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सीपीग्राम: नागरिकों की आवाज को जवाबदेह शासन से जोड़ता डिजिटल मंच

संदर्भ  

  • केंद्रीकृत जन शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम) ने पिछले एक दशक में भारत की जन शिकायत निवारण व्यवस्था को नई दिशा दी है। डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण और नागरिक प्रतिपुष्टि के उपयोग से सीपीग्राम आज केवल शिकायत दर्ज करने का पोर्टल नहीं, बल्कि पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन का महत्वपूर्ण डिजिटल मंच बन चुका है।
  • सीपीग्राम केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों, राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को एकीकृत मंच पर जोड़ता है। इसका उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना और शिकायतों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर सरकारी सेवाओं में लगातार सुधार सुनिश्चित करना है। 

एक दशक में बड़ा बदलाव 

  • वर्ष 2014 के बाद भारत की जन शिकायत निवारण व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। पहले जहां शिकायतों का निस्तारण मुख्यतः मैन्युअल और बिखरी हुई प्रक्रियाओं पर निर्भर था, वहीं आज यह एकीकृत एवं प्रौद्योगिकी-संचालित व्यवस्था बन चुकी है। 
  • वर्ष 2014 में लगभग 3.01 लाख शिकायतों का निस्तारण हुआ था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर लगभग 27 लाख हो गया। इसी अवधि में शिकायत निवारण अधिकारियों की संख्या 10,232 से बढ़कर वर्ष 2025 में 1.11 लाख से अधिक हो गई। 
  • शिकायतों के निस्तारण में लगने वाला औसत समय भी उल्लेखनीय रूप से घटा है। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में यह समय वर्ष 2014 के 157 दिन से घटकर वर्ष 2025 में 15 दिन रह गया। 

कैसे काम करता है सीपीग्राम? 

  • नागरिक सीपीग्राम पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। मोबाइल ऐप, उमंग और सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। डाक से मिलने वाली शिकायतों को भी डिजिटल रूप में प्रणाली में शामिल किया जाता है।
  • शिकायत दर्ज होने के बाद स्वचालित रूटिंग के माध्यम से उसे संबंधित शिकायत निवारण अधिकारी तक पहुंचाया जाता है। नागरिक अपनी विशिष्ट पंजीकरण संख्या के माध्यम से शिकायत की स्थिति देख सकते हैं। 
  • अगस्त 2024 के दिशा-निर्देशों के तहत शिकायत निवारण की समय-सीमा 30 दिन से घटाकर 21 दिन कर दी गई। समाधान के बाद नागरिकों से प्रतिपुष्टि ली जाती है। असंतुष्ट नागरिक अपील भी कर सकते हैं, जिसका निपटारा संबंधित अपीलीय प्राधिकारी द्वारा किया जाता है।  

तकनीक और नागरिक सहभागिता 

  • सीपीग्राम के विकास में वर्ष 2022 में शुरू किया गया 10-चरणीय सुधार कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहा है। इसके तहत सीपीग्राम 7.0 का विस्तार, एआई एवं मशीन लर्निंग का उपयोग, डेटा आधारित निगरानी, बहुभाषी सेवाएं, जीआरएआई, प्रतिपुष्टि कॉल सेंटर, प्रशिक्षण और राज्यों के शिकायत पोर्टलों का एकीकरण जैसे कदम उठाए गए। 
  • सीपीग्राम अंग्रेजी के अतिरिक्त 22 अनुसूचित भाषाओं में शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। भाषिणी के साथ एकीकरण से नागरिकों और अधिकारियों के बीच उनकी पसंदीदा भाषा में संवाद को बढ़ावा मिला है। 
  • सामान्य सेवा केंद्रों से जुड़ाव ने ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों के नागरिकों के लिए भी शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाया है। 

समाधान दीदी से आसान होगी शिकायत 

  • 30 मई 2026 को शुरू किया गया एआई आधारित वॉयस चैटबॉट समाधान दीदी शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को और सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नागरिक अपनी पसंदीदा भाषा में बोलकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह प्रणाली भाषिणी की वाक्-से-पाठ, पाठ-से-वाक्, अनुवाद और लिप्यंतरण तकनीकों का उपयोग करती है तथा शिकायत को संबंधित मंत्रालय और श्रेणी तक पहुंचाने में सहायता करती है। 

नेक्स्ट जेनरेशन सीपीग्राम 

  • डीएआरपीजी अब नेक्स्ट जेनरेशन सीपीग्राम विकसित कर रहा है। इसमें एआई आधारित शिकायत वर्गीकरण और इंटेलिजेंट रूटिंग, वॉयस आधारित शिकायत, बहुभाषी सहायता, स्वचालित एस्केलेशन, दिव्यांग नागरिकों के लिए सुलभता और रियल टाइम डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।  
  • एआई आधारित समाधान सत्यापन प्रणाली के माध्यम से यह भी जांचने की व्यवस्था विकसित की जा रही है कि शिकायत का वास्तविक समाधान हुआ है या केवल उसे बंद अथवा स्थानांतरित किया गया है।

जवाबदेह शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम 

  • जून 2026 में 1,99,968 शिकायतों का समाधान किया गया और लगातार 46 महीनों से हर महीने एक लाख से अधिक मामलों का निस्तारण हो रहा है। वर्ष 2026 में औसत निस्तारण समय 14 दिन और जनवरी-जून के दौरान नागरिक संतुष्टि दर 76 प्रतिशत रही। 
  • सीपीग्राम की यात्रा यह दर्शाती है कि तकनीक और प्रशासनिक जवाबदेही के समन्वय से जन शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए सीपीग्राम की भूमिका केवल शिकायतों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की आवाज को नीति और प्रशासनिक सुधार से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभर रहा है। 
  • इसका मूल संदेश स्पष्ट है कि हर नागरिक की बात सुनी जाए, उसकी समस्या का समयबद्ध समाधान हो और शासन व्यवस्था नागरिकों के प्रति अधिक जवाबदेह बने। 
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