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पोल्ट्री क्षेत्र में प्रथम जीन प्रोफाइल अध्ययन

भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार केरल एवं तेलंगाना के पोल्ट्री में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) जीन प्रोफाइल की रिपोर्ट तैयार की है।

पोल्ट्री जीन प्रोफाइल अध्ययन के बारे में

  • शोध पत्र : आई.सी.एम.आर.-राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद के वैज्ञानिकों द्वारा ‘मध्य एवं दक्षिणी भारत के पोल्ट्री में रोगाणुरोधी प्रतिरोध प्रोफ़ाइल का विशिष्ट विशेषताओं के साथ विकास’ शीर्षक वाला एक शोध पत्र प्रकाशित किया गया।
  • शोध प्रक्रिया : इन क्षेत्रों में पोल्ट्री फार्मों से मुर्गियों का मल एकत्र किया और जीनोमिक डी.एन.ए. को अलग किया। 

शोध के प्रमुख निष्कर्ष 

  • शोध के नमूनों में ग्राम-नेगेटिव एनारोबिक प्रजातियों (Gram-Negative and Anaerobic Species) के बैक्टीरिया की अधिक व्यापकता देखी गई। 
  • भारत में एंटीबायोटिक उपचार के लिए चुनौती प्रस्तुत करने वाले उच्च प्राथमिकता वाले रोगाणु, जैसे- ई.कोली, क्लॉस्ट्रिडियम परफ्रिंजेंस, क्लेबसिएला न्यूमोनिया स्टैफिलोकोकस ऑरियस, एंटरोकोकस फेकेलिस, स्यूडोमोनस एरुगिनोसा, बैक्टीरियोडेस फ्रैजिल्स भी पोल्ट्री में पाए गए हैं और उनमें ए.एम.आर. जीन उपस्थित थे।
  • अध्ययन में पाया गया कि मध्य भारत की तुलना में दक्षिणी भारत में ए.एम.आर. जीन की बहुतायत सर्वाधिक थी। भारत के सुदूर दक्षिणी क्षेत्र में ई.कोली अन्य स्थानों की तुलना में काफी अधिक प्रचलित था।
  • ICMR डाटा में यूरोपीय संघ (EU) के पोल्ट्री फॉर्म्स की कई सामान्य AMR प्रोफ़ाइल विशेषताएँ थीं किंतु mcr-1 जीन की कमी थी।
    • mcr-1 जीन कोलिस्टिन के प्रति प्रतिरोध पैदा करता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की सूची में अंतिम विकल्प एंटीबायोटिक है।
  • EU में पाया गया एक नया उभरा प्रतिरोधी जीन optrA भारतीय पोल्ट्री नमूनों में नहीं पाया गया है, जबकि EU में अत्यधिक मौजूद qnr जीन दक्षिण भारतीय नमूनों में कम स्तरों पर उभर रहा है।
  • शोध के अनुसार, भारत में खतरे की गंभीरता यूरोपीय संघ की तुलना में कम है।
  • यह शोध स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में ए.एम.आर. के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता का संकेत देता है।

ग्राम-नेगेटिव एनारोबिक बैक्टीरिया प्रजातियों के बारे में

  • इन घातक प्रजातियों के बैक्टीरिया में कोशिका झिल्ली की एक अतिरिक्त परत होती है जो इन्हें मारने वाली दवाओं के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। 
  • इनके द्वारा प्राप्त ए.एम.आर. निमोनिया, हैजा, खाद्य विषाक्तता आदि जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करता है।
  • भारत में आमतौर पर देखे जाने वाले श्वसन संक्रमण (निमोनिया, ब्रोंकाइटिस), मूत्र मार्ग में संक्रमण, जठरांत्र संबंधी संक्रमण, पेट के अंदर के संक्रमण और कई क्लॉस्ट्रीडियल संक्रमण ग्राम-नेगेटिव एनारोबिक बैक्टीरिया प्रजातियों के कारण होते हैं। 
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