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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2022

प्रारंभिक परीक्षा - इंडिया जस्टिस रिपोर्ट
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 - न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य

सन्दर्भ

  • हाल ही में टाटा ट्रस्ट द्वारा इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (IJR) 2022 को जारी किया गया। 
  • यह इंडिया जस्टिस रिपोर्ट का तीसरा संस्करण है, इससे पहले वर्ष 2019 और वर्ष 2020 में भी इसे जारी किया गया था। 

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण तथ्य 

  • IJR के अनुसार, दिसंबर 2022 तक, उच्च न्यायालय 1,108 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या की तुलना में केवल 778 न्यायाधीशों के साथ कार्य कर रहे थे।
  • अधीनस्थ अदालतें, 24,631 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या की तुलना में 19,288 न्यायाधीशों के साथ कार्य कर रही हैं। 
  • उच्च न्यायालय के स्तर पर, उच्चतम औसत पेंडेंसी, उत्तर प्रदेश(11.34 वर्ष) में है, उसके बाद पश्चिम बंगाल(9.9 वर्ष) का स्थान है। 
  • उच्च न्यायालयों में सबसे कम औसत पेंडेंसी, त्रिपुरा(1 वर्ष) में है, उसके बाद सिक्किम(1.9 वर्ष) और मेघालय(2.1 वर्ष) का स्थान है।

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  • केस क्लीयरेंस रेट (CCR) एक वर्ष में कुल दर्ज किये गए मामलों में से निपटाए गए मामलों की संख्या के अनुपात को दर्शाता है।
  • CCR का 100% से अधिक होना दर्शाता है, कि लंबित मामलों की संख्या कम हो रही है। 
  • IJR के अनुसार, 2018-19 के दौरान केवल चार उच्च न्यायालयों का CCR 100% या उससे अधिक था। हालाँकि, 2022 में, 100% या उससे अधिक CCR वाले उच्च न्यायालयों की संख्या 12 थी। 
  • सबसे अधिक केस क्लीयरेंस रेट (CCR) वाले उच्च न्यायालयों में केरल(156%), ओडिशा (131%) हैं जबकि राजस्थान (65%) और बॉम्बे (72%) उच्च न्यायालयों में CCR सबसे कम है।
  • न्याय वितरण के मामले में एक करोड़ से अधिक आबादी वाले 18 प्रमुख और मध्यम आकार के राज्यों में कर्नाटक पहले, तमिलनाडु दूसरे और तेलंगाना तीसरे स्थान है तथा उत्तर प्रदेश 18वें स्थान पर है, जो सबसे नीचे है।

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  • एक करोड़ से कम आबादी वाले सात छोटे राज्यों की सूची में सिक्किम पहले, अरुणाचल प्रदेश दूसरे तथा गोवा सबसे नीचे सातवें स्थान पर रहा।

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  • वर्ष 2021 के दौरान जेलों में कैदियों की संख्या में 10.8% की वृद्धि के साथ जेल में कैदियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 
    • कैदियों की कुल संख्या में से 77% कैदी अंडरट्रायल है।
  • देश के उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में 4.9 करोड़ मामले लंबित हैं।
  • वर्ष 2020 और 2022 के बीच, उच्च न्यायालयों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में लगभग दो प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • जिला अदालत स्तर पर जजों की कुल संख्या में महिलाओं की संख्या 35% है।
  • IJR के अनुसार, राज्य कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरणों ने मुआवजे की मांग करने वाले 97,037 आवेदनों में से केवल 66% का ही निपटारा किया।

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सुझाव 

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  • पर्याप्त कवरेज सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस कर्मियों की भर्ती और प्रशिक्षण बढ़ाना चाहिए।
  • प्रत्येक वर्ष, प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या और प्रशिक्षित कर्मियों की संख्या में वृद्धि की जाये।
  • पुलिस बजट का एक बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण के लिए आवंटित किया जाये।
  • नई जेलों के निर्माण और मौजूदा जेलों का विस्तार करने में निवेश किया जाये।
  • अहिंसक अपराधियों के लिए सजा और पुनर्वास के वैकल्पिक रूपों का अन्वेषण किया जाये।
  • अंडरट्रायल कैदियों की संख्या को कम करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं को कारगर बनाया जाये।
  • व्यक्तिगत मुचलके पर जमानत और रिहाई का प्रयोग बढ़ाया जाये।
  • लंबित मामलों को कम करने के लिए जजों की संख्या बढ़ाई जाये।
  • कार्रवाई को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रौद्योगिकी के साथ अदालती प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण किया जाये।
  • अधिक महिलाओं को न्यायाधीश बनने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नीतियां लागू की जायें।
  • महिला न्यायाधीशों को उनके करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाये।
  • कानूनी सहायता के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित किया जाये।
  • न्याय तक पहुंच पर कानूनी सहायता के प्रभाव को ट्रैक करने के लिए निगरानी और मूल्यांकन तंत्र लागू किया जाये।
  • कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित पीड़ितों के लिए सहायता सेवाएँ प्रदान की जायें।
  • इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट अपराध के पीड़ितों की जरूरतों पर अधिक ध्यान देने की मांग करती है, जिसमें कानूनी सहायता और पीड़ित मुआवजा योजनाओं तक पहुंच में सुधार शामिल है।
  • इन चुनौतियों का समाधान करके, भारत अधिक न्यायसंगत और प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली प्राप्त करने के करीब पहुंच सकता है।

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 

  • इंडिया जस्टिस रिपोर्ट, सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन कॉज, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव, TISS-प्रयास, दक्ष, विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी और हाउ इंडिया लाइव्स के सहयोग से टाटा ट्रस्ट द्वारा जारी की जाती है।
  • यह न्याय तक पहुंच प्रदान करने की उनकी क्षमता के आधार पर  राज्यों की रैंक को निर्धारित करती है। 
  • इस रिपोर्ट में न्याय प्रणाली के 4 प्रमुख स्तंभों की क्षमता का आकलन किया जाता है -
    • पुलिस।
    • जेल।
    • न्यायपालिका।
    • कानूनी सहायता।
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