| मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन पेपर- 3 |
चर्चा में क्यों ?
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने पहले धूल प्रयोग (Dust Experiment - DEX) के माध्यम से यह पुष्टि की है कि औसतन प्रत्येक 1,000 सेकंड में एक अंतरग्रहीय धूल कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है। यह खोज पृथ्वी-अंतरिक्ष परिवेश की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX) क्या है ?
- धूल प्रयोग (DEX) एक भारतीय निर्मित वैज्ञानिक उपकरण है, जिसे उच्च गति वाले अंतरग्रहीय धूल कणों (Interplanetary Dust Particles – IDPs) का पता लगाने के लिए विकसित किया गया है।
- यह भारत का इस प्रकार का पहला उपकरण है, जिसे अत्यधिक क्षणिक और सूक्ष्म कणों की पहचान के लिए डिज़ाइन किया गया है।
DEX से संबंधित प्रमुख बिन्दु:
- यह उच्च वेग से गतिमान अंतरग्रहीय धूल कणों की पहचान करने वाला पहला भारतीय उपकरण है।
- DEX को भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (Physical Research Laboratory – PRL) द्वारा विकसित किया गया है।
- इसे PSLV-C58 XPoSat मिशन के अंतर्गत PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM) पर स्थापित किया गया था।
- यह उपकरण अंतरिक्ष में धूल कणों के टकराव से उत्पन्न संकेतों को दर्ज करने में सक्षम है।
धूल प्रयोग (DEX) की विशेषताएँ:
- यह एक छोटा और अत्यंत संवेदनशील उपकरण है, जिसे धूल कणों के प्रभाव को “सुनने” और उनसे संबंधित वैज्ञानिक डेटा को कैप्चर करने के लिए तैयार किया गया है।
- यह उस प्रकार के डिटेक्टर का प्रारूप प्रस्तुत करता है, जिसका उपयोग वायुमंडल वाले या बिना वायुमंडल वाले किसी भी ग्रह पर मौजूद ब्रह्मांडीय धूल कणों के अध्ययन के लिए किया जा सकता है।
- यह अंतरिक्ष यानों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का आकलन करने में भी सहायक है।
DEX का महत्व:
- DEX से प्राप्त आंकड़े ब्रह्मांड और पृथ्वी–अंतरिक्ष पर्यावरण के बारे में हमारी समझ को और गहराई प्रदान करते हैं।
- यह प्रयोग मानव गहरे अंतरिक्ष मिशनों को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- पृथ्वी के वायुमंडल में अंतरग्रहीय धूल कणों से संबंधित जानकारी गगनयान मिशन की योजना और जोखिम मूल्यांकन के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी।
अंतरग्रहीय धूल कण (IDPs) क्या हैं ?
- अंतरग्रहीय धूल कण (Interplanetary Dust Particles – IDPs) सूक्ष्म मीटर आकार के कण होते हैं, जो सौर मंडल के भीतर उत्पन्न होते हैं।
- ये मुख्यतः धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से निकलने वाले अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं।
- यही कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रहस्यमय “उल्का परत (Meteor Layer)” का निर्माण करते हैं और रात में “टूटते तारे” (Shooting Stars) के रूप में दिखाई देते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन में IDPs का महत्व
- इन कणों के विश्लेषण से उनकी उत्पत्ति, निर्माण प्रक्रिया और
- प्रारंभिक सौर तथा पूर्व-सौर वातावरण में घटी घटनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
- IDPs सौर मंडल के विकास और ग्रह निर्माण की प्रक्रियाओं को समझने की कुंजी माने जाते हैं।
निष्कर्ष
- धूल प्रयोग (DEX) भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- यह न केवल पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष पर्यावरण को समझने में सहायक है, बल्कि भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए भी मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।