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रो-रो तथा नौकायन के लिये नए मार्गों की पहचान

संदर्भ

हाल ही में, बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग मंत्रालय नेरो-रो (RO-RO) तथा नौकायन सेवाओं के लिये नए मार्गों की पहचान की है।

प्रमुख बिंदु

  • जलमार्ग मंत्रालय नेरो-रो तथा नौका सेवाओं के लिये घरेलू स्थलों के रूप मेंहजीरा, ओखा, सोमनाथ मंदिर, दीव,पीपावाव, दाहेज, मुंबई/जे.एन.पी.टी, जामनगर, कोच्चि, घोघा, गोवा, मुंदरातथा मांडवी की पहचान की है।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर पर छातोग्राम (बांग्लादेश), सेशेल्स (पूर्व अफ्रीका) मेडागास्कर (पूर्व अफ्रीका) और जाफना (श्रीलंका) को जोड़ने वाले चार मार्गों की पहचान की है, ताकि अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से नौकायन सेवाओं की शुरुआत की जा सके।
  • मंत्रालय ने हजीरा और घोघा के बीच रो-रोतथानौका सेवा प्रारंभ की है। इस सेवा से घोघा और हजीरा के बीच की दूरी 370 किमी. से घटकर 90 किमी. हो गई है और यात्रा में पहले की अपेक्षा 5 से 6 घंटे कम समयलगेगा। साथ ही, इससे ईंधन की भी बचत होगी।
  • गौरतलब है कि जलमार्ग मंत्रालय,सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत तटीय जहाज़रानी को बढ़ावा देने के लिये निरंतर कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्‍य भारत के 7,500 किमी. लंबे तटों और जहाज़ संचालन योग्‍य जलमार्गों का दोहन कर बंदरगाह से जुड़े विकास को प्रोत्‍साहित करना है।
  • मंत्रालय सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के माध्‍यम से देश में विभिन्‍न मार्गों पर इन सेवाओं के संचालन में सहायता प्रदान कर रहा है।

रोल ऑन-रोल ऑफ ( RO –RO) फेरी सेवा

  • रोल ऑन-रोल ऑफ़का अर्थ किसी सामान को लादने और फिर उसे उतारने से है। इसके अंतर्गत पानी के जहाज़ों को माल/वस्तुएँ लादने के लिये तैयार किया जाता है।
  • देश की पहली रो-रो फेरी सेवा की शुरुआत वर्ष 2017 में गुजरात के घोघा-दाहेजके मध्य शुरू की गई थी।
  • रो-रो फेरी सेवा के प्रमुख उद्देश्‍य निम्नलिखित हैं-
    • एक पूरक परिवहन प्रणाली बनाना, जो न केवल दैनिक यात्रियों, पर्यटकों की आवाजाही और कार्गो परिवहन में लाभकारी होगी, बल्कि कार्बन को कम करने में भी सहायक हो।
    • पर्यटन उद्योग को गति प्रदान करना।
    • तटीय क्षेत्रों में रोज़गार अवसरों का सृजन करना।
    • लागत और समय में बचत।
    • सड़क और रेल नेटवर्क की भीड़ में कमी।
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