New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 3rd Aug 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 3rd Aug 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

ट्रांसजेनिक कपास के फील्ड परीक्षण पर रोक  

प्रारंभिक परीक्षा - ट्रांसजेनिक कपास, आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र 3 - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव

सन्दर्भ 

  • हाल ही में, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने एक नए प्रकार के ट्रांसजेनिक कपास का फील्ड परीक्षण करने के लिए आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) द्वारा अनुमोदित एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

COTTON

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • इस ट्रांसजेनिक कपास बीज हैदराबाद स्थित बायोसीड रिसर्च इंडिया द्वारा विकसित किया गया था और इसमें एक जीन, क्राई2एई (Cry2Ae) शामिल है, जो कपास को एक प्रमुख कीट पिंक बॉलवॉर्म के लिए प्रतिरोधी बनाता है।
  • इस ट्रांसजेनिक कपास के फील्ड परीक्षण के लिए चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और तेलंगाना से अनुमति मांगी गयी थी, जिसमें से सिर्फ हरियाणा ने अनुमति प्रदान की है।
  • वर्तमान विनियमों के अनुसार, ट्रांसजेनिक बीजों को व्यावसायिक उत्पादन के लिए GEAC से मंजूरी प्राप्त करने से पहले फील्ड परीक्षण (खुले खेतों में परीक्षण) से गुजरना पड़ता है।  
  • कृषि राज्य सूची का विषय है जिसके कारण ज्यादातर मामलों में, बीजों के परीक्षण में रुचि रखने वाली कंपनियों को, ऐसे परीक्षण करने के लिए राज्यों से अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
  • बीटी कपास एकमात्र आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसल है जिसे भारत सरकार द्वारा व्यावसायिक खेती के लिए अनुमोदित किया गया है।

आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC)

  • यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
  • यह पर्यावरण के दृष्टिकोण से अनुसंधान एवं औद्योगिक उत्पादन में सूक्ष्मजीवों और पुनः संयोजकों के उपयोग से जुड़ी गतिविधियों का मूल्यांकन करती है।
  • आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों और उनसे प्राप्त उत्पादों के व्यावसायिक प्रयोग से पहले GEAC की मंजूरी अनिवार्य होती है।
  • यह भारत में खतरनाक सूक्ष्मजीवों या आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों(LMOs) के उपयोग, निर्माण, भंडारण, आयात और निर्यात को नियंत्रित करती है।
  • इस समिति के पास पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम,1986 के तहत दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार भी है।

भारत में जीएम फसलों को विनियमित करने वाले अधिनियम और नियम -

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 
  • जैविक विविधता अधिनियम, 2002 
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 
  • औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम (8वां संशोधन), 1988
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR