New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

हाथी-ट्रेन टक्कर: विकास बनाम संरक्षण की गंभीर चुनौती

(प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ 

हाल ही में, असम के होजाई जिले में दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस से दुर्घटना में सात हाथियों की मौत हो गई और पाँच डिब्बे पटरी से उतर गए। यह घटना वन्यजीव संरक्षण और अवसंरचना विकास के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करती है। 

भारत में हाथियों की सुरक्षा: एक उभरता संकट 

भारत विश्व की एशियाई हाथी आबादी का 50% से अधिक हिस्सा समेटे हुए है। इसके बावजूद मानवीय गतिविधियों के कारण हाथियों की मृत्यु एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। रेल दुर्घटनाएँ अब हाथियों के लिए प्रमुख मानवजनित खतरों में शामिल हो चुकी हैं। 

हाथियों की अप्राकृतिक मृत्यु के आँकड़े

  • वर्ष 2010 से 2020 के बीच देश में 1,160 हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई। इनमें सर्वाधिक मौतें बिजली के झटके से (741) दर्ज की गईं, जबकि ट्रेन से टकराने के कारण 186 हाथियों की जान गई।
  • विशेष रूप से उच्च वोल्टेज वाली ओवरहेड रेलवे लाइनें बिजली से होने वाली मौतों में अहम भूमिका निभाती हैं जिससे रेल अवसंरचना अप्रत्यक्ष रूप से कई प्रकार के खतरों से जुड़ जाती है। 

रेखीय परिवहन अवसंरचना (LTI) का प्रभाव 

जंगलों के भीतर से गुजरने वाली रेल लाइनों, सड़कों एवं नहरों के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास खंडित हो जाते हैं। यह विभाजन उनके पारंपरिक मार्गों को बाधित करता है, झुंडों को बाधित करता है और भोजन व जल स्रोतों तक पहुँच सीमित कर देता है। इसका परिणाम दीर्घकालिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याओं और अंततः अस्तित्व पर संकट के रूप में सामने आता है। 

रात की दुर्घटनाएँ और व्यवहारगत कारण

अध्ययनों से संकेत मिलता है कि अधिकांश हाथी–ट्रेन टक्करें रात्रि के समय होती हैं। नर हाथी इन घटनाओं से अधिक प्रभावित पाए गए हैं क्योंकि वे विशेषकर फसल कटाई के मौसम में भोजन की तलाश में अधिक दूरी तय करते हैं और बार-बार रेलवे पटरियों को पार करते हैं। 

टक्कर रोकथाम में क्रॉसिंग का महत्व

IUCN द्वारा 2023 में प्रकाशित हैंडबुक के अनुसार, अवसंरचना की योजना बनाते समय हाथियों के आवास और प्रवास गलियारों से बचना सबसे प्रभावी उपाय है। हालाँकि, जहाँ यह संभव न हो, वहाँ जोखिम कम करने के उपाय अनिवार्य हो जाते हैं। 

वन्यजीव पारगमन संरचनाएँ: स्थायी समाधान

आधुनिक ढंग से डिज़ाइन की गई वन्यजीव क्रॉसिंग संरचनाएँ, यदि बाड़बंदी के साथ लागू की जाएँ, तो वन्यजीव मृत्यु दर को 98% तक घटा सकती हैं। ये संरचनाएँ हाथियों के प्राकृतिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। 

क्रॉसिंग के प्रकार और डिज़ाइन

क्रॉसिंग संरचनाएँ दो प्रकार की हो सकती हैं-

  • अंडरपास (पुल या फ्लाईओवर के नीचे)
  • ओवरपास (ग्रीन ब्रिज या सुरंग के रूप में) 
  • हाथियों के लिए खुलापन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि वे संकरी और बंद जगहों से बचते हैं। इसी कारण IUCN ने क्रॉसिंग की लंबाई के अनुसार कम-से-कम 6–7 मीटर ऊँचाई की सिफारिश की है।

सही स्थान निर्धारण की भूमिका

क्रॉसिंग का स्थान और संख्या उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना उसका डिज़ाइन। कैमरा ट्रैप और GPS टेलीमेट्री के माध्यम से हाथियों की आवाजाही का मानचित्रण किया जाता है जिससे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर उचित स्थानों पर क्रॉसिंग विकसित की जा सकती है। 

बाड़बंदी: सहायक किंतु आवश्यक उपाय

रणनीतिक रूप से लगाई गई बाड़ें हाथियों को पटरियों पर भटकने से रोकती हैं और उन्हें सुरक्षित क्रॉसिंग की ओर निर्देशित करती हैं जिससे पूरे तंत्र की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। 

तकनीक आधारित समाधान: भविष्य की राह

भौतिक उपायों के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ भी महत्वपूर्ण गैर-संरचनात्मक समाधान बनकर उभरी हैं। ये प्रणालियाँ ट्रेन चालकों को पहले से सचेत कर दुर्घटनाओं की संभावना कम करती हैं। 

सेंसर, AI और मशीन लर्निंग की भूमिका

  • लोकोमोटिव-आधारित प्रणालियाँ: FLIR कैमरों के माध्यम से 750 मीटर तक बाधाओं का पता लगाती हैं।
  • जमीन आधारित प्रणालियाँ: कैमरे, ध्वनिक एवं भूकंपीय सेंसरों का उपयोग करती हैं।
  • वस्तुतः पहले इन प्रणालियों की क्षमता अलार्म में समस्या और डेटा विश्लेषण की कठिनाइयों तक सीमित थी किंतु अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग ने इन्हें अधिक सटीक व विश्वसनीय बना दिया है। 

भारतीय रेलवे की पहल

  • भारतीय रेलवे ने AI-आधारित चेतावनी प्रणालियों के प्रयोग की शुरुआत कर दी है।
    • वर्ष 2023 में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे
    • वर्ष 2024 में केरल–तमिलनाडु सीमा
  • इन पायलट परियोजनाओं के शुरुआती परिणाम सकारात्मक रहे हैं जो भविष्य में इनके व्यापक कार्यान्वयन की संभावना को मजबूत करते हैं। 

निष्कर्ष 

  • भारतीय रेलवे द्वारा पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और केरल-तमिलनाडु सीमा पर शुरू किए गए एआई-आधारित पायलट प्रोजेक्ट्स उत्साहजनक परिणाम दे रहे हैं। हालांकि, इन तकनीकों का पूरे देश में विस्तार करने की आवश्यकता है।
  • अंततः विकास की पटरी पर दौड़ती ट्रेनों की गति तभी सार्थक है, जब वह हमारे राष्ट्रीय विरासत पशु ‘हाथी’ के अस्तित्व को कुचलने की कीमत पर न हो। हमें बुनियादी ढाँचे की योजना में ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित’ दृष्टिकोण अपनाने की सख्त जरूरत है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR