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भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग

चर्चा में क्यों ?

  • जैव विविधता के संरक्षण तथा पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में मध्य प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की चार विशिष्ट पारंपरिक जनजातीय फसलों को हाल ही में प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। यह सम्मान इन फसलों की विशिष्टता, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करता है।  

जीआई टैग प्राप्त करने वाली फसलें 

  • सिताही कुटकी (Sitahi Kutki - Sitahi Minor Millet) 
  • नागदमन कुटकी (Nagdaman Kutki - Nagdaman Minor Millet) 
  • बैगानी अरहर (Baigani Pigeon Pea) 
  • छत्रिया धान (Chhatriya Paddy)
  • इन पारंपरिक फसलों का संरक्षण और संवर्धन लंबे समय से विशेष रूप से मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले की बैगा जनजाति द्वारा किया जाता रहा है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इन कृषि परंपराओं ने इन फसलों की मौलिकता और गुणवत्ता को बनाए रखा है। 

सिताही कुटकी और नागदमन कुटकी  

  • सिताही कुटकी और नागदमन कुटकी दोनों ही अत्यंत पौष्टिक लघु बाजरे की किस्में हैं। इनमें भरपूर मात्रा में आहार रेशा, खनिज तत्व तथा एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इन्हें स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी बनाते हैं।
  • इन दोनों किस्मों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इनमें जलवायु परिवर्तन के प्रति प्राकृतिक सहनशीलता होती है। यही कारण है कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी इनकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है और अच्छी उपज प्राप्त होती है।

बैगानी अरहर 

  • बैगानी अरहर, अरहर (तुअर दाल) की एक पारंपरिक स्थानीय किस्म है, जिसका बैगा जनजाति की कृषि संस्कृति से गहरा संबंध है। इसकी खेती पूरी तरह जैविक और पारंपरिक जनजातीय कृषि तकनीकों के माध्यम से की जाती है।
  • सामान्य व्यावसायिक किस्मों की अपेक्षा इसमें प्राकृतिक प्रोटीन अधिक पाया जाता है तथा इसका स्वाद अपेक्षाकृत अधिक मधुर होता है। 
  • यह फसल लगभग पाँच से छह महीने में तैयार हो जाती है और इसे पकाने में भी कम समय लगता है। 
  • इसके अतिरिक्त इसमें आहार रेशा, आयरन, कैल्शियम तथा बी-समूह के विटामिनों की पर्याप्त मात्रा सुरक्षित रहती है, जिससे इसका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है।

छत्रिया धान 

  • छत्रिया धान मध्य प्रदेश की एक पारंपरिक धान किस्म है, जिसकी खेती मुख्य रूप से जबलपुर और कटनी के उपजाऊ आर्द्र क्षेत्रों में की जाती है। यह अपनी मजबूत अनुकूलन क्षमता, उच्च गुणवत्ता, विशिष्ट सुगंध और उत्कृष्ट स्वाद के कारण विशेष पहचान रखती है।
  • सामान्य रूप से पॉलिश किए गए सफेद चावल की तुलना में छत्रिया धान में चोकर (ब्रान) की परत सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि यह विटामिन बी-1 (थायमिन), आवश्यक खनिजों तथा स्वास्थ्यवर्धक वसा का अच्छा स्रोत माना जाता है।
  • इसके साथ ही यह शरीर को आसानी से पचने वाली ऊर्जा प्रदान करता है तथा इसमें संतुलित अमीनो अम्ल संरचना पाई जाती है, जिसके कारण इसे एक पौष्टिक, संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक मुख्य खाद्यान्न के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। 

जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) के बारे में  

  • जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई टैग) एक ऐसा चिह्न है, जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनकी भौगोलिक उत्पत्ति (भौगोलिक क्षेत्र) विशिष्ट होती है एवं उन उत्पादों की गुणवत्ता, विशेषताएँ या प्रतिष्ठा उसी अमुख क्षेत्रविशेष से संबंधित होती है।
  • जीआई टैग बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) का एक रूप है। यह किसी उत्पाद की गुणवत्ता या अन्य विशिष्ट विशेषताओं को उसके भौगोलिक मूल से जोड़कर वैद्यता प्रदान करता है।  
  • जीआई टैग को औद्योगिक संपत्ति/संपदा के संरक्षण के लिए पेरिस सम्मेलन तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधी पहलुओं (ट्रिप्स) समझौते के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकार का एक अभिन्न भाग माना गया है। 

भौगोलिक संकेतक के लाभ:

  • भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त होने के बाद केवल अधिकृत उपयोगकर्ता ही उस संकेतक का प्रयोग कर सकते हैं। यदि कोई अन्य व्यक्ति निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना उसी संकेतक का उपयोग करता है, तो उस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। 

पंजीकृत स्वामियों के अधिकार:

  • अन्य व्यक्तियों द्वारा अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी संरक्षण।
  • निर्धारित वस्तुओं या उत्पादों पर भौगोलिक संकेतक के उपयोग का विशेष अधिकार।
  • भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) के दुरुपयोग, नकल या भ्रामक प्रयोग को नियंत्रित करने का अधिकार। 
  • उल्लंघन अथवा अनुचित प्रतिस्पर्धा की स्थिति में कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार। 

जीआई टैग और उत्पाद:

  • वाइन 
  • खाद्य पदार्थ
  • कृषि उत्पाद 
  • हस्तशिल्प उत्पाद 
  • औद्योगिक उत्पाद
  • मादक पेय

हालाँकि, इन उत्पादों में विशिष्ट गुणवत्ता, विशेषता तथा प्रतिष्ठा का होना अनिवार्य है, जो उत्पाद के भौगोलिक क्षेत्र से प्रत्यक्षतः संबंधित हो।

भौगोलिक संकेतक प्राप्ति की पात्रता:

  • किसी उत्पाद के लिए जीआई टैग प्राप्त करने हेतु कोई भी व्यापारिक समूह, संगठन या संघ आवेदन कर सकता है। 
  • आवेदन के दौरान उस उत्पाद की विशिष्टता को प्रमाणित करने के लिए ऐतिहासिक साक्ष्य तथा उसकी निर्माण/उत्पादन प्रक्रिया का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक होता है।
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