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जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में वृद्धि 

चर्चा में क्यों 

हाल ही में, अमेरिका स्थित राष्ट्रीय समुद्री एवं वायुमंडलीय प्रशासन (National Oceanic and Atmospheric Administration : NOAA) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में हरितगृह गैस तथा समुद्र के जल स्तर में असामान्य रूप से वृद्धि हो रही है।

हरितगृह गैस में वृद्धि 

  • एन.ओ.ए.ए. के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में हरितगृह गैसों की मात्रा 414.7 भाग प्रति मिलियन (ppm) दर्ज़ की गयी है जो वर्ष 2020 की तुलना में 2.3 भाग अधिक है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, हरितगृह गैसों के स्तर में वृद्धि का प्रमुख कारण कोविड-19 महामारी के फलस्वरूप वैश्विक अर्थव्यस्था में मंदी के बाद विगत वर्ष जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन में असानी होना है। 

जल स्तर में वृद्धि 

  • समुद्री जलस्तर के मापन में उपग्रह का प्रयोग वर्ष 1993 से किया जा रहा है। वर्ष 1993 के औसत से जलस्तर में वृद्धि 97 मिमी. या 3.8 इंच के नए रिकॉर्ड पर पहुँच गई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र के जलस्तर में गत 10 वर्षों से निरंतर वृद्धि हो रही है।

तापमान की स्थिति 

सर्वाधिक गर्म वर्ष

  • विशेषज्ञों के अनुसार 1800 के दशक के मध्य से शुरू किये गए वैश्विक रिकॉर्ड के बाद वर्ष 2021 को सात सर्वाधिक गर्म वर्षों में से एक माना जा रहा है।
  • ‘वैश्विक औसत सतह तापमान’ के संदर्भ में इसे विश्व के छह सबसे गर्म वर्षों में उल्लिखित किया गया है।

तापमान विसंगति 

  • निम्न औसत तापमान का मुख्य कारक ‘ला नीना’ था। ला नीना प्रशांत क्षेत्र की एक सामयिक घटना है, जिससे समुद्री पानी ठंडा हो जाता है। 
  • जून और जुलाई माह के अतिरिक्त इसकी स्थिति इस क्षेत्र में प्रबल बनी रही।
  • विश्व स्तर पर वर्ष 2021 में फरवरी माह में तापमान विसंगति सबसे कम रही। साथ ही, फरवरी 2014 के बाद यह सबसे ठंडा फरवरी माह था।
  • हालाँकि, जलीय तापमान भी असाधारण रूप से अधिक दर्ज़ किया गया। तिब्बत की झीलों में भी उच्च तापमान दर्ज किया गया जो एशिया के कई देशों के लिये जल का प्रमुख स्रोत है।

उष्णकटिबंधीय तूफानों की संख्या में वृद्धि 

  • तापमान में वृद्धि होने से उष्णकटिबंधीय तूफानों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। इसमें विगत वर्ष असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। 
  • इसमें फिलीपींस को प्रभावित करने वाला सुपर टायफून ‘राय’ और अमेरिका को प्रभावित करने वाला कैटरीना के बाद सबसे खतरनाक हरिकेन ‘इडा’ का नाम उल्लेखनीय है।

अन्य प्रभाव

  • जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 1409 के बाद पहली बार क्योटो (जापान) में चेरी के वृक्ष समय से पूर्व खिल (पुष्पित) गए थे।
  • साथ ही, इसके कारण जंगल की आग की घटनाओं में वृद्धि हुई और अमेरिकी पश्चिम व साइबेरिया दोनों में विनाशकारी आग की स्थिति देखी गई।
  • गौरतलब है की वर्ष 2015 में संपन्न पैरिस जलवायु समझौते में वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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