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भारत दुनिया में कच्चे इस्पात का दूसरा सबसे बड़े उत्पादक

प्रारंभिक परीक्षा – इस्पात उत्पादन
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3  - सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय, बुनियादी ढाँचाःइस्पात 

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय इस्पात एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय जारी एक बयान में कहा गया है कि भारत, 2018 में जापान को पीछे छोड़ते हुए वर्तमान में कच्चे इस्पात का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है।
  • बीते 9 साल में भारत 2022-23 में 6.02 एमटी आयात की तुलना में 6.72 एमटी तैयार इस्पात का निर्यात दर्ज करते हुए इस्पात का सकल निर्यातक बना हुआ है।
  • वर्ष 2014-15 में 5.59 एमटी के निर्यात की तुलना में 9.32 एमटी के आयात के साथ भारत इस्पात का सकल आयातक बना हुआ था।

मंत्रालय द्वारा 2014-15 से पूर्व से लेकर 2022-23 तक इस्पात क्षेत्र द्वारा की गई प्रगति का भी उल्लेख किया गया है, जिसे नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

मुख्य मानदंड

वित्त वर्ष 2014-15

वित्त वर्ष 2022-23

में बढ़ोतरी

कच्चे इस्पात की क्षमता (एमटी)

109.85

160.3

46%

कच्चे इस्पात का उत्पादन (एमटी)

88.98

126.26

42%

कुल तैयार इस्पात का उत्पादन (एमटी)

81.86

122.28

49%

उपभोग (एमटी)

76.99

119.86

57%

प्रति व्यक्ति इस्पात का उपभोग (किग्रा में)

60.8

86.7

43%

  • 2014-15 से 2022-23 के दौरान सेल, एनएमडीसी, एमओआईएल, केआईओसीएल, एमएसटीसी और एमईसीओएन जैसे सीपीएसई ने कैपेक्स के लिए अपने संसाधनों से ₹90,273.88 करोड़ रुपये का उपयोग किया और भारत सरकार को ₹21,204.18 करोड़ रुपये के लाभांश का भुगतान किया।

स्टील स्क्रैप रिसाइक्लिंग नीति:

  • वैज्ञानिक प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए स्टील स्क्रैप पुनर्चक्रण नीति पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
  • विभिन्न शहरों में छह वाहन स्क्रैपिंग केंद्र खोले गए हैं, वहीं तीन अन्य का संचालन जल्द ही शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। 
  • एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों (ईएलवी) यानी जिन वाहनों का जीवनकाल समाप्त हो गया है, उनका उपयोग स्टील के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाएगा और इस संबंध में राज्य सरकारों के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी शामिल किया जा रहा है।

राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 (एनएसपी 2017):

  • इस नीति के तहत भारत ने 2030-31 तक कुल कच्चा इस्पात क्षमता 300 एमटीपीए और कुल कच्चे इस्पात की मांग/ उत्पादन 255 एमटीपीए हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।
  • 2030-31 तक सेल की कच्चे इस्पात के उत्पादन की परिचालन क्षमता मौजूदा 19.51 एमटीपीए से बढ़ाकर लगभग 35.65 एमटीपीए तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
  • सरकारी खरीद में घरेलू स्तर पर निर्मित लौह और इस्पात उत्पादों (डीएमआई और एसपी नीति) को वरीयता नीति के प्रभाव के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 34,800 करोड़ रुपये का आयात प्रतिस्थापन हो गया है।

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई):

  • विशेष इस्पात के घरेलू उत्पादन के लिए पीएलआई योजना के तहत 27 कंपनियों से जुड़े 57 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह 24.7 मिलियन टन की डाउनस्ट्रीम क्षमता वृद्धि और 55,000 लोगों के लिए रोजगार सृजन क्षमता के साथ लगभग 30,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करेगा।
  • इस्पात मंत्रालय ने देश में उत्पादित स्टील की मेड इन इंडिया ब्रांडिंग की पहल की है और प्रमुख इस्पात उत्पादक इस दिशा में पहले ही साथ आ चुके हैं।
  • इस्पात मंत्रालय भी पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल पर शामिल हो गया है और 22 महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की पहचान की गई है और इसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, रेल मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर आगे बढ़ा रहा है। 

इस्पात क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन:

  • इस्पात क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने हरित इस्पात उत्पादन के प्रत्येक पहलू के लिए उठाए जाने वाले कदमों की पहचान करने के उद्देश्य से कार्यबलों का गठन किया गया है। 
  • इसके लिए इस्पात उद्योग के हितधारकों और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (एमओईएफसीसी), रेलवे, बिजली जैसे मंत्रालयों/विभागों साथ लगातार बातचीत कर रहा है।
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