New
Solved Paper- UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Solved Paper- UPSC Prelims 2026 (Paper - 1 & 2) Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 70वीं पुण्यतिथि : आधुनिक भारत के निर्माता

(प्रारंभिक परीक्षा: महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व)

चर्चा में क्यों

6 दिसंबर 2025 को भारत में डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर की 70वीं पुण्यतिथि (महापरिनिर्वाण दिवस) मनाई गई।

Dr-Bhimrao-Ambedkar

डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर : जीवन परिचय

  • डॉ. अम्बेडकर (1891–1956) एक महान विधिवेत्ता, अर्थचिंतक, समाज सुधारक और भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे।
  • उन्होंने जाति-भेद, अस्पृश्यता, अन्याय और सामाजिक असमानता के विरुद्ध जीवनभर संघर्ष किया।
  • आधुनिक भारत की लोकतांत्रिक और समतामूलक संरचना के निर्माण में उनका योगदान अद्वितीय है।

प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा

  • जन्म: 14 April 1891, माहू (मध्यप्रदेश), महार समुदाय में।
  • बचपन से सामाजिक भेदभाव का सामना किया।
  • प्रारम्भिक शिक्षा के बाद बड़ौदा राज्य की छात्रवृत्ति से विदेश अध्ययन का अवसर मिला।
  • उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन में उच्च अध्ययन किया तथा विश्व के श्रेष्ठ विद्वानों में शामिल हुए।
  • उनके प्रारम्भिक शोध जैसे “जातियाँ कैसे बनीं” और “रुपये की समस्या” ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

स्वतन्त्रता आंदोलन और सामाजिक सुधार में योगदान

अस्पृश्यता के विरुद्ध सामाजिक आन्दोलन 

  • महाड़ सत्याग्रह (1927): दलितों को सार्वजनिक जलस्रोत से पानी लेने के अधिकार हेतु ऐतिहासिक आन्दोलन। 
  • यह भारत में पहली बार संगठित रूप से दलित अधिकारों का बड़ा आंदोलन था।

मन्दिर प्रवेश आन्दोलन

  • काला राम मन्दिर सत्याग्रह (1930): धार्मिक समानता और पूजा के अधिकार के लिए बड़ा संघर्ष।
  • इस आन्दोलन ने सामाजिक समानता की बहस को नई दिशा दी।

राजनैतिक प्रतिनिधित्व की माँग

  • गोलमेज सम्मेलन (1930–1932) में उन्होंने दलित समाज की राजनैतिक समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया।
  • पृथक निर्वाचक मंडल की माँग को उन्होंने न्यायसंगत तरीके से प्रस्तुत किया।

पूना समझौता (1932)

  • महात्मा गाँधी और अम्बेडकर के बीच हुआ समझौता।
  • पृथक निर्वाचक मंडल के स्थान पर विधायिकाओं में आरक्षित स्थानों का प्रावधान तय हुआ।
  • आधुनिक आरक्षण व्यवस्था की बुनियाद इसी समझौते से पड़ी।

श्रमिक अधिकारों के संरक्षक 

  • 1942–1946 के दौरान वायसराय की परिषद में श्रम सदस्य के रूप में 8 घंटे का कार्यदिवस, मातृत्व लाभ, वेतनभोगी अवकाश, श्रम विवाद समाधान व्यवस्था और श्रमिक कल्याण निधि आदि ये सब महत्वपूर्ण सुधार उनके प्रयासों से किए गए।

भारतीय संविधान का निर्माण 

संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में मौलिक अधिकार, समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बन्धुत्व का ढाँचा, संघीय व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका, अनुसूचित जाति, जनजाति और वंचित वर्गों के लिए संरक्षण इन सबकी संरचना में उनकी निर्णायक भूमिका थी।

आर्थिक चिंतन में योगदान 

  • मौद्रिक नीति के निर्माता: रुपये की स्थिरता पर उनका अध्ययन बाद में भारतीय रिज़र्व बैंक के गठन की नींव बना। 
  • वित्तीय विकेन्द्रीकरण: प्रांतीय वित्त पर उनके शोध ने केन्द्रीय–राज्य वित्तीय सम्बन्धों का आधार तैयार किया। 
  • जल और ऊर्जा संसाधन योजना: उन्होंने बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं, दामोदर घाटी योजना और केन्द्रीय जल आयोग जैसी संस्थाओं को बढ़ावा दिया। 
  • रोज़गार विनिमय केन्द्रों की व्यवस्था उनके प्रयास का परिणाम थी। 
  • मूल्यवृद्धि (महँगाई) से गरीबों पर पड़ने वाले अधिक भार पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।

सम्बद्ध महत्वपूर्ण संस्थाएँ 

  • बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1923) 
  • स्वतंत्र श्रमिक दल (1936) 
  • अनुसूचित जाति महासंघ (1942) 
  • प्रजातान्त्रिक पार्टी (1956, उनके बाद गठित)

प्रमुख रचनाएँ 

  • जाति का विनाश 
  • रुपये की समस्या 
  • शूद्र कौन थे 
  • बुद्ध और उनका धम्म 
  • अस्पृश्य और अस्पृश्यता पर निबन्ध 
  • बुद्ध या कार्ल मार्क्स 
  • प्रमुख पत्र: मूकनायक, बहिष्कृत भारत, जनता, समता

अन्तिम जीवन 

  • वर्ष 1954 से स्वास्थ्य कमजोर होने लगा, परन्तु वे लेखन और संसदीय कार्य में सक्रिय रहे। 
  • “बुद्ध और उनका धम्म” उनका अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रन्थ है। 
  • 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने नागपुर में पाँच लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध दीक्षा ग्रहण की। 
  • उनका अंतिम संदेश था “राजनैतिक लोकतंत्र तब तक स्थायी नहीं हो सकता, जब तक उसके आधार में सामाजिक लोकतंत्र न हो।” 
  • 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। 
  • उनकी स्मृति–स्थली चेत्यभूमि, मुम्बई आज भी करोड़ों अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल है। 
  • वर्ष 1990 में उन्हें भारत रत्न प्रदान किया गया।

निष्कर्ष 

डॉ. अम्बेडकर केवल संविधान के निर्माता नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के नैतिक, सामाजिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक स्तम्भ थे। उनका संदेश आज भी हमें याद दिलाता है कि वास्तविक प्रगति वही है जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर, गरिमा और न्याय मिले। 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी विचारधारा भारत की दिशा और भविष्य दोनों को प्रभावित करती है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR