भारत में चयापचय संबंधी रोगों का बढ़ता बोझ

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में Global Burden of Disease Study के नवीनतम विश्लेषण से यह सामने आया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चयापचय संबंधी बीमारियों का बोझ भारत और चीन में सबसे अधिक है। विशेष रूप से भारत में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।


चयापचय संबंधी रोग क्या हैं ?

  • चयापचय संबंधी रोग (Metabolic Diseases) ऐसे विकारों का समूह हैं जो शरीर की चयापचय प्रक्रिया (Metabolism) को प्रभावित करते हैं। 
  • चयापचय वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है, ऊर्जा का भंडारण करता है और उसका उपयोग करता है।
  • जब यह प्रक्रिया असंतुलित हो जाती है तो कई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

प्रमुख चयापचय संबंधी बीमारियाँ

  • टाइप-2 मधुमेह (Type-2 Diabetes)
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension)
  • मोटापा या उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
  • उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol)
  • चयापचय संबंधी शिथिलता से जुड़ा स्टीटोटिक लिवर रोग (MASLD / Fatty Liver)
  • ये बीमारियाँ मुख्य रूप से अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तनावपूर्ण जीवनशैली और बढ़ते शहरीकरण से जुड़ी होती हैं। 
  • इन्हें गैर-संक्रामक रोग (NCDs) की प्रमुख श्रेणी में रखा जाता है।

वैश्विक रोग भार अध्ययन (GBD) के प्रमुख निष्कर्ष

  • इस अध्ययन में 1990 से 2023 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया तथा 2030 तक की संभावित स्थिति का अनुमान लगाया गया।बीमारी के बोझ का आकलन दो प्रमुख संकेतकों के आधार पर किया गया:
  • विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALY)
  • यह बीमारी के कुल प्रभाव को मापने का सूचक है, जिसमें शामिल हैं:
    • असमय मृत्यु के कारण खोए गए वर्ष
    • बीमारी या विकलांगता के साथ बिताए गए वर्ष
  • मृत्यु दर
    • किसी विशेष बीमारी के कारण होने वाली कुल मौतों की संख्या।
    • अध्ययन में बीमारी के बोझ में योगदान देने वाले पाँच प्रमुख जोखिम कारकों की पहचान की गई:
  • टाइप-2 मधुमेह
    • उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप
    • उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI)
    • उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल
  • चयापचय संबंधी शिथिलता से संबंधित स्टीटोटिक लिवर रोग (MASLD)
  • इन निष्कर्षों से स्पष्ट है कि चयापचय संबंधी विकार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुके हैं।

भारत में चयापचय रोगों का बोझ

  • अध्ययन के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चयापचय संबंधी रोगों का कुल बोझ भारत में सबसे अधिक है।

2023 के प्रमुख आँकड़े

  • टाइप-2 मधुमेह से जुड़े लगभग 2.1 करोड़ DALYs
  • मधुमेह के कारण लगभग 5.8 लाख मौतें
  • उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप के कारण लगभग 3.8 करोड़ DALYs
  • उच्च रक्तचाप से लगभग 15.7 लाख मौतें
  • DALY के आधार पर 2023 में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चयापचय रोगों का सबसे अधिक बोझ वाला देश बन गया।
  • हालाँकि उच्च BMI, LDL कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर रोग के मामलों में भारत अभी भी चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।

भारत में बढ़ते जोखिम कारक

  • अध्ययन में कई ऐसे कारकों की पहचान की गई है जो भारत में चयापचय संबंधी बीमारियों को बढ़ा रहे हैं।
  • प्रमुख जोखिम कारक
    • मोटापा और उच्च BMI में तेजी से वृद्धि
    • उच्च एलडीएल कोलेस्ट्रॉल
    • फैटी लिवर रोग (MASLD)
    • इसके पीछे मुख्य कारण
    • तेजी से बढ़ता शहरीकरण
    • गतिहीन जीवनशैली (कम शारीरिक गतिविधि)
    • अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन
    • चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा का अत्यधिक उपयोग
  • इन सभी कारणों से भारत में चयापचय संबंधी रोगों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

  • चयापचय संबंधी बीमारियों का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।
  • यदि वर्तमान रुझान जारी रहते हैं तो अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ेगी,
    • दीर्घकालिक उपचार की लागत बढ़ेगी
    • कार्यबल की उत्पादकता घटेगी
    • स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा
  • अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक इन जोखिम कारकों में और वृद्धि होने की संभावना है।

रोकथाम और नीतिगत उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में चयापचय संबंधी रोगों से निपटने के लिए एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति अपनाना आवश्यक है।

  1. स्वस्थ आहार को बढ़ावा
    • अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण और भोजन में चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा कम करना।
  2. पोषण लेबलिंग
    • खाद्य उत्पादों के पैकेट पर स्पष्ट पोषण लेबलिंग से उपभोक्ताओं को सही विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है।
  3. सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा
    • शहरों में:
    • पैदल चलने के रास्ते
    • साइकिल ट्रैक
    • सार्वजनिक व्यायाम सुविधाएँ
    • जैसी व्यवस्थाएँ विकसित की जानी चाहिए।
  4. स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान
    • मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और फैटी लिवर जैसी बीमारियों की नियमित जांच और समय पर पहचान को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

निष्कर्ष

भारत में चयापचय संबंधी रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी समस्याएँ न केवल स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव डालती हैं, बल्कि देश की आर्थिक उत्पादकता को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली, जागरूकता, नियमित जांच और प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेप के माध्यम से ही इन बीमारियों के बढ़ते बोझ को नियंत्रित किया जा सकता है।

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