| (प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन) |
हाल ही में, असम के होजाई जिले में दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस से दुर्घटना में सात हाथियों की मौत हो गई और पाँच डिब्बे पटरी से उतर गए। यह घटना वन्यजीव संरक्षण और अवसंरचना विकास के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करती है।
भारत विश्व की एशियाई हाथी आबादी का 50% से अधिक हिस्सा समेटे हुए है। इसके बावजूद मानवीय गतिविधियों के कारण हाथियों की मृत्यु एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। रेल दुर्घटनाएँ अब हाथियों के लिए प्रमुख मानवजनित खतरों में शामिल हो चुकी हैं।
जंगलों के भीतर से गुजरने वाली रेल लाइनों, सड़कों एवं नहरों के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास खंडित हो जाते हैं। यह विभाजन उनके पारंपरिक मार्गों को बाधित करता है, झुंडों को बाधित करता है और भोजन व जल स्रोतों तक पहुँच सीमित कर देता है। इसका परिणाम दीर्घकालिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याओं और अंततः अस्तित्व पर संकट के रूप में सामने आता है।
अध्ययनों से संकेत मिलता है कि अधिकांश हाथी–ट्रेन टक्करें रात्रि के समय होती हैं। नर हाथी इन घटनाओं से अधिक प्रभावित पाए गए हैं क्योंकि वे विशेषकर फसल कटाई के मौसम में भोजन की तलाश में अधिक दूरी तय करते हैं और बार-बार रेलवे पटरियों को पार करते हैं।
IUCN द्वारा 2023 में प्रकाशित हैंडबुक के अनुसार, अवसंरचना की योजना बनाते समय हाथियों के आवास और प्रवास गलियारों से बचना सबसे प्रभावी उपाय है। हालाँकि, जहाँ यह संभव न हो, वहाँ जोखिम कम करने के उपाय अनिवार्य हो जाते हैं।
आधुनिक ढंग से डिज़ाइन की गई वन्यजीव क्रॉसिंग संरचनाएँ, यदि बाड़बंदी के साथ लागू की जाएँ, तो वन्यजीव मृत्यु दर को 98% तक घटा सकती हैं। ये संरचनाएँ हाथियों के प्राकृतिक मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।
क्रॉसिंग संरचनाएँ दो प्रकार की हो सकती हैं-
क्रॉसिंग का स्थान और संख्या उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना उसका डिज़ाइन। कैमरा ट्रैप और GPS टेलीमेट्री के माध्यम से हाथियों की आवाजाही का मानचित्रण किया जाता है जिससे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर उचित स्थानों पर क्रॉसिंग विकसित की जा सकती है।
रणनीतिक रूप से लगाई गई बाड़ें हाथियों को पटरियों पर भटकने से रोकती हैं और उन्हें सुरक्षित क्रॉसिंग की ओर निर्देशित करती हैं जिससे पूरे तंत्र की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
भौतिक उपायों के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ भी महत्वपूर्ण गैर-संरचनात्मक समाधान बनकर उभरी हैं। ये प्रणालियाँ ट्रेन चालकों को पहले से सचेत कर दुर्घटनाओं की संभावना कम करती हैं।
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