की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि विकासशील और मध्यम आय वाले देशों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की स्थिति और वैश्विक रैंकिंग
- भारत अब चीन के बाद दूसरे स्थान पर है, जहाँ बच्चों में अधिक वजन और मोटापे के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है
- भारत में लगभग 41 मिलियन बच्चों का BMI (Body Mass Index) सामान्य से अधिक है। लगभग 14 मिलियन बच्चे मोटापे की समस्या से ग्रस्त हैं।
2025 के आँकड़ों के अनुसार :
- 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 14.9 मिलियन बच्चे अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित थे।
- वहीं 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 26 मिलियन से अधिक किशोर इस समस्या से जूझ रहे थे।
- इन आँकड़ों के आधार पर कुल संख्या के मामले में भारत अमेरिका से आगे निकल गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एक प्रमुख कारण भारत की विशाल जनसंख्या भी है।
- इसके अलावा, WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भी बच्चों और किशोरों में अधिक वजन व मोटापे की संख्या भारत में सबसे अधिक पाई गई है।
भारत के लिए भविष्य के अनुमान
- विश्व मोटापा एटलस (2025-2040) के पूर्वानुमान भारत के लिए स्थिति को और चिंताजनक बताते हैं।
मुख्य अनुमान निम्नलिखित हैं :
- 2040 तक लगभग 20 मिलियन बच्चे मोटापे से ग्रस्त हो सकते हैं।
- लगभग 56 मिलियन बच्चे अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आ सकते हैं।
इसके साथ ही कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी वृद्धि होने की आशंका है:
- BMI से संबंधित उच्च रक्तचाप के मामले 2.99 मिलियन से बढ़कर 4.21 मिलियन तक पहुँच सकते हैं।
- हाइपरग्लाइसीमिया (उच्च रक्त शर्करा) 1.39 मिलियन से बढ़कर 1.91 मिलियन हो सकता है।
- उच्च ट्राइग्लिसराइड्स (हृदय रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक) 4.39 मिलियन से बढ़कर 6.07 मिलियन तक हो सकते हैं।
- ये अनुमान दर्शाते हैं कि बाल मोटापा भारत में गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बोझ को काफी बढ़ा सकता है।
बाल मोटापा के स्वास्थ्य प्रभाव
- बचपन में मोटापा होने से बच्चों में कई ऐसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जो सामान्यतः वयस्कों में देखी जाती हैं। इनमें शामिल हैं:
- उच्च रक्तचाप (Hypertension)
- हृदय संबंधी रोग (Cardiovascular diseases)
- टाइप-2 मधुमेह
- चयापचय संबंधी विकार (Metabolic disorders)
- अनुमान के अनुसार 2040 तक:
- 57 मिलियन से अधिक बच्चों में हृदय रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- 43 मिलियन से अधिक बच्चों में उच्च रक्तचाप के संकेत पाए जा सकते हैं।
- इसके अतिरिक्त, बचपन में विकसित हुआ मोटापा अक्सर वयस्कता तक बना रहता है, जिससे दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याएँ और आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इसी कारण कम उम्र में ही मोटापे की रोकथाम और नियंत्रण अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
बाल मोटापा बढ़ने के प्रमुख कारण
- भारत में बच्चों में बढ़ते मोटापे के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े तथा सामाजिक-पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हैं।
1. शारीरिक गतिविधि की कमी
- लगभग 11-17 वर्ष आयु के 74% किशोर अनुशंसित स्तर की शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते।
2. अस्वास्थ्यकर भोजन की बढ़ती प्रवृत्ति
- बच्चों में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (processed foods) और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन बढ़ता जा रहा है।
3. स्कूल पोषण कार्यक्रमों की सीमित पहुँच
- केवल 35.5% स्कूली बच्चों को विद्यालय में भोजन उपलब्ध हो पाता है।
4. प्रारंभिक जीवन में पोषण से जुड़ी चुनौतियाँ
5. मातृ स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम
- 15-49 वर्ष आयु की लगभग 13.4% महिलाओं का BMI सामान्य से अधिक है।
- साथ ही 4.2% महिलाएँ टाइप-2 मधुमेह से प्रभावित हैं, जो बच्चों में मोटापे के जोखिम को बढ़ा सकता है।
नीतिगत उपाय और रोकथाम रणनीतियाँ
- विश्व मोटापा महासंघ (World Obesity Federation) ने बाल मोटापा नियंत्रित करने के लिए कई नीतिगत कदम सुझाए हैं:
- स्कूलों में स्वस्थ भोजन व्यवस्था को बढ़ावा देना
- बच्चों को लक्षित जंक फूड के विज्ञापनों पर नियंत्रण लगाना
- मीठे पेय पदार्थों पर कर (Sugar Tax) लागू करना
- बच्चों में शारीरिक गतिविधि और खेलकूद को प्रोत्साहित करना
- स्तनपान को बढ़ावा देना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना
- मोटापा रोकथाम को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाना
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक जांच (early screening) और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से जोखिम वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा सकती हैं। इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने से बाल मोटापे की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संकट को कम किया जा सकता है।