चर्चा में क्यों ?
हाल ही में, यह देखा गया कि जीपीएस स्पूफिंग संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के पास उड़ने वाले विमानों के लिए युद्ध का एक डिजिटल कोहरा पैदा कर रहा है।

जीपीएस स्पूफिंग क्या है ?
- जीपीएस स्पूफिंग, जिसे जीपीएस सिमुलेशन भी कहा जाता है, एक ऐसी तकनीक है जिसमें नकली जीपीएस सिग्नल भेजकर वास्तविक जीपीएस रिसीवर को धोखा दिया जाता है।
- इस प्रक्रिया में दुर्भावनापूर्ण इरादे से नेविगेशन डेटा में हेरफेर किया जाता है।
- ब्लॉकिंग से अलग: सामान्य जीपीएस जैमिंग सिग्नल को ब्लॉक कर देती है, जबकि स्पूफिंग में नकली सिग्नल असली सिग्नल को ओवरराइड कर देता है।
- कैसे काम करता है: विमान का नेविगेशन सिस्टम नकली सिग्नल को असली मानकर स्थिति, ऊँचाई, गति और समय के गलत आंकड़े दिखाता है।
- उद्देश्य: लक्ष्य को गलत नेविगेशन जानकारी पर आधारित निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना।
कहाँ यह खतरा सबसे अधिक है ?
- जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं अक्सर उन क्षेत्रों में रिपोर्ट होती हैं जहाँ राजनीतिक या सैन्य तनाव अधिक होता है:
- काला सागर क्षेत्र
- पश्चिम एशिया
- मध्य पूर्व
क्यों विमान प्रभावित होते हैं ?
- जीपीएस उपग्रह के सिग्नल बहुत कमजोर होते हैं।
- यदि नकली सिग्नल भेजा जाए, तो ऑनबोर्ड रिसीवर इसे असली मान लेता है।
- विशेष हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का उपयोग करके नकली सिग्नल वास्तविक सिग्नल को ओवरराइड कर देते हैं।
- परिणामस्वरूप पायलट और नेविगेशन सिस्टम को पूरी तरह से गलत स्थिति दिखाई देती है।
प्रभाव और खतरे
- विमान और ड्रोन के सही संचालन में बाधा
- हवाई क्षेत्र में टकराव और दुर्घटना का जोखिम बढ़ना
- सैन्य और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर खतरा
निवारक उपाय और समाधान
- एंटी-स्पूफिंग तकनीक: उन्नत रिसीवर और एन्क्रिप्टेड सिग्नल
- सुरक्षा प्रशिक्षण: पायलटों और ऑपरेटरों को स्पूफिंग के संकेत पहचानना
- नियमित सिस्टम ऑडिट: विमान और नेविगेशन सिस्टम की नियमित जांच
- साइबर सुरक्षा उपाय: नकली सिग्नल का पता लगाने के लिए डिजिटल फ़िल्टर
निष्कर्ष
जैसे-जैसे हवाई और समुद्री यातायात बढ़ रहा है, जीपीएस स्पूफिंग का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है। एंटी-स्पूफिंग तकनीक और सुरक्षित नेविगेशन प्रोटोकॉल को अपनाकर ही इस खतरे को न्यूनतम किया जा सकता है।